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संपादकीय: एनटीए में नई टीम ही नहीं, नई ऊर्जा की भी जरूरत

एनटीए में बदलाव की पहल तभी सार्थक होगी, जब यह केवल टीम बदलने तक सीमित न रहकर पूरी परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाए।देश के युवाओं को ऐसी व्यवस्था चाहिए, जहां उनकी मेहनत पर भरोसा हो और परीक्षा प्रणाली पर संदेह की कोई गुंजाइश न रहे।
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जयपुर

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ANUJ SHARMA

Aug 20, 2026

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राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव के प्रयास सिर्फ प्रशासनिक फेर-बदल नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे को बहाल करने की कोशिश है, जिस पर देश की करोड़ों युवा प्रतिभाओं का भविष्य टिका है। विभिन्न परीक्षाओं में प्रश्नपत्र तैयार करने वाली पुरानी टीम के करीब 600 प्रोफेसर, शिक्षक और विशेषज्ञों को बदलकर नई टीम बनाना एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन अब सवाल केवल टीम बदलने का नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था को जवाबदेह, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने का है।

एनटीए का गठन इस उद्देश्य से किया गया था देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन के लिए एक ऐसी आधुनिक संस्था विकसित हो, जो परीक्षा व्यवस्थाओं की कमियों को दूर कर सके। एनटीए से उम्मीद थी कि वह तकनीक, विशेषज्ञता और मजबूत प्रक्रियाओं के जरिये परीक्षाओं में मानवीय हस्तक्षेप और अनियमितताओं को न्यूनतम करेगी। लेकिन बीते कुछ समय में पेपर लीक, तकनीकी गड़बडिय़ों, प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और परीक्षा संचालन को लेकर उठे सवालों ने एनटीए की साख को चोट पहुंचाई है। हाल में यूजीसी नेट के तीन प्रश्नपत्रों में गड़बडिय़ों के बाद परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय इस चिंता को और गंभीर बनाता है। इस पर सवाल उठने का मतलब, हमारी पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होना है। सरकार ने एनटीए के आंतरिक ढांचे की समीक्षा के बाद बड़े बदलावों के संकेत दिए हैं। यह स्वागत योग्य है, लेकिन सुधार की प्रक्रिया केवल अधिकारियों और विशेषज्ञों की अदला-बदली तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सबसे पहले यह पता लगना चाहिए कि गड़बडिय़ां आखिर हुई क्यों? प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसकी समीक्षा, मॉडरेशन, प्रिंटिंग, डिजिटल सुरक्षा, परीक्षा केंद्र तक पहुंच और परीक्षा के बाद मूल्यांकन तक हर स्तर की स्वतंत्र जांच जरूरी है। जहां लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, वहां जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

परीक्षाओं की विश्वसनीयता का अर्थ केवल पेपर लीक रोकना नहीं है। इसका अर्थ है कि हर अभ्यर्थी को यह भरोसा हो कि उसे समान अवसर मिला है और प्रश्नपत्र निष्पक्ष, गुणवत्तापूर्ण तथा त्रुटिरहित है। एनटीए को अपनी कार्यप्रणाली में ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिसमें विशेषज्ञों का चयन पारदर्शी हो, प्रश्नपत्रों की कई स्तरों पर गोपनीय समीक्षा हो और तकनीकी सुरक्षा को लगातार परखा जाए। साथ ही, शिकायतों के निवारण के लिए भी स्पष्ट और समयबद्ध व्यवस्था होनी चाहिए। यह सुधार एनटीए के लिए अवसर भी है। संस्था की विश्वसनीयता केवल नई टीम बनाने से नहीं, बल्कि अपनी गलतियों से सीखने और जवाबदेही तय करने से लौटेगी। देश के युवाओं को ऐसी परीक्षा व्यवस्था चाहिए जिसमें मेहनत पर भरोसा हो, व्यवस्था पर संदेह नहीं। एनटीए को यही भरोसा फिर से अर्जित करना होगा।