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पत्रिका ओपिनियन : भारत-ईएफटीए समझौता: व्यापार और निवेश के साथ रणनीतिक पहलू भी

भारत ने हाल ही यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (ईएफटीए) के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। ईएफटीए के सदस्य देशों में आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नार्वे और स्विट्जरलैंड शामिल हैं। यह संतुलित व्यापार समझौता है जो वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, नवाचार में दोतरफा व्यापार के साथ ही उभरते भारत की आकांक्षाओं तथा नई वैश्विक मूल्य शृंखलाओं को दर्शाता है। यह अपनी तरह का पहला व्यापार समझौता है जो भारत ने पश्चिमी देशों के किसी समूह के साथ किया है।

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पत्रिका ओपिनियन : भारत-ईएफटीए समझौता: व्यापार और निवेश के साथ रणनीतिक पहलू भी

पत्रिका ओपिनियन : भारत-ईएफटीए समझौता: व्यापार और निवेश के साथ रणनीतिक पहलू भी

यह समझौता यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और अमरीका सहित अन्य पश्चिमी देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने के लिए बातचीत आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। ये देश ईयू का हिस्सा नहीं हैं। ईएफटीए को एक अंतर-सरकारी संगठन के रूप में अमलीजामा पहनाया गया था जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना और निवेश संवर्धन था। भारत जनवरी 2008 से ही, आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (आर्थिक भागीदारी समझौते -टीईपीए) के रूप में एफ्टा के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है लेकिन पिछले वर्ष के दौरान इस समझौते में तेजी आई।
पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार ईयू, ब्रिटेन, अमरीका, कनाडा, कतर, यूएइ, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस आदि के साथ व्यापार वार्ताओं में शामिल होने के लिए लगातार काम कर रही है। भारत-ईएफटीए समझौता काफी लाभदायक साबित होगा। ईएफटीए देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा लगातार बना हुआ है, जो 2021-22 में 23.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था। हालांकि 2022-23 में यह घटकर 14.8 बिलियन डॉलर हो गया। अप्रेल-दिसंबर 2023 में यह फिर बढ़कर 15.6 बिलियन डॉलर हो गया। जनवरी-दिसंबर 2023 के दौरान स्विटजरलैंड के साथ 13.1 बिलियन डॉलर से अधिक का व्यापार घाटा हुआ। घाटे की सबसे बड़ी अकेली वजह स्वर्ण का आयात है। लगभग 13 बिलियन डॉलर का स्वर्ण आयात किए जाने का अनुमान है। इसका बड़ा हिस्सा आभूषण निर्माण में काम आता है। भारत जो ईएफटीए को बड़ी मात्रा में निर्यात करता है उसमें रसायन, मोती और अर्ध-कीमती पत्थर, शिप्स, और नावें, फार्मास्युटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आदि शामिल हैं।
हालांकि भारत के कुल निर्यात में ईएफटीए की हिस्सेदारी 0.4 फीसदी रही, जबकि आयात पिछले वर्ष के मुकाबले 5.5 से घटकर 2.4 फीसदी पर आ गया जिससे ज्यादा व्यापार घाटा हुआ। यह समझौता उच्च तकनीकयुक्त उपकरण और आईटी में अनुसंधान में भी सहयोग का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है। भारत तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना चाहता है और ईएफटीए चीन के विकल्प के रूप में अन्य विनिर्माण स्थल की तलाश में है। भारत की 'मेक इन इंडिया' नीति आपसी सहयोग और निवेश अवसरों के रूप में उभरी है। डिजिटल व्यापार, फार्मास्यूटिकल्स, जैव-प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, रसायन, उच्च तकनीक से खेती, आपूर्ति शृंखला, स्वच्छ ऊर्जा आदि विविध क्षेत्रों में देश नई इबारत लिख रहा है। यह समझौता न केवल व्यापार और निवेश में बल्कि रणनीतिक रूप से अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में भी अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
—राकेश मोहन जोशी
प्रोफेसर, भारतीय विदेश व्यापार संस्थान