
pulse polio abhiyan
- पीयूष पांडे
यदि मशहूर फिल्म अभिनेता पोलियो की दवा पिलाने के अभियान में सरकार की ओर से विज्ञापन में काम करते हैं तो पोलियो दवा में किसी डॉक्टर या दवा कंपनी की गलती के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा?
केंद्रीय केबिनेट ने उपभोक्ता संरक्षण विधेयक-2017 को मंजूरी दे दी और जल्दी ही इसे संसद में पेश किए जाने की संभावना है। जानकारी मिल रही है कि इस विधेयक में उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण बनाने की बात है जो यह जांच करेगा कि उत्पादों के संदर्भ में विज्ञापनों में जो दावे किए जाते हैं वे सही हैं या नहीं। दावे गलत पाए जाने पर न केवल कंपनियों बल्कि इन विज्ञापनों में काम करने वाली प्रतिष्ठित हस्तियों (सेलिब्रिटीज) के विरुद्ध भी कार्रवाई की जा सकेगी। इसमें जुर्माने और सजा दोनों का प्रावधान किया गया है।
इस बात में कोई संदेह नहीं है कि उपभोक्ताओं के हितों को सुरक्षित किया जाना चाहिए। लेकिन,विज्ञापनों में किए गए झूठे दावों के कारण प्रतिष्ठित हस्तियों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान किसी भी दृष्टिकोण से ठीक नहीं लगता। संसद में इस मुद्दे पर बहस होनी चाहिए। मेरी जानकारी में ऐसी कई हस्तियां हैं जो कारों का विज्ञापन करती हैं लेकिन उन्हें कार इंजन के बारे में किस तरह पूरी जानकारी हो सकती है।
इसी तरह एक सवाल यह भी है कि यदि हम सरकारी अभियान के लिए विज्ञापन फिल्म बनाएं तब क्या होगा? उदाहरण के तौर पर यदि मशहूर फिल्म अभिनेता पोलियो की दवा पिलाने के अभियान में सरकार की ओर से विज्ञापन में काम करते हैं तो पोलियो दवा में किसी डॉक्टर या दवा कंपनी की गलती के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा? मेरी दृष्टि में ऐसा करना तो बिल्कुल ही गलत होगा और सरकार के काम में मशहूर हस्तियां क्यों साथ निभाने को आगे आएंगी।
एक बात और, राजनेता भी तो प्रतिष्ठित हस्ती बन जाते हैं, वे प्रचार भी तो करते ही हैं। क्या कोई यह भी बताएगा कि यदि राजनेता अपने प्रचार में जो दावे करते हैं, वे गलत हो जाते हैं तो क्या उन्हें भी कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए? मुझे लगता है कि इस विधेयक के बारे में जिस तरह की जानकारी आ रही है, यदि उसी स्वरूप में वह पास होता है तो कामकाज में काफी कठिनाई आएगी। इसके प्रावधानों पर पुनर्विचार तो होना ही चाहिए।
Published on:
23 Dec 2017 09:39 am
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