
संदीप पुरोहित
राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों में पद रिक्त पड़े हैं। एक विभाग से दूसरे विभाग में प्रतिनियुक्ति का खेल भी इसलिए गति पकड़ता है। कर्मचारी अपनी जुगत बिठाकर मलाईदार विभागों में प्रतिनियुक्ति पर चले जाते हैं। प्रतिनियुक्ति पर जाना कोई अपराध नहीं है लेकिन उसके भी कुछ नियम कायदे होने चाहिए। कोई शिक्षक अध्ययन-अध्यापन की जगह शराब के वितरण के कारोबार में प्रतिनियुक्ति पर चला जाए तो यह उचित नहीं है। राजस्थान स्टेट ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड सरकारी उपक्रम है। उसे अपने यहां किसी को भी प्रतिनियुक्ति पर लेने से पहले सामाजिक मान्यताओं व मूल्यों का ध्यान रखना चाहिए।
राजस्थान स्टेट ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरएसबीसीएल) विशुद्ध रूप से राजस्थान सरकार का उपक्रम है। प्रदेश में इसके विशाल डिपो है जो लाइसेंसधारी ठेकेदारों का अंगे्रजी शराब सप्लाई का काम करते हैं। नियमानुसार आरएसबीसीएल के डिपो मैनेजर सहायक आबकारी अधिकारी को लगाना चाहिए लेकिेन यहां तो पूरे कुएं में भांग घुली है। शिक्षक पढ़ाने की बजाए यहां पर प्रतिनियुक्ति पर लगे हुए हैं। प्रदेश में 40 डिपो पर सरकार के अन्य विभागों से आए कार्मिक शराब कारोबार संभाल रहे हैं। आखिर यहां ऐसा क्या है कि शिक्षा विभाग, पंचायती राज, रोडवेज, आरटीडीसी, तिलम संघ, स्पिनफैड, को-ऑपरेटिव सोसायटी के कर्मचारी आरएसबीसीएल में काम करने को लालायित रहते हैं। सर्वविदित है कि सरकार के कमोबेश सभी विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं, फिर क्यों स्कूलों व कॉलेजों में अच्छाइयों का पाठ पढ़ाने वाले गुरुजी शराब की पेटियां गिनकर गाडिय़ों में चढ़वा रहे है?
रोडवेज बसों में टिकट काटने वाले कंडक्टर दारू गोदाम में रसीदें काट रहे हैं। कोष व लेखा विभाग में काम करने वाले, रेवेन्यू बोर्ड के कार्मिक तक शराब की पेटियों के इर्द-गिर्द घूमते हुए वेतन के साथ मलाई का आनंद ले रहे हैं। माना कि आबकारी महकमा सरकार के राजस्व का सबसे बड़ा स्त्रोत है। पर एक स्वच्छ समाज में शिक्षक दारू का कारोबार करे यह तो उचित नहीं है।
आरएसबीसीएल की व्यवस्था स्थाई है तो फिर यहां क्यों नहीं स्थाई नियुक्तियां की जा रही है? क्यों दूसरे विभागों के कार्मिकों के भरोसे आरएसबीसीएल के गोदाम संचालित है। प्रतिनियुक्ति पर आया कार्मिक कितना भी घोटाला करे उसकी जिम्मेदारी तय नहीं होती। ज्यादा से ज्यादा उसे पुन: उसके मूल विभाग में भेज दिया जाता है। अनुभवनहीन कार्मिकों के हाथों इतनी बड़ी व्यवस्था संभालना समझ से परे है। इस पूरी व्यवस्था पर सिरे से नजर डाले तो गबन-घोटाले से इनकार नहीं किया जा सकता। सरकार को चाहिए कि हर विभाग की तरह इस महकमें को भी तरजीह देते हुए व्यवस्था में सुधार करे। नए कार्मिक भर्ती और अन्य विभागों के कार्मिकों के मुंह से टपकती लार के मर्म को समझें। सरकार को प्रतिनियुक्ति के स्थान पर स्थाई कर्मियों की नियुक्ति पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि वर्तमान व्यवस्था में मद्य निषेध तो किसी भी राज्य सरकार के बूते के बाहर है, क्योंकि यह आय का सबसे बड़ा स्त्रोत जो बन गया है।
Published on:
31 Mar 2022 09:00 am
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