आपकी बात, चुनावों में पार्टी टिकट किस आधार पर दिए जाने चाहिए?

  • पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था, पाठकों ने अपनी—अपनी राय दी है। पेश हैं चुनिंदा राय।

By: shailendra tiwari

Published: 15 Oct 2020, 05:47 PM IST

ईमानदार व्यक्ति को मिले टिकट
भारत में चुनावों का आयोजन एक उत्सव की तरह होता है। चुनावो में टिकट बांटना और प्राप्त करना बहुत ही महत्त्वपूर्ण कार्य है। चुनावों में टिकट खरीदना ओर बेचना भी आज आम बात है। आजकल चुनावों के समय तो नेता जनता की बहुत सेवा करते हैं, पर चुनावों के बाद सब भूल जाते हंै ओर कुछ नेता तो अपने फायदे के लिए अपनी पार्टी तक को छोड़ देते हंै। इसलिए चुनावों में टिकट ऐसे लोगों को देना चाहिए, जो पार्टी और जनता दोनों के प्रति ईमानदार और वफादार हों। ऐसे व्यक्ति को टिकट मिलना चाहिए, जो सबसे अधिक लोकप्रिय और ईमानदार, पढ़ा-लिखा, साफ छवि वाला हो ।
-भारत नागर, बामला,बारां
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शिक्षित को मिले टिकट
चुनावों में टिकट ऐसे व्यक्ति को दिया जाना चाहिए, जो शिक्षित हो ताकि जनता की समस्याओं को भली-भांति समझकर संबंधित विभाग से उनका त्वरित समाधान करा सके। शिक्षित राजनेता ही सरकारी अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर सकता है, जिसका लाभ जनता को मिलता है। शिक्षित राजनेता ही विकासशील सोच वाले हो सकते हंै, जो सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में जनता को जागरूक कर उन्हें लाभान्वित करा सकते हंै। शिक्षित के साथ जाति -धर्म से ऊपर उठकर समाज सेवा करने वाले व्यक्ति को टिकट दिया जाना चाहिए।
-शिवराज मालव, तालेड़ा, बूंदी
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लोकप्रियता और योग्यता हो आधार
चुनावों में उम्मीदवार के चयन का आधार तो लोकप्रियता और योग्यता ही होना चाहिए। मुश्किल यह है कि अब तो सभी दलों में उम्मीदवार के चयन का आधार धनबल, बाहुबल और जातिबल हो गया है। इससे चुनावी माहौल भी बिगड़ता है, लेकिन मलाल तो इस बात का है कि ऐसे उम्मीदवार को न तो न्यायपालिका रोक पा रही है और न ही चुनाव आयोग। इस माहौल के कारण ही अच्छे लोग राजनीति में आने से बचते हैं। योग्य उम्मीदवारों से ही लोकसभा और विधानसभा सुशोभित हो, तभी इन सदनों की गरिमा बनी रहेंगी।
-डॉ. विकास पंडित, बड़वानी, मप्र
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न हो आपराधिक रेकॉर्ड
राजनीतिक दलों को किसी भी चुनाव के लिए टिकट देने से पहले बहुत सतर्क रहना चाहिए। चुनावों में उम्मीदवारों की योग्यता के आधार पर टिकट दिए जाने चाहिए। उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक रेकॉर्ड नहीं होना चाहिए। वह शिक्षित होना चाहिए। वह सेवा भावी और स्वच्छ छवि का तो हो ही, साथ ही उसके मन में देश के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना भी हो।
-डॉ.पवन बुनकर, अचरोल, जयपुर
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चरित्र का खास ध्यान रखें
