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ट्यूशन: शिक्षा की जरूरत या फैशन?

वीरेश दत्त माथुर, स्वतंत्र लेखक

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आज कई ऑनलाइन व ऑफलाइन ट्यूशन सेन्टर तो विधाथिर्यो को एडमिशन देने के लिए अनेक ऑफर दे रहे है। देश में आज ट्यूशन का कारोबार दिन दुनी रात चोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है।

आज कई ऑनलाइन व ऑफलाइन ट्यूशन सेन्टर तो विधाथिर्यो को एडमिशन देने के लिए अनेक ऑफर दे रहे है। देश में आज ट्यूशन का कारोबार दिन दुनी रात चोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है।


भारत में आज बच्चों को ट्यूशन पर भेजने का चलन बढ़ता जा रहा है। हमारे यहां आज शहर ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में भी बहुत बड़ी संख्या में ट्यूशन व कोचिंग सेन्टर खुल गए है। आज भारत में हर स्तर की परीक्षा के लिए ऑनलाइन व ऑफलाइन ट्यूशन और कोचिंग इन्स्टीट्यूट जगह-जगह खुल गए है। अब बहुत से विधार्थी घर बैठे ही लैबटॅाब व मोबाइल के जरिए ऑनलाइन ट्यूशन ले रहे है और परीक्षा की तैयारियां कर रहे है।
आज कई ऑनलाइन व ऑफलाइन ट्यूशन सेन्टर तो विधाथिर्यो को एडमिशन देने के लिए अनेक ऑफर दे रहे है। देश में आज ट्यूशन का कारोबार दिन दुनी रात चोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है। बेहतर नतीजों और आगे बेहतर संस्थानों में दाखिले के लिए आज निजी ट्यूशन छात्र जीवन का एक अहम हिस्सा बन गए है। माता-पिता आज अपने बच्चों को सीखने की जरूरतों को पर्याप्त पूरा करने के लिए निजी ट्यूशन में दाखिला दिला रहे है।
हमारे यहां कुछ अभिभावक आज बच्चों को मजबूरी में ट्यूशन पर भेज रहे है, क्योंकि वे अपने बच्चों का होमवर्क पूरा नहीं करवा पा रहे है। बहुत से अभिभावक बच्चों की शैक्षिक बुनियाद मजबूत करने के लिए ट्यूशन पर भेज रहे है। वैसे ट्यूशन के प्रति लोगों में बढ़ रहे आकर्षण का मुख्य कारण स्कूली शिक्षा का कमजोर होना माना जा रहा है।
आज हमारे यहां आई.आई.टी, आई.आई.एम और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रवेश आसानी ने नहीं मिलता है। इसलिए इन परीक्षाओं के विशिष्ट पाठ्यक्रमों को समझने के लिए स्टूडेंट को व्यावसायिक तौर पर प्रशिक्षित अध्यापकों से कोचिंग लेनी पड़ रही है। यूं तो कुछ परीक्षाओं के लिए ट्यूशन जरुरी है लेकिन आज हमारे यहां बच्चों को ट्यूशन दिलवाने का फैशन चल निकला है। आजकल एल.के.जी और यू.के.जी तक के बच्चों को अभिभावक ट्यूशन दिलवा रहे है। प्राइवेट ट्यूशन के बढ़ते चलन से आज अभिभावकों की आय पर जोरदार चपत लग रही है।
हमारे यहां आज ट्यूशन अलग-अलग प्रकार से दी जा रही है। बहुत से अध्यापक बच्चों को कक्षा और विषय के अनुसार समूहों में विभाजित कर अपने घर बुला कर ट्यूशन दे रहे है, बहुत से अध्यापक सप्ताह में दो या तीन दिन कोई विशेष विषय पर बच्चों को ट्यूशन दे रहे है। आज अध्यापकों से इतर ऐसे बहुत से लोग है जो स्कूल आदि में नहीं पढ़ाते, कुछ अन्य कार्य करते हैं वे भी अतिरिक्त समय में बच्चों को ट्यूशन देकर अच्छी-खासी आमदनी कर रहे है।
दरअसल पहले ट्यूशन शिक्षा के अंतर्गत एक विशेष सुविधा के रूप में होता था पर समय के साथ यह एक अनिवार्य व्यवस्था का रूप लेती जा रही है। आज हर तबके के लोग अपनी-अपनी हैसियत के मुताबिक अपने बच्चों को निजी ट्यूशन भेजने लगे है। आज देश में ट्यूशन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि ऐसा नहीं कि ट्यूशन का चलन हमारे यहां अकस्मात हुआ है। पहले भी देश में अध्यापकों द्वारा बच्चों को ट्यूशन देने का चलन था। लेकिन बीते कुछ सालों में बच्चों की बुनियाद मजबूत करने के लिए अभिभावकों द्वारा बच्चों को ट्यूशन पर तेजी से भेजा जाने लगा है।
हालांकि हमारे यहां आज ट्यूशन का चलन बढ़ रहा है। लेकिन फिर भी बच्चों के लिए किसी अच्छे ट्यूशन की तलाश करना और फिर बच्चों को उसके पास भेजना आज भी मुश्किल काम है। वैसे बच्चों को ट्यूशन पर भेजने की आदत उपयुक्त है या नहीं यह बहस का विषय है लेकिन फिर भी किसी मजबूरी के चलते अभिभावकों को अपने बच्चों को ट्यूशन पर भेजना पड़े तो उन्हें अनेक सावधानी रखना आवश्यक है ।
अभिभावकों को बच्चों को किसी भी ट्यूशन के पास भेजने से पहले ट्यूशन के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए। साथ ही बच्चे जब भी ट्यूशन पढ़कर आएं उनसे ट्यूशन के व्यवहार के बारे में जरूर जाने कि बच्चों को ट्यूटर कैसे पढ़ा रहा है, बच्चों को उसका पढ़ाया समझ आ रहा है या नहीं। अभिभावकों को समय-समय पर बच्चों के ट्यूटर से मिलते रहना चाहिए। इससे बच्चों के व्यवहार तथा उसकी अन्य गतिविधियों के बारे में अभिभावकों को पता चल सकेगा। अभिभावकों को बच्चे की ट्यूटर से संबंधित किसी भी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए तथा समस्या का तुरन्त समाधान करना चाहिए। वैसे अभिभावकों को अपने बच्चों को पूरी तरह से ट्यूटर के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए। खुद भी बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।