
तीन मित्र एक साथ कोरोना पॉजिटिव, फिर फिर नेगेटिव पर किया प्लाज्मा डोनेशन
प्रेरणा और प्रोत्साहन की कमी
यह बात पूरी तरह से सही नहीं है कि जो व्यक्ति कोरोना को मात दे चुका है, वह प्लाज्मा डोनेट नहीं करना चाहता या उसे झिझक है। असल में सरकार ने इसको लेकर कोई विशेष जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाए। रक्तदान को लेकर जिस प्रकार से विभिन्न आयोजन होते हैं और कैम्स लगाए जाते हैं, उस प्रकार का प्रयास प्लाज्मा डोनेट करवाने को लेकर सरकार और प्रशासन के स्तर पर भी नहीं किया गया। लोगों में अभी इस समझ की भी कमी है कि प्लाज्मा डोनेट करना, रक्तदान के माफिक ही है। स्वस्थ होने वाले लोगों को प्रेरित और प्रोत्साहित करना होगा, जागरूकता अभियान चलाना होगा। विशेष अनुदान और पुरस्कार योजना की व्यवस्था भी लोगों में प्रेरणा ला सकती है। कुछ अनिष्ट की आशंका ही व्यक्ति को अच्छा करने से डराती है। इस डर को पहले खत्म करना होगा।
-अंकित पीपलवा, जयपुर
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सकारात्मक माहौल बनाने की जरूरत
प्लाज्मा दान करने में अनेक कारण अवरोधक बन रहे हैं। कोरोना मरीजों के साथ अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की खबरें, प्लाज्मा डोनरों के सकारात्मक अनुभवों के प्रकाशन में कमी आदि कई कारण नकारात्मकता पैदा करते हैं। कई मामलों में यह भी देखा गया कि प्लाज्मा डोनर को कोई ठोस कारण नहीं बता कर वापस लौटा दिया जाता है। इससे भी निराशा बढ़ती है। सरकारी तंत्र और सामाजिक संगठनों को प्लाज्मा डोनरों का सम्मान करके सकारात्मक माहौल बनाना चाहिए।
-पदम मुणोत, बिजयनगर अजमेर
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दोबारा कोरोना की चपेट में आने का डर
ज्यादातर लोग अब भी प्लाज्मा डोनेशन को लेकर झिझक रहे हैं। उन्हें यह डर है कि अभी तो कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी से ठीक हए हैं। फिर अस्पताल जाने पर कहीं दोबारा कोरोना अपनी चपेट में न ले ले। कई लोगों का परिवार तैयार नहीं होता। लोगों को यह समझाना होगा कि प्लाज्मा देने के बाद किसी तरह की कमजोरी नहीं आती। डोनेट नहीं करने पर कुछ समय बाद एंटीबॉडी खुद खत्म हो जाती है।
-हर्षिता शर्मा, जयपुर
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बचा सकते हैं जीवन
प्लाज्मा थेरेपी एक नया शब्द है। कई ऐसे लोग भी हैं जिनका परिवार प्लाज्मा डोनेट के लिए तैयार नहीं होता। लोगों को डर है कि प्लाज्मा डोनेट करने से उनके शरीर मे एंटीबॉडीज कम हो जाएंगी। लोगों को समझना चाहिए कि वे लोग प्लाज्मा डोनेट करके किसी के जीवन की डोर को टूटने से बचा रहे है।
-अशोक कुमार शर्मा, झोटवाड़, जयपुर
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सही जानकारी का अभाव
आज भी हिन्दुस्तान की आबादी का एक वर्ग ऐसा है जो रक्तदान करने से भी कतराता है, तो सोचिये सहर्ष प्लाज्मा डोनेट करने वालों की संख्या कितनी होगी। वास्तविक जानकारी के अभाव में आमजन में प्लाज्मा डोनेट सम्बन्धी भय और भ्रान्ति है। इसके चलते लोग चाहकर भी इसमें भागीदार नहीं बन पा रहे हैं। अत: स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह प्लाज्मा डोनेट सम्बन्धी लोगों की दुविधा का निवारण करे और वास्तविकता से अवगत कराए, ताकि जनमानस में इस नेक कार्य के प्रति रूचि बढ़े।
स्वरूप गोस्वामी, बाड़मेर
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मिल सकता है जीवनदान
