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रिकॉर्ड्स तो कुंबले को बनाते हैं चीफ कोच का सबसे बड़ा दावेदार

वर्तमान क्रिकेट में मैदान के अंदर के दबाव की हो तो भी अनिल कुंबले का हाल के सालों तक खेलते रहने का अनुभव इन दोनों पर भारी पड़ता दिखाई देता है

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Kamal Singh Rajpoot

Jun 17, 2016

Anil kumbale

Anil kumbale

कुलदीप पंवार

नई दिल्ली। भले ही टीम इंडिया के चीफ कोच का नाम अभी तक तय नहीं किया गया हो और इस चयन के लिए बनी सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण सरीखे बड़े नामों वाली चयनसमिति ने कोई बयान नहीं दिया हो, लेकिन इस पद की होड़ में अभी से रवि शास्त्री और संदीप पाटिल को सबसे आगे करार दिया जाने लगा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की तरफ से चीफ कोच पद के लिए दी गई शर्तों के आधार पर चल रहे इन कयासों में अनिल कुंबले को शास्त्री और पाटिल से इस होड़ में पिछडऩे की बात कही जा रही हो। इन तीनों समेत चीफ कोच पद के लिए आवेदक बने अन्य

18 क्रिकेटरों में से किसका नाम 22 जून को महान क्रिकेट त्रय के समन्वय से सामने आएगा, ये तो अभी भविष्य के गर्त में है,, लेकिन कई बातें ऐसी हैं, जिनके बूते पर कुंबले अपनेआप इस पद के लिए सबसे बड़े दावेदार साबित हो रहे हैं।


आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ बातों के बारे में....


1. सबसे बड़ा खिलाड़ी

भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ कोच पद का मतलब है कि विराट कोहली, महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा सरीखे बड़े नाम वाले क्रिकेटरों को गाइड करना यानि ऐसे क्रिकेटरों को खेलने की राह दिखाना, जिनके नाम पर विश्व भर में दर्जनों रिकॉर्ड दर्ज हैं। ऐसे क्रिकेटरों को गाइड करने के लिए सबसे बड़ा दावेदार वही हो सकता है, जो खुद उनसे बड़ा कद रिकॉर्ड बुक पर रखता हो।


योग्यता की इस कसौटी पर कसा जाए तो 132 टेस्ट मैच में 619 विकेट और 271 वनडे में 337 विकेट के साथ कुंबले का कद 29 टेस्ट में 1588 रन और 45 वनडे में 1005 रन बनाने वाले संदीप पाटिल तथा 80 टेस्ट में 3830 रन व 151 विकेट और 150 वनडे में 3108 रन व 129 विकेट वाले रवि शास्त्री से खुद ही कई गुना बड़ा दिखाई देगा। इतने बड़े कद के साथ कोच बनने पर कुंबले का सम्मान वर्तमान टीम इंडिया का हर खिलाड़ी सिर्फ पद के कारण नहीं बल्कि उनके क्रिकेट में दिए योगदान के कारण भी अपनेआप करेगा।


2. तीनों में सबसे युवा उम्मीदवार

यदि उम्र की कसौटी पर देखा जाए तो भी अनिल कुंबले अपने दोनों नजदीकी प्रतिद्वंद्वियों संदीप पाटिल और रवि शास्त्री पर भारी पड़ते दिखाई देंगे। 45 वर्षीय अनिल कुंबले के मुकाबले 59 साल के संदीप और 54 साल के रवि शास्त्री क्रिकेटरों की वर्तमान पीढ़ी से कहीं ज्यादा पुराने साबित होंगे। "युवा कोच" से टीम का खिलाड़ी ज्यादा खुलकर अपनी परेशानियां बांट सकता है बनिस्बत एक बुजुर्ग "अध्यापक" के।


3. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के वर्तमान दबाव के जानकार

भले ही संदीप पाटिल और रवि शास्त्री लगातार किसी न किसी रूप में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से जुड़े रहे हों, लेकिन बात यदि वर्तमान क्रिकेट में मैदान के अंदर के दबाव की हो तो भी अनिल कुंबले का हाल के सालों तक खेलते रहने का अनुभव इन दोनों पर भारी पड़ता दिखाई देता है। किसी भी तरह की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अंतिम बार 1986 में बल्ला पकडऩे वाले संदीप हों या 1992 में पिच पर दिखाई दिए। रवि शास्त्री, इन दोनों ही के मुकाबले पर आईपीएल के रूप में 2010 तक अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्रिकेट खेलने वाले अनिल कुंबले वर्तमान क्रिकेट की मांग को कहीं ज्यादा समझते हैं और इस नजरिए से वो खिलाडिय़ों की समस्याओं को समाधान भी ज्यादा अच्छे तरीके से कर सकते हैं।


