
shopping fraud
ऑनलाइन शॉपिंग ने उपभोक्ताओं की पसंद के उत्पाद चुनने व उन्हें खरीदने की प्रक्रिया को आसान बनाया है। ई-कॉमर्स कंपनियां व ऑनलाइन शॉपिंग के दूसरे मंच खरीदारों को आकर्षक छूट, आसान भुगतान और घर बैठे उत्पाद पहुंचाने की सुविधा जैसे वादों से लुभाते भी हैं। इन दिनों त्योहारों के मौसम में बाजारों में तो रौनक बढ़़ ही रही है तो ऑनलाइन शॉपिंग का दौर भी बढ़ रहा है। चिंताजनक तथ्य यह है कि इस सुविधा की आड़ में ठगी का कारोबार भी फल-फूल रहा है। कहीं पैकेट में सामान की जगह खाली डिब्बा मिल रहा है, तो कहीं ऑर्डर किए गए उत्पाद की जगह कुछ और भेजने के मामले आए दिन सामने आते हैं।समुचित निगरानी के अभाव में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर फर्जी कंपनियां आकर्षक विज्ञापनों और भारी छूट के जरिये ग्राहकों को लुभाने से नहीं चूक रहीं। लोग विक्रेता की विश्वसनीयता जांचे बिना ऑर्डर कर देते हैं। हालत यह है कि दो-तीन सौ रुपए के सामान में भी धोखाधड़ी होने लगी है। रकम छोटी होने के कारण लोग शिकायत नहीं करते, जिससे ठगों के हौसले बढ़ते हैं।
यह प्रवृत्ति न केवल ग्राहकों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि ई-कॉमर्स बाजार में भरोसे को भी कमजोर करती है। समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब शिकायत दर्ज कराना ही मुश्किल हो। कस्टमर केयर के नाम पर एआइ आधारित चैटबॉट और स्वचालित जवाब देने वाली व्यवस्थाएं आम हो रही हैं। तकनीक, कंपनियों का काम आसान कर सकती है, लेकिन ग्राहकों को समाधान के लिए अंतहीन विकल्पों में उलझना पड़ता है। इससे बचने के लिए कंपनियों को वास्तविक प्रतिनिधि से संपर्क, शिकायत की स्थिति जानने और समयबद्ध समाधान की सुविधा देनी चाहिए। ई-कॉमर्स कंपनियों को चाहिए कि वे विक्रेताओं का सत्यापन करें, संदिग्ध खातों पर निगरानी रखें और गलत या खाली पैकेट मिलने पर धन वापसी अथवा सामान बदलने की प्रक्रिया को सरल बनाएं। यह भी देखना होगा कि एआइ का इस्तेमाल शिकायतों का त्वरित समाधान करने के लिए हो, न कि ग्राहकों को मानवीय सहायता की पहुंच से दूर रखने के लिए। शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता व जवाबदेही अनिवार्य हो। उपभोक्ता संरक्षण प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करना होगा। जरूरी है कि फर्जी विक्रेताओं, भ्रामक विज्ञापनों और बार-बार नियम तोडऩे वाली कंपनियों पर कार्रवाई हो।ग्राहकों को चाहिए कि वे अनजान वेबसाइट से खरीदारी से पहले कंपनी का पता, संपर्क विवरण और वापसी नीति जांचें। रील देखकर या असाधारण छूट के लालच में भुगतान न करें। ठगी होने पर शिकायत जरूर करें, ताकि ऐसी गतिविधियों का रिकॉर्ड बने व दूसरे ग्राहक भी सतर्क हो सकें। ऑनलाइन कारोबार का विस्तार डिजिटल अर्थव्यवस्था की ताकत है, लेकिन तेज डिलीवरी और आकर्षक छूट से अधिक जरूरी ग्राहक का भरोसा है।
Updated on:
22 Oct 2026, 4:17 PM IST
Published on:
22 Oct 2026, 4:17 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.