प्लाज्मा डोनेट करने को लेकर लोगों में कई भ्रांतियां हैं। उन्हें डर लग रहा है की कहीं फिर उन्हें कोरोना ना हो जाए। उनको लगता है कि प्लाज्मा देने से हिमोग्लोबिन कम हो जाता है, प्लाज्मा देने से कमजोरी आ जाती है, लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि ऐसा कुछ भी नहीं होता है। ठीक हो चुके व्यक्ति अगर प्लाज्मा डोनेशन करेंगे, तो गंभीर कोरोनो रोगियों को नया जीवन दिया जा सकेगा।
-सूर्यपालसिंह, चामुंडेरी, पाली
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डर है बड़ा कारण
प्लाज्मा डोनेट करने में लोगों की झिझक का कारण सही समझ नहीं होना एवं डर दोनों ही है। कोरोना जैसी गंभीर बीमारी के संक्रमण के बाद उससे ठीक होने वाले लोगों को लगता है कि प्लाज्मा डोनेट करने से उन्हें कमजोरी या अन्य शारीरिक परेशानी हो सकती है। इसके लिए जागरूकता अभियान आवश्यक है। मोबाइल फोन पर कोरोना से संबंधित जानकारी के साथ प्लाज्मा डोनेट करने वाले संदेश भी रिंगटोन के रूप में प्रसारित करने चाहिए।
-डॉ सीमा अग्रवाल, जयपुर
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पूरी जानकारी का अभाव
प्लाज्मा डोनेट करने में लोग झिझक इसलिए रहे हंै, क्योंकि कई व्यक्तियों को पूरी जानकारी नहीं है। जानकारी के अभाव के कारण लोगों के मन में डर है। इस कारण से जो प्लाज्मा देना चाहते हैं, वे भी नहीं दे पा रहे हैं। इसलिए उन्हें उन्हें पूर्ण जानकारी की आवश्यकता है ।
-दिनेश कुमार पाटीदार, डूंगरपुर
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जागरूकता अभियान की जरूरत
देश की आम जनता अभी प्लाज्मा से अनभिज्ञ है। ये उनके लिए एक नया अनुभव है। जिस प्रकार से लोग पहले रक्तदान करने से डरते थे , उसी प्रकार वर्तमान समय में प्लाज्मा डोनेट करने से डरते हैं। इसलिए सरकार जनता को जागरूक करने के लिए समय-समय पर अभियान चलाकर उसके होने वाले फायदे का प्रचार करे और डोनर के मन की आशंकाएं दूर करे।
-धनराज बाकोलिया, लोसल, सीकर
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प्लाज्मा थेरेपी की जानकारी कम
प्लाज्मा थेरेपी का समुचित प्रचार प्रसार नहीं होने की वजह से आमजन को इसके बारे में खास पता नहीं। इसलिए अभी मरीज और उसके परिजन भी इस पद्धति से इलाज करवाने में घबराते हैं। सरकार का फर्ज है कि वर्तमान कोरोना काल में विज्ञापनों के जरिए इस पद्धति से इलाज के लिए इसका व्यापक प्रचार करे।
-विनोद कटारिया, रतलाम
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भ्रांति है झिझक का कारण
प्रत्येक रिकवर हुए कोविड-19 के मरीज को साधारण भाषा में समझाना होगा कि प्लाज्मा डोनेट करने एवं रक्तदान करने में कोई फर्क नहीं है। अंतर मात्र मेडिकल भाषा का है। वर्तमान में यह भ्रांति एवं झिझक है कि प्लाज्मा डोनेट करने के पश्चात रिकवरी होने में काफी समय लगता होगा। यह दर्दनाक प्रक्रिया तो नहीं है? काम पर लौटने में कहीं ज्यादा वक्त तो नहीं लग जाएगा? कितनी मात्रा में ब्लड लिया जाएगा? यही सब भ्रांतियां हैं जिनसे झिझक पैदा हो रही है। प्लाज्मा दानदाता को यह समझना होगा कि आपकी वजह से किसी मनुष्य की जान बच रही है।
-रमेश कुमार सीकर
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लोगों को सही जानकारी दी जाए
प्लाज्मा डोनेट करने में लोग झिझक इसलिए रहे हैं क्योंकि इस संदर्भ में उचित जागरूकता नहीं फैलाई जा रही है। लोगों को इस बारे में विस्तृत रूप से बताना चाहिए। इसके लाभ और हानि के बारे में भी जागरूकता फैलानी चाहिए।
-प्रखर गुप्ता, भीलवाड़ा
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अनुसंधान की आवश्यकता
