
छत्तीसगढ़ में मिलावटखोरी रोकने वाले विभाग यानी कि खाद्य सुरक्षा विभाग में की गई पदोन्नति इन दिनों बहुत चर्चा में है। खाद्य सुरक्षा विभाग में कार्यरत 13 नमूना सहायकों (सैम्पल असिस्टेंट) को पदोन्नत करके फूड सेफ्टी ऑफिसर बना दिया गया, जबकि ये सभी उस पद के लिए अनिवार्य योग्यता ही नहीं रखते हैं।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी के लिए फूड टेक्नोलॉजी, फूड प्रोसेसिंग, फूड इंजीनियरिंग, डेयरी टेक्नोलॉजी, बायो टेक्नोलॉजी, ऑयल टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर साइंस, वेटनरी साइंस, बायो केमिस्ट्री, माइक्रो बायोलॉजी, केमिस्ट्री में मास्टर डिग्री या एमबीबीएस की डिग्री अनिवार्य है। अब विभागीय और अफसरी कारनामा देखिए पदोन्नति का नया नियम बनाकर 12वीं कक्षा उत्तीर्ण नमूना सहायकों को पदोन्नत कर दिया गया। यह अफसरी कारनामा इसलिए है, क्योंकि नमूना सहायक पद की अर्हता साइंस विषय में 12वीं उत्तीर्ण ही है, तो वे कर्मचारी उस पद के लिए योग्य थे, लेकिन अब जिस पद पर उन्हें पदोन्नत किया गया, उसकी बेसिक डिग्री तक उनके पास नहीं है। यानी मिलावटखोरी रोकने वाले विभाग में ही भ्रष्टाचार की मिलावट कर दी गई। एक तथ्य और यह है कि पदोन्नति आदेश उस प्रशासनिक अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी हुआ, जो हाल ही में सत्तारूढ़ दल के एक सांसद के साथ विवाद को लेकर भी एकाएक चर्चा में आ गए थे।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई द्वारा तय बेसिक डिग्री संबंधित पद के लिए होना अनिवार्य है। नियम भी स्पष्ट है कि यदि किसी कर्मचारी के पास अनिवार्य मूल योग्यता नहीं है तो उसे किसी भी परिस्थिति में पदोन्नति नहीं दी जा सकती। अब सवाल यह उठता है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर 12वीं कक्षा उत्तीर्ण नमूना सहायकों को क्यों पदोन्नत किया गया? क्या अब खाद्य सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी वाले कार्य के लिए मात्र 12वीं उत्तीर्ण लोगों की ही जरूरत है अथवा अब उस पद की मूल अर्हता कम कर दी गई है। सरकार इस 'मिलावट' को गंभीरता से ले और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई करे।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com
संबंधित विषय:
Updated on:
21 Aug 2026 12:05 am
Published on:
21 Aug 2026 12:05 am
