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नई उम्मीद

भारत और पाकिस्तान दोनों देश अच्छे दोस्त बेशक नहीं बन पाएं लेकिन दुश्मन की तरह तो नहीं रहें। इमरान से उम्मीद है कि वे जमीनी हकीकत को समझेंगे।

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Sunil Sharma

Aug 20, 2018

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हर बार की तरह इस बार भी पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ संबंधों में सुधार की नई उम्मीद जगी है। क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। पिछले पांच दशक में यह पहला अवसर है, जब वहां की सत्ता पर पाकिस्तान मुस्लिम लीग अथवा पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का कब्जा नहीं हो पाया है। इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीके इंसाफ दोनों दलों को करारी शिकस्त देकर सत्ता पर काबिज हुई है। पाकिस्तान की सियासत ने करवट ली है, लिहाजा संबंधों में सुधार की आशा बंधी है। वर्ष 1947 में मिली आजादी के बाद से भारत और पाकिस्तान अच्छे पड़ोसियों की तरह कभी नहीं रह पाए। दोनों देशों के बीच सात दशक में चार युद्ध सारी कहानी बयां करने के लिए पर्याप्त हैं।

ऐसा नहीं है कि दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने के प्रयास कभी नहीं हुए। भारत में चुनी गई सभी सरकारों ने पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया लेकिन उसे पाकिस्तान से धोखे के अलावा कुछ नहीं मिला। गौरतलब है कि संबंधों में कटुता समाप्त करने के इरादे से ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी दिल्ली से बस लेकर लाहौर तक गए थे, लेकिन बात बनी नहीं। इमरान खान दुनिया के जाने-माने क्रिकेटर रहे हैं। उनके पाकिस्तान के साथ भारत में भी खूब प्रशंसक हैं। अनेक मौकों पर भारत भी आए। वे भारत के बारे में अच्छी तरह जानते हैं। वे यह भी जानते हैं कि दोनों देश साथ आजाद हुए लेकिन आज भारत के मुकाबले पाकिस्तान की हालत क्या है? कर्ज में डूबा पाकिस्तान सिसक रहा है। एक जमाने में उसका सबसे बड़ा मददगार रहा अमरीका भी उससे दूरी बना चुका है। अकेले चीन के भरोसे उसकी गाड़ी कब तक खिंचेगी?

पाकिस्तान के नए नेतृत्व को बदलते दौर के अनुरूप अपने आपको ढालने की तैयारी करनी होगी। उसे समझना होगा कि जब पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी एक हो सकते हैं, अमरीका-उत्तर कोरिया नजदीक आ सकते हैं, तो भारत-पाकिस्तान क्यों नहीं? कश्मीर का मुद्दा दोनों देशों के बीच विवाद का बड़ा कारण है। इस मुद्दे को एक तरफ रखकर आपसी व्यापार, खेल-कूद के क्षेत्र में निकटता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देकर तनाव को कम किया जा सकता है। पर्यटन के क्षेत्र में समझौते किए जा सकते हैं। इन मुद्दों पर बात आगे बढ़ेगी, तो कश्मीर विवाद का हल खोजने का रास्ता भी निकल सकता है। इसके लिए पहल अब पाकिस्तान को करनी चाहिए।

दोनों देश अच्छे दोस्त बेशक नहीं बन पाएं लेकिन दुश्मन की तरह तो नहीं रहें। इमरान से उम्मीद है कि वे जमीनी हकीकत को समझेंगे। इमरान को सबसे पहले आतंककारी संगठनों पर लगाम लगाने का साहस दिखाना होगा। पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान से लेकर नवाज शरीफ के शासन में हुई गलतियों से सबक भी लेना होगा। साथ ही पाकिस्तानी फौज से दूरी बनाकर रखनी होगी, तभी सात दशक पुरानी समस्या का समाधान निकल सकता है। ऐसा समाधान, जो दोनों देशों के करोड़ों लोगों के लिए किसी नई किरण से कम नहीं होगा।