
income tax
- डॉ. अश्विनी महाजन, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ और दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन
नोटबंदी के बाद देश में 57 लाख आयकर दाता बढ़े हैं। आयकर राजस्व में तो 25 फीसदी की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है। मेरा मानना है आर्थिक सर्वेक्षण में प्रत्यक्ष करों के साथ अप्रत्यक्ष करों का संकलन भी बढ़ा हुआ दिखाई देगा
इससे इनकार नहीं है कि 8 नवंबर 2016 से देश में लागू हुई नोटबंदी के फैसले ने आम जनता को कतारों में खड़े रहने को मज***** किया। उन्हें सीमित समय के लिए परेशानी भी हुई। यह सारी कवायद कालेधन, आतंकवाद और नकली नोटों पर लगाम कसने के उद्देश्य से की गई थी। अब रिजर्व बैंक के पास 500 और 1000 के 98.96 फीसदी नोट वापस आ गए हैं।
ऐसे में सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या बाजार में 1.04 फीसदी ही कालाधन था? क्या इसके लिए इतनी बड़ी कवायद की गई? आम आदमी को यूं ही परेशान किया गया? मेरा सवाल यह है कि जो लोग सरकार के नोटबंदी के फैसले को अब गलत बता रहे हैं, क्या वे ही पूर्व में कहा नहीं करते थे कि देश में बहुत बड़ी समानांतर अर्थव्यवस्था भी है। लेकिन, पहले बात करें रिजर्व बैंक के पास जमा नहीं हुए 1.04 फीसदी उन नोटों की जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यही कालाधन था। इतने नोट तो लंबे समय में खुद ब खुद चलन से बाहर हो जाते हैं क्योंकि ये नोट एक समय के बाद खराब या बर्बाद भी हो जाते हैं।
जहां तक कालेधन की बात है तो बता दूं कि नोटबंदी के बाद देश में 57 लाख आयकर दाताओं की संख्या बढ़ी है। यही नहीं आयकर राजस्व में तो करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है। जरा सोचें कि ये किस ओर संकेत कर रहे हैं। हकीकत में समानांतर अर्थव्यवस्था में लगे धन ने सही राह पकड़ी है और इससे देश नियमित अर्थव्यवस्था में आया है। कहा जा रहा है कि नोटबंदी के कारण ही इस बार सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर में भी गिरावट आई है। लेकिन, ऐसा गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के प्रभाव के कारण अधिक है। धीरे-धीरे इन कर सुधारों का तात्कालिक *****र कम होगा तो जीडीपी में भी सुधार होगा।
एक महत्वपूर्ण बात यह भी कि रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर यह कहते-कहते थक गए थे कि रिजर्व बैंक द्वारा उधारी दर घटाने के बावजूद वाणिज्यिक बैंक अपनी दरें नहीं घटाते हैं। लेकिन, नोटबंदी के बाद जनवरी 2017 से वाणिज्यिक बैंकों को पास नकदी की मात्रा बढ़ गई और उन्होंने स्वयं ही उधारी दरें कम करना शुरू कर दिया। इस स्थिति का लाभ दीर्घकाल में देश को मिलने ही वाला है।
मेरा मानना है कि जीडीपी दर में नोटबंदी के तत्काल बाद उछाल देखा गया था और उसे अल्पकालिक प्रभाव माना गया था तो वर्तमान गिरावट को भी अल्पकालिक ही मानना चाहिए। नोटबंदी का *****र दीर्घकालिक है। अगले आम बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण में प्रत्यक्ष करों के साथ अप्रत्यक्ष करों का संकलन भी बढ़ा हुआ दिखाई देगा क्योंकि समानांतर अर्थव्यवस्था में लगा धन नियमित अर्थव्यवस्था में दिखाई दे रहा है। यह धन देश की कल्याणकारी योजनाओं के आकार में बढ़ोतरी कराने वाला है।
Published on:
09 Sept 2017 04:15 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
