सिर्फ दान के पैसे से किसी विश्वविद्यालय की स्थापना कर देना, वह भी 1916 में, ऐसा कोई दूूसरा उदाहरण दुनिया में नहीं मिलता है। उनके व्यक्तित्व शब्दों में समेटना एक चुनौती है। वे बड़े वकील, पत्रकार, शिक्षाविद्, समाज सुधारक, राष्ट्रवादी और स्वतंत्रता सेनानी थे। मालवीय जी चार बार कांग्रेस अध्यक्ष रहे। पहली बार 1909 में तथा अंतिम बार 1932 में।