भाई-भतीजावाद से ऊपर उठकर क्षेत्रीय स्तर पर भावी उम्मीदवार के कार्य, नेतृत्व क्षमता, कार्य निष्पादन क्षमता जैसी बातों को ध्यान में रखकर ही चुनाव के लिए टिकट देना उचित होगा। कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि नीति, नियम, व्यक्तित्व, चरित्र, योग्यता आदि को नजरअंदाज कर केवल व्यक्तिगत-पारिवारिक लाभ को सिंचित करने के लिए चुनावों में टिकट का वितरण किया जाता है। कहीं-कहीं पर बंदरबांट की तरह भी यह वितरण किया जाता रहा है। इस प्रकार की वितरण प्रणाली से क्षेत्र, राज्य, राष्ट्र एवं व्यक्ति विशेष का भला नहीं होना है। इसके नकारात्मक परिणाम हर स्तर पर देखने को मिल रहे हैं एवं मिलेंगे। यदि टिकटों का वितरण सही आधार पर किया गया, तो निश्चित ही हर स्तर पर विकास, संतोष एवं उत्साह की लहर दिखाई देगी।
-डॉ.अमित कुमार दवे, खडग़दा
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आपराधिक पृष्ठभूमि न हो
कम से कम जाति के आधार पर टिकट नहीं दिया जाना चाहिए। टिकट देते समय महिलाओं की भागीदारी का ध्यान रखा जाना चाहिए। टिकट देने को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उम्मीदवार को ये पता होना चाहिए कि वह चुनाव केवल समाज कल्याण के लिए लड़ रहा है, अपने कल्याण के लिए के लिए नहीं। चुनाव की दौड़ में शामिल उम्मीदवार स्वच्छ छवि का हो, उसका कोई आपराधिक इतिहास न रहा हो, पार्टी के प्रति निष्ठावान हो, ईमानदार छवि हो।
-अशोक कुमार शर्मा, झोटवाड़ा, जयपुर
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सबको साथ लेकर चलने की योग्यता जरूरी
आजकल चुनाव में टिकट जातीय समीकरण के आधार पर दिए जाते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। टिकट उस व्यक्ति को मिलना चाहिए, जो हर वर्ग को साथ लेकर चलता हो। अपने क्षेत्र में ईमानदारी से काम करता हो, लगातार जनता के सम्पर्क में रहा हो।
-अजय भारी, सरदारशहर, चूरू
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योग्य और ईमानदार को मिले टिकट
भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सबसे जरूरी है योग्य व ईमानदार उम्मीदवारों का चुनाव हो। इसके लिए जरूरी है की चुनाव मैदान में प्रत्याशी को टिकट देने से पहले उसकी शैक्षणिक योग्यता, उसका सामाजिक व्यवहार, कार्यशैली को देखा जाए तथा उसका पुलिस रेकॉर्ड भी देखा जाए कि उस पर किसी प्रकार का गम्भीर आपराधिक मामला तो दर्ज नही है। टिकट देते समय जाति, धर्म या धनबल को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
-राजकुमार बवेजा, हनुमानगढ़ टाउन
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राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता
चुनावों में टिकट ऐसे लोकप्रिय व्यक्ति को देना चाहिए, जो धर्म, जाति की राजनीति न करके सभी लोगों के हितों की बात करता हो, जो राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता हो, स्वतंत्र व निष्पक्ष निर्णय लेता हो, ईमानदार हो, शिक्षित व अनुभवी हो, जिसकी छवि श्रेष्ठ हो। जब ऐसे उम्मीदवार को टिकट मिलेगा तो देश में श्रेष्ठ लोकतंत्र का निर्माण होगा।
-गोविन्द सिंह राठौड, रानीखुर्द, पाली
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प्रलोभन में न आए जनता
योग्यता के आधार पर टिकट दिए जाने चाहिए। आपराधिक गतिविधियों मे लिप्त व्यक्ति को भी टिकट नहीं दिया जाए। स्थानीय स्तर पर जनता तय करे कि कौन सा उम्मीदवार उनकी कसौटी पर खरा उतर सकता है। जनता भी प्रलोभन में न आए।
-लता अग्रवाल, चित्तौडग़ढ़

