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पर्यटन के साथ ही विरासत के संरक्षण पर ध्यान देना आवश्यक

विरासत पर्यटन एक शक्तिशाली आर्थिक विकास उपकरण है, जो रोजगार पैदा करता है। व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है। यह हमारे देश के प्राकृतिक और सांस्कृतिक खजाने की रक्षा करने, निवासियों और आगंतुकों के लिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है।

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Patrika Desk

Apr 18, 2022

पर्यटन के साथ ही विरासत के संरक्षण पर ध्यान देना आवश्यक

पर्यटन के साथ ही विरासत के संरक्षण पर ध्यान देना आवश्यक

अनुकृति शर्मा
पर्यटन विषय पर कई अंतरराष्ट्रीय पुस्तकों की संपादक


महात्मा गांधी के अनुसार 'एक राष्ट्र की संस्कृति उसके लोगों के दिलों और आत्मा में निवास करती है।' विरासत या धरोहर सभी के लिए भावनात्मक महत्त्व रखती है। देश में आकर्षक स्मारक और विरासत स्थल आगंतुकों के सामने अपनी खुशी, दु:ख, बहादुरी और बलिदान की कहानी को स्पष्ट करने के लिए आज मौन रूप से अलग खड़े हैं। स्थानीय समुदाय को विरासत और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए अंतिम राजदूत माना गया है। कोविड-19 का खतरा कम हो जाने के बाद पर्यटन उद्योग तेज गति से विकसित हो रहा है। लोग अलग-थलग, प्राचीन और पर्यावरण की दृष्टि से स्वच्छ स्थलों की यात्रा के लिए अधिक से अधिक निकल रहे हैं। पर्यटकों की भीड़ ऐसे अनोखे स्थलों का दौरा कर रही है। लेकिन, जैसे-जैसे यह प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, इससे न केवल पर्यावरण बल्कि स्थानीय संस्कृति, आदतों और मूल्यों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा पैदा होता है। जहां एक ओर, पर्यटन में स्थानीय आबादी की आय, अर्थव्यवस्था और जीवन स्तर को बढ़ाने की क्षमता है। वहीं दूसरी ओर, यह गंभीर पर्यावरणीय क्षति, वेश्यावृत्ति, नशीली दवाओं के दुरुपयोग या सामाजिक और सांस्कृतिक टूटन जैसे अवांछनीय परिणाम ला सकता है। मूल्यवान विरासत संसाधन अप्राकृतिक मौत मर रहे हैं, कुछ किले बर्बाद हो रहे हैं और कुछ दयनीय स्थिति में हैं। घाटियों के चारों ओर जीवाश्म पड़े हैं, पर्यटन स्थलों को कूड़े-कचरे का सामना करना पड़ रहा है, धार्मिक स्थल भीड़ से भरे हुए हैं। इस तरह विरासत स्थलों के क्षतिग्रस्त होने, नष्ट होने से कई समस्याएं पैदा हुई हैं। इन नुकसानों में ऐतिहासिक महत्व की इमारतों, पुरातात्विक स्थलों, स्मारकों और वस्तुओं की क्षति और लोगों का उनकी संस्कृति से अलगाव या राष्ट्रीय गौरव की हानि शामिल है।
पर्यटन प्रबंधन शिक्षा के माध्यम से भविष्य की पीढिय़ों के लिए अतीत को चित्रित करने के लिए एक तंत्र स्थापित करने, विरासत संसाधनों को संरक्षित करने, सांस्कृतिक पहचान को प्रतिबिंबित करने और प्राकृतिक संपत्ति की रक्षा करने की आवश्यकता है। व्यवसाय प्रबंधन, विपणन और उद्यमशीलता, जोखिम प्रबंधन जैसी अवधारणाएं अब भी कई प्रबंधकों के लिए अपेक्षाकृत नई हैं। डिजिटलीकरण भी प्रमुख संवद्र्धन में से एक है, जो वैश्विक मानचित्र पर भारत के लिए जगह बना सकता है।
विरासत पर्यटन एक शक्तिशाली आर्थिक विकास उपकरण है, जो रोजगार पैदा करता है। व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है। यह हमारे देश के प्राकृतिक और सांस्कृतिक खजाने की रक्षा करने, निवासियों और आगंतुकों के लिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है। भारत सरकार ने विरासत पर्यटन को आर्थिक विकास के प्रमुख इंजन के रूप में मान्यता दी है, जो देश में विरासत संरक्षण प्रयासों से दिखाई देता है। विभिन्न एजेंसियों और संगठनों के सहयोग से सरकार की ओर से मूल्यवान विरासत संपत्तियों की रक्षा के प्रयास ऐतिहासिक महत्त्व के कुछ स्थानों पर जरूर दिखाई दे रहे हैं। लेकिन, अब भी ऐसे कई स्थान हैं, जो उपेक्षित पड़ हुए हैं और उन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। स्थानीय समुदाय की जरूरतों, रुचियों और आकांक्षाओं पर ध्यान देना भी आवश्यक है। पर्यटन योजना, विकास और विरासत स्थल के संचालन से जुड़े मुद्दों पर स्थानीय समुदायों से परामर्श किया जाना चाहिए।