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सराहनीय कदम

सरकारी गाडिय़ों में जीपीएस लगाने से लेकर दूसरे तमाम ऐसे उपायों पर भी विचार हो जो मंत्रियों-अफसरों को और जवाबदेह बनाने में मददगार साबित हों।

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Sunil Sharma

Aug 06, 2018

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arvind kejriwal

कहते हैं कि चाह हो तो राहें अपने आप निकल ही आती हैं। ठीक वैसे ही जैसे दिल्ली सरकार ने अपने मंत्रियों और अफसरशाही पर नकेल कसने के लिए निकाली है। दिल्ली में सभी सरकारी गाडिय़ों में अब ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी जीपीएस लगाने के निर्देश दिए गए हैं। दिखने में तो यह फैसला बहुत छोटा लग सकता है लेकिन ठीक से अमल में लाया गया तो इसके दूरगामी असर देखने को मिलेंगे। इससे सरकारी गाडिय़ों के दुरुपयोग पर तो अंकुश लगेगा ही, मंत्रियों और अधिकारियों की आवाजाही पर नजर रखने में भी मदद मिलेगी।

वैसे चुनाव से पहले हर दल सत्ता में आने के बाद सरकारी धन के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने का वादा करता है। लेकिन हकीकत में क्या होता है, किसी से छिपा नहीं। सरकारी गाडिय़ां जितनी सरकारी काम में नहीं चलतीं, उससे अधिक अफसरों के परिजनों के काम आती हैं। अधिकारियों की पत्नियों को खरीददारी करनी हो, तो सरकारी गाड़ी दौड़ती है और बच्चे को स्कूल जाना हो, तो भी सरकारी गाड़ी ही काम आती है। सरकारी गाडिय़ों में जीपीएस लगने के बाद इन पर नजर रखना आसान होगा। दिल्ली सरकार के इस फैसले को केंद्र के साथ-साथ दूसरी राज्य सरकारें भी लागू करें तो इसके अच्छे नतीजे सामने आ सकते हैं।

अभी देखने में यही आता है कि हमारे यहां सभी सरकारें सरकारी धन के अपव्यय को रोकने के लिए सजग नहीं दिखती हैं। बात अकेले सरकारी गाडिय़ों की ही नहीं है। मंत्रियों, अधिकारियों के विदेश दौरे हों या फिर पांच सितारा होटलों में होने वाली बैठकों का दौर। या फिर कोई सेमिनार व हवाई यात्रा पर होने वाले अनावश्यक खर्च। इन सब पर साल-दर-साल अरबों-खरबों रुपए बर्बाद हो जाते हैं। चार्टर हवाई जहाजों में उडऩा आज के मंत्रियों का नया शगल बनता जा रहा है। सवाल उठता है कि भारत जैसे विकासशील देश में इतना पैसा फिजूल बहाना कहां की समझदारी है। मंत्री और अधिकारी जनता के सेवक कहलाते हैं। तो फिर उन्हें जनता के पैसे का ध्यान भी रखना चाहिए।

अरविंद केजरीवाल सरकार ने सरकारी वाहनों का बेजा इस्तेमाल करने वालों पर नकेल कस कर इस दिशा में जो सकारात्मक कदम उठाया है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। साथ ही राजनीतिक खींचतान को दरकिनार करते हुए दूसरी राज्य सरकारों को भी इसके अनुसरण पर विचार करना चाहिए। अच्छे फैसले का समर्थन करना तो लोकतंत्र को मजबूत बनाने में मददगार होगा। ऐसी छोटी-छोटी खामियां तो हमारे लोकतंत्र को दागदार बनाती हैं। सरकारी गाडिय़ों में जीपीएस लगाने से लेकर दूसरे तमाम ऐसे उपायों पर भी विचार किया जाना चाहिए, जो मंत्रियों-अफसरों को और जवाबदेह बनाने में मददगार साबित हों। बेहतर तो यह है कि केंद्र सरकार सभी राज्य सरकारों को विश्वास में लेकर अपनी तरफ से पहल करे। देश को आगे ले जाने में सभी दलों और राज्य सरकारों का सहयोग जरूरी है। जो काम अब तक नहीं हुआ, उसकी शुरुआत करने की पहल तो की ही जानी चाहिए।