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भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तल्खी बढ़ रही है। पाकिस्तान में इमरान खान के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद लगा था कि संबंधों में सुधार आएगा। इमरान खान की ओर से वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव आया और भारत ने एक जिम्मेदार पड़ोसी के नाते मुलाकात स्वीकार कर ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्रियों में भेंट भी तय हो गई लेकिन इसी बीच पाकिस्तान ने फिर अपना वहशी रंग दिखा दिया।
सीमा पार से न सिर्फ भारी गोलीबारी शुरू हो गई, बल्कि उनकी बॉर्डर एक्शन टीम ने हमारे एक जवान का अपहरण कर हत्या कर दी और शव क्षत-विक्षत कर दिया। भारत ने मुलाकात रद्द कर दी। करनी भी चाहिए। रविवार को भी पाक का एक हेलीकॉप्टर जम्मू-कश्मीर के पुंछ में भारतीय क्षेत्र में घुस आया। हालांकि जवानों ने उसे खदेड़ दिया। भारत जब २०१६ की सर्जिकल स्ट्राइक का पराक्रम पर्व मना रहा है, सीमा पार से ऐसी हरकतें संकेत देती हैं कि पाकिस्तान आसानी से मानने वाला नहीं।
संयुक्त राष्ट्र में सुषमा स्वराज बोलीं कि आतंकवाद का महिमामंडन करने वालों से बातचीत नहीं करेंगे। इधर भारत में रक्षा मंत्री और गृहमंत्री ने एक और सर्जिकल स्ट्राइक के संकेत दिए हैं। प्रधानमंत्री भी मन की बात में पाक को चेताते दिखे कि देश के सम्मान और अखंंडता की कीमत पर कोई समझौता नहीं करेंगे। पाकिस्तान के मंत्री शाह मोहम्मद कुरैशी संयुक्त राष्ट्र में बोलते हैं कि २०१४ से पेशावर में हुए स्कूल नरसंहार में भारत की भूमिका संदिग्ध थी।
अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेसिर-पैर के मुद्दे उछालने का क्या मतलब? पाकिस्तान किसी भी कीमत पर द्विपक्षीय मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाना चाहता है। इसीलिए जम्मू-कश्मीर में न सिर्फ आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में अकारण गोलीबारी कर रहा है। दूसरी ओर शांति वार्ता के प्रस्ताव भी भेज रहा है। २०१६ से जून २०१८ तक जम्मू-कश्मीर में दो सौ से ज्यादा सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए, तकरीबन ९० नागरिक मारे जा चुके हैं।
देश में इस वर्ष पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव व अगले वर्ष आम चुनाव होंगे। चुनावों के आस-पास पाकिस्तान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो जाती है। ‘सर्जिकल स्ट्राइक होगी, हो रही है या ऐसा कुछ हुआ तो है, अभी नहीं बताएंगे।’ जैसे बयान जनता के मन में संशय पैदा करते हैं कि कहीं वोटों की राजनीति में देश की सुरक्षा का इस्तेमाल तो नहीं हो रहा। पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा दे रहा है, यह जगजाहिर है। संयुक्त राष्ट्र की आतंकी देशों की सूची में भी वह है, फिर हम उससे बेहतर रिश्तों की सोच भी कैसे सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान व उसके समर्थक देशों को ‘बेनकाब’ करने के साथ ही सीमा पर उसकी हर कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए। आखिर ९/११ के जिम्मेदार ओसामा बिन लादेन को अमरीका पाकिस्तान में घुसकर मार सकता है तो फिर २६/११ के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और दाऊद इब्राहिम अभी तक नापाक भूमि पर मौजूद कैसे हैं? इस मुद्दे पर बयानबाजी नहीं, इच्छाशक्ति की जरूरत है।

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