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4. कोचिंग के मुद्दे पर पीछे, लेकिन मेंटरिंग में आगे

बीसीसीआई ने भले ही चीफ कोच के लिए दिए विज्ञापन में किसी अंतरराष्ट्रीय टीम का सफल कोच रहने की शर्त लगाई हो और 1996 में छह महीने के लिए टीम इंडिया के कोच रहने समेत कीनिया सरीखी एसोसिएट लेवल की टीम को 2003 के वल्र्ड कप सेमीफाइनल तक पहुंचाने का कारनामा संदीप पाटिल के खाते में जुड़ा हो, जबकि रवि शास्त्री के टीम इंडिया का कार्यवाहक चीफ कोच रहने के समय इस बार टी20 वल्र्ड कप फाइनल में टीम पहुंचने से अनिल कुंबले इन दोनों से पीछे दिखाई देते हों। लेकिन अंतरराष्ट्रीय टीम के लिए जब कोचिंग टिप्स से ज्यादा मेंटरिंग करने की बात हर विशेषज्ञ कहता है तो मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के मेंटर रहे अनिल कुंबले का पलड़ा भारी दिखाई देता है।


5. नियमों की जानकारी में सबसे आगे

आईसीसी की क्रिकेट कमेटी के चेयरमैन और बीसीसीआई की टेक्निकल कमेटी के अध्यक्ष होने मात्र से ही अनिल कुंबले की नियम-कायदों को लेकर जानकारी का अंदाजा लगाया जा सकता है। संदीप पाटिल और रवि शास्त्री भी क्रिकेट के कम बड़े जानकार नहीं हैं, लेकिन फिर भी कहीं न कहीं अनिल कुंबले को इस मामले में इनसे आगे माना जा सकता है। क्रिकेट की सबसे बड़ी संस्था में अनिल की प्रतिष्ठा भी कई मौकों पर टीम इंडिया के कोच के रूप में आने वाली समस्याओं को बीसीसीआई के स्तर तक पहुंचने से पहले ही सुलझा सकती हैं।

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6. कोच के रूप में मिलेगा दोस्त

अनिल कुंबले को टीम इंडिया में उनके खेलने के समय से जानने वाला हर शख्स एक बात अवश्य जोड़ेगा कि वह बहुत ही विनम्र और दोस्तीभरे व्यवहार वाले हैं। वर्तमान टीम इंडिया में भी उनके कई दोस्त मौजूद हैं। ऐसे में उनके कोच बनने पर टीम के खिलाडिय़ों को एक अधिकारी की बजाय दोस्त मिलने का अहसास ज्यादा होगा, जो उनकी समस्याएं बिना किसी संकोच के कोच तक पहुंचाने में सहायक होगा। अपने सख्त व्यवहार के लिए मशहूर संदीप पाटिल और कई बाहर ईगो को लेकर विवादों में फंस चुके रवि शास्त्री के बारे में यह बात नहीं कही जा सकती है।


7. जुझारूपन में भी बहुत आगे हैं कुंबले

वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का मतलब है प्लानिंग, परफॉर्मेंस और किलर इंस्टिंक्ट यानि जुझारूपन। ऐसे में याद कीजिए भारतीय क्रिकेट टीम का वेस्टइंडीज के खिलाफ उनकी धरती पर 2002 के दौरे में एंटिगुआ टेस्ट, जो अनिल कुंबले के जुझारूपन के लिए ही प्रसिद्ध हो गया। अपनी टीम को हार से बचाने के लिए बल्लेबाजी करते हुए जबड़ा टूट जाने के बाद भी 20 मिनट तक पिच पर अपने साथी का साथ देने वाले कुंबले बाद में ब्रायन लारा को स्कोर के नजदीक जाता देखकर गेंदबाजी करने के लिए भी मैदान में उतर गए थे। जब उन्हें ऑपरेशन के लिए रवाना होना था, तब वह टूटे हुए जबड़े से पट्टी बांधकर 14 ओवर फेंकते हुए लारा को आउट करने के बाद ही वह मैदान से लौटे और यह टेस्ट ड्रॉ हो गया। जुझारूपन का ऐसा कोई भी उदाहरण रवि शास्त्री या संदीप पाटिल के खाते में अपने खिलाडिय़ों को प्रेरित करने के लिए दर्ज नहीं है।

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