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परीक्षा भी जरूरी
जनसेवक कहलाने वाले सत्ता में आते ही जनता पर राज करने लग जाते हैं। कभी-कभी सत्ता में ऐसे लोग आ जाते हैं, जिनको सामान्य जानकारी तक नहीं होती। इसलिए चुनावी टिकट देने से पहले इन सभी की परीक्षा भी होना जरूरी है, जिससे युवा और शिक्षित वर्ग को मौका मिलेगा।
-रेनु गोखरू, उदयपुर
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साफ छवि के व्यक्ति को मिले टिकट
पार्टी को टिकट उस व्यक्ति को देना चाहिए, जो लोगों से जमीनी स्तर से जुड़ा हुआ हो। साफ छवि, योग्य और शिक्षित व्यक्ति को टिकट मिले। पैसे के बल पर टिकट लेने वाले लोकतंत्र का सम्मान नहीं कर सकते।
-किरताराम, जालोर
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काबिल लोगों को ही आगे बढ़ाएं
आजकल राजनीति में आने के लिए लोग नए-नए उपाय ढूंढते रहते हैं। साम, दाम, दंड और भेद की नीति अपनाकर राजनीति में दाखिल होना चाहते हैं। यह गलत प्रवृत्ति है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। राजनीति में प्रवेश करने के लिए योग्यता निर्धारित होनी चाहिए और काबिल लोगों को ही आगे बढ़ाना चाहिए, तभी लोक कल्याण का कार्य संभव है। शिक्षित, अपराध से दूर, समाजसेवाी व्यक्ति को ही टिकट दिया जाना चाहिए।
-रितु शेखावत, जयपुर
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जमीन से जुड़े नेता जरूरी
स्वच्छ छवि वाले ,जनता से सीधे जमीनी स्तर पर जुड़े हुए पढ़े-लिखे व्यक्ति को ही चुनाव के लिए टिकट देना चाहिए। ऐसे प्रत्याशी जीतने के बाद जनता के लिए काम करते हैं। ऐसे लोग ही बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और गरीबी को खत्म कर सकते हैं।
-किशोर कुमार साहू, लवन, छत्तीसगढ़
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जनता की राय ली जाए
चुनावों में टिकट देने से पहले संबंधित व्यक्ति के सामाजिक कार्यों की सूची देखनी चाहिए तथा उस व्यक्ति के प्रति जनता की राय लेनी चाहिए। साथ में देखना चाहिए कि वह ईमानदार, कर्मठ, निष्पक्ष छवि तथा अच्छी सोच रखने वाला हो तथा विकासवादी विचारों को बढ़ावा देकर कमजोर लोगों की मदद करने वाला हो। युवाओं के साथ चले। पार्टी के कार्यकर्ताओं का सम्मान करे तथा सुख-दुख में जनता के साथ खड़ा रहे।
-घनश्याम पाराशर, करौली
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युवा को मिले प्राथमिकता
अब चुनावों में दबंग लोगों की बजाय पढ़े लिखों, बुद्धिजीवियों, युवा को टिकट मिलना चाहिए। चुनाव विकास के मुद्दों पर लड़ा जाए। यदि किसी नेता के ऊपर संगीन आरोप हों, तो उसका टिकट कटे। अब यदि हमें समाज को हिन्दू-मुस्लिम राजनीति में उलझे रहने से और अपराधों से बचाना है तो चुनाव प्रक्रिया में ये बदलाव लाने ही होंगे।
-मेघा गोयल, गोविंदगढ़, अलवर
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चरित्र को दें प्राथमिकता
जनप्रतिनिधियों का कार्य देश व समाज की सेवा करना है, तो टिकटों का विभाजन भी व्यक्ति का चरित्र, समाज के प्रति कार्य, त्याग, कार्यशैली की कुशलता के आधार पर ही किया जाना चाहिए, ताकि वह आगे जाकर एक सुंदर व स्वच्छ लोकतंत्र का निर्माण कर सके। धनबल व बाहुबल के द्वारा चुने हुए व्यक्ति लोकतंत्र की छवि को धूमिल करते हैं। इसलिए योग्यतम साक्षर व्यक्तियों को ही टिकट दिया जाना चाहिए
-आनंद सिंह बीठू, सींथल, बीकानेर

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