13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

देश को समर्पित सरोवर

आजादी के बाद देश के तमाम हिस्सों में बने बांधों के कारण ही भारत, पानी और बिजली के मामले में अपने पैरों पर खड़ा होने की हालत में पहुंच पाया है।

2 min read
Google source verification

image

Sunil Sharma

Sep 18, 2017

bargi dam narmada

bargi dam narmada

छप्पन साल के लम्बे इंतजार के बाद ही सही लेकिन देश को अखिरकार सरदार सरोवर बांध मिल ही गया। पैंसठ हजार करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुए इस बांध से गुजरात के साथ-साथ मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र को भी फायदा मिलेगा। पीने और सिंचाई के पानी के साथ ही बिजली उत्पादन भी होगा। बांध के निर्माण के दौरान अनेक अड़चनें भी आईं। आर्थिक दिक्कतों के अलावा सरकारों को कानूनी दांवपेंच का सामना भी इस बांध के मुद्दे पर करना पड़ा। समाजसेवी मेधा पाटकर समेत कुछ संगठन अब भी इस परियोजना के विरोध में जल में बैठकर सत्याग्रह कर रहे हैं।

यह बात सही है कि हर बड़ी परियोजना के साथ इस तरह की परेशानियां आती रही हैं और आगे भी आती रहेंगी। देश के सबसे ऊंचे बांधों में से एक सरदार सरोवर बांध के साथ इतिहास की तमाम यादें जुड़ी हैं। आजादी के बाद देश के तमाम हिस्सों में बने बांधों के कारण ही भारत, पानी और बिजली के मामले में अपने पैरों पर खड़ा होने की हालत में पहुंच पाया है। विश्वकर्मा जयंती के मौके पर बांध को देश की जनता को समर्पित किया जाना एक अच्छा काम माना जा सकता है। बांध को समर्पित करने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इससे जुड़े अनेक तथ्यों का हवाला दिया। इस मौके को उन्होंने राजनीतिक छींटाकशी से दूर रखने की बात कही। लेकिन समारोह के आखिर में वे राजनीति को बीच में ले ही आए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि कुछ मु_ीभर लोगों ने ही देश की आजादी के लिए बलिदान दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अड़चनें डालने वालों का कच्चा चि_ा उनके पास है। समारोह में मौजूद लोगों के साथ-साथ घरों में टेलीविजन कार्यक्रम को देख रहे तमाम लोग समझ गए कि प्रधानमंत्री किन ‘मु_ीभर’ लोगों की बात कर रहे हैं। समारोह चूंकि राजनीतिक नहीं था, सो प्रधानमंत्री को इशारों की राजनीति से भी बचना चाहिए था। सब जानते हैं कि देश की आजादी के लिए किसने, क्या किया? यह बात न बताने की है और न जताने की। देश को इस ऊंचाई तक पहुंचाने में हर सरकार का योगदान रहा है और उसे कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। इतनी बड़ी परियोजना जब देश को समर्पित हो रही हो तो बात देश की हो तो अच्छा रहे। राजनीति के लिए देश में दूसरे मुद्दों की कमी नहीं है।