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कब संभलेंगे ?

एकाध दल को छोड़ अधिकांश जगह एक व्यक्ति या एक परिवार की ही तूती बोलती है। वहां से निकला इशारा ही संगठन चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर लेता है।

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Sunil Sharma

Oct 06, 2017

rahul gandhi

rahul gandhi akhilesh yadav

एक के बाद एक चुनाव हारने के बावजूद देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस गुटबाजी के जंजाल से मुक्त होना नहीं चाहती। खबर है कि खींचतान के चलते राजस्थान में संगठन के चुनाव तय समय पर पूरे होने नहीं जा रहे। चुनावी कार्यक्रम के अनुसार पांच अक्टूबर तक प्रदेश स्तरीय चुनाव प्रक्रिया पूरी होनी थी लेकिन अब तक ब्लॉक अध्यक्ष के नामों की घोषणा भी नहीं की जा सकी। मतलब साफ है और समझ में आने लायक भी। पहले ब्लॉक फिर जिला और उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव होंगे।

ये हाल अकेले राजस्थान का नहीं है। अनेक राज्यों में विवादों के चलते संगठन चुनाव तय समय पर होने के आसार नजर नहीं आ रहे। वैसे तो संगठन चुनाव की प्रक्रिया कांग्रेस को ३० जून २०१७ तक पूरी करनी थी। लेकिन पार्टी के आग्रह पर चुनाव आयोग ने चुनाव कराने के लिए छह माह की मोहलत और दे दी। फिर भी विवाद है कि सुलझने का नाम ही नहीं ले रहा। देखा जाए तो हर राजनीतिक दल संगठन चुनाव का दिखावा तो करता है लेकिन वास्तव में चुनाव होते ही नहीं। चंद नेता बैठकर तय कर लेते हैं कि किसे ब्लॉक अध्यक्ष बनाना है और किसे जिला अध्यक्ष।

आलाकमान का आदेश कार्यकर्ताओं ने मान लिया तो ठीक वरना खींचतान शुरू हो जाती है। देश लोकतांत्रिक है सो राजनीतिक दलों से भी आंतरिक लोकतंत्र की उम्मीद की जाती है। लेकिन एकाध दल को छोडक़र अधिकांश जगह एक व्यक्ति या फिर एक परिवार की ही तूती बोलती है। वहां से निकला इशारा ही संगठन चुनाव की प्रक्रिया भी पूरी कर लेता है और टिकट वितरण की भी। आज कांग्रेस जिस दौर से गुजर रही है, उससे पार्टी को एकजुट रहने की जरूरत है। गुजरात, बिहार और हिमाचल प्रदेश में बगावत की गूंज सुनाई दे रही है।

गुजरात और हिमाचल में एक-दो महीने बाद विधानसभा चुनाव होने को हैं। इसके नतीजे आने वाले लोकसभा चुनाव की नींव रखने का काम करेंगे। राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की संभावनाएं भी व्यक्त की जा रही हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि पार्टी संगठन चुनाव की प्रक्रिया के दौर से गुजर कर आने वाले चुनाव के लिए कमर कसेगी। ताकि विपक्ष की चुनौतियों का मुकाबला मजबूती से कर सके।