प्लाज्मा थेरेपी अभी अपने शुरुआती दौर में ही है। इस स्थिति में इसकी सफलता को लेकर आशंकाएं लोगों के मन में है। डॉक्टरों की राय भी अभी इसके लिए अलग-अलग व अनिश्चित है, जिसके कारण भी लोगों के मन में आशंका है। अत: वे प्लाज्मा डोनेट करने में झिझक रहे हैं। अभी इस थेरेपी के बारे में लोगों को अधिक जागरूक करने व इस पर प्रर्याप्त अनुसंधान व विकास की आवश्यकता है।
-श्याम सुन्दर कुमावत, किशनगढ़, अजमेर
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बढ़ाई जाए जागरूकता
एक स्वस्थ व्यक्ति जिसका वजन 50 किलो से कम नहीं है और बीपी, डायबिटीज, फेफड़ा, लीवर से संबंधित बीमारी की शिकायत नहीं हो, वह व्यक्ति अपना प्लाज्मा बेधड़क दे सकता है । स्वस्थ व्यक्ति में 15 दिन के भीतर प्लाज्मा पूरा हो जाता है। प्लाज्मा डोनेट करने से इम्युनिटी पावर मजबूत होती है। जागरूकता की कमी के कारण लोग प्लाज्मा डोनेट करने से झिझक रहे है।
-सुल्तान सिंह राजपुरोहित, चामुंडा,जोधपुर
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व्यवस्था पर भरोसा नहीं
प्लाज्मा डोनेट करने में लोग झिझक रहे हैं, क्योंकि लोगों को व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भरोसा कम है। राज्य सरकार को प्लाज्मा डोनेट करने के लिए जनता को जागरूक कर विश्वसनीयता कायम करनी होगी!
-कुमेर मावई , नादौती
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डॉक्टर प्रेरित करें
प्लाज्मा दान करने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। कोरोना पॉजिटिव मरीज को एडमिट करते समय मरीज से प्लाज्मा दान करने का संकल्प पत्र भरवाया जाए। इलाज के समय डॉक्टर उसे इस प्रकार का दान करने के लाभ बतलाएं। मानसिक रूप से उसे तैयार किया जाएगा, तो निश्चय ही स्वस्थ होने पर वह प्लाज्मा दान देगा। रक्तदान करवाने वाले संगठन भी जागरूकता अभियान चला सकते हैं।
दिलीप भाटिया, रावतभाटा
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प्रशासन की उदासीनता
कोरोना संक्रमण से लड़ाई में संजीवनी साबित हो रही प्लाज्मा थेरेपी के लिए प्लाज्मा की जरूरत पड़ती है। प्लाज्मा दान करने से हिचकने का मुख्य कारण प्रशासन की उदासीनता है। दिल्ली सरकार द्वारा प्लाज्मा दान करने के लिए लोगों से संपर्क किया जा रहा है,उनकी शंकाओं का समाधान कर प्लाज्मा बैंक तक लाने-ले जाने की व्यवस्था तथा प्रमाण-पत्र भी दिया जा रहा है। स्वयं मुख्यमंत्री कुछ प्लाज्मा डोनर से बात कर उनका हौसाल बढ़ा रहे हैं। अगर दिल्ली सरकार से प्रेरणा लेकर अन्य सरकारें भी प्लाज्मा दान करने के लिए जनांदोलन शुरू करें, तो नि:संदेह लोग सहर्ष आगे आएंगे।
-प्रवीण सैन, जोधपुर
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कमजोर नहीं होगी इम्युनिटी
प्लाज्मा डोनेट करने में लोग झिझक रहे हैं। उनको लगता है कि इससे इम्युनिटी कमजोर हो जाएगी और हम वायरस से लडऩे में सक्षम नहीं होंगे। यह नाम मात्र का भ्रम है। प्लाज्मा डोनेट करने से तो हमारे शरीर की इम्युनिटी सिस्टम को मजबूती होती है। प्लाज्मा डोनेट करने में लोगों की झिझक का मुख्य कारण लोगों में जागरूकता की कमी है।
-महेन्द्र परमार, कुंभलगढ़
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जागरूकता का अभाव
कोरोना मरीजों के स्वस्थ होने के बाद प्लाज्मा डोनेट न करने के पीछे मुख्य कारण जागरूकता का अभाव है। उन लोगों की यह मानसिकता बन जाती है कि बीमारी से शरीर में पहले ही कमजोरी एवं इम्युनिटी पावर कम हो गई है, जबकि ये मात्र एक भ्रम है।
-मनोज चाहर, उच्चैन, भरतपुर
Updated on:
04 Oct 2020 05:24 pm
Published on:
04 Oct 2020 05:15 pm
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