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Swami Narayan Jayanti 2023: स्वामीनारायण जयंती पर जानिए प्रमुख शिक्षाएं

चैत्र शुक्ल नवमी यानी रामनवमी (Ram Navami) के दिन ही एक और विभूति ने अरसा पहले जन्म लिया था। इस विभूति ने वैष्णव धर्म के स्वामीनारायण संप्रदाय की स्थापना की, संप्रदाय के लोग इन्हें भगवान का अवतार मानते हैं। इनका कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से गुजरात रहा है आइये जानते हैं भगवान स्वामीनारायण की जीवनी और प्रमुख शिक्षाएं..

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Pravin Pandey

Mar 30, 2023

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स्वामीनारायण की जीवनीः भगवान स्वामीनारायण का बचपन का नाम घनश्याम पांडे था, इनका जन्म रामनवमी तीन अप्रैल 1781 ईं. में यूपी के गोंडा में छिपिया नाम के गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम धर्म देव और माता का नाम भक्तिदेवी था। कहा जाता है कि बालक के हाथ में पद्म, पैर में वज्र, उर्ध्व रेखा और कमल के निशान देखकर ज्योतिषियों ने इस बालक के लाखों लोगों को दिशा देने की भविष्यवाणी की थी।


मान्यता के अनुसार पांच वर्ष की उम्र में बालक को अक्षर ज्ञान मिला, इन्होंने आठ वर्ष की उम्र में ही शास्त्रों का अध्ययन कर लिया, 11 वर्ष की उम्र में माता-पिता के देहावसान के बाद इन्होंने घर छोड़ दिया और सात वर्ष तक पूरे देश की यात्रा की। इससे लोग इन्हें नीलकंठवर्णी कहने लगे, बाद में गोपालयोगी से आष्टांग योग सीखा और भ्रमण करते हुए मांगरोल के पास स्वामी रामानंद के शिष्य मुक्तानंद से मिले।

स्वामी रामानंद ने उन्हें मुक्तानंद के साथ ही रहने के लिए कहा। इस बीच उन्होंने देखा कि मुक्तानंद कथा करते तो वहां आए लोगों का ध्यान कहीं और रहता। इस पर उन्होंने पुरुषों महिलाओं के लिए अलग कथा की व्यवस्था की। कुछ समय बाद रामानंदजी ने उनका नाम सहजानंद रख दिया और एक साल बाद जेतपुर में आचार्य का पद दे दिया।

स्वामी रामानंद के देहावसान के बाद स्वामी नारायण संप्रदाय की स्थापना की, ये घूम-घूमकर लोगों को स्वामीनारायण मंत्र जपने के लिए प्रेरितकरते और लोगों को अपने साथ जोड़ते। इससे उनकी ख्याति फैल गई। वे शिष्यों को पंच व्रत मांस मदिरा चोरी व्यभिचार का त्याग और स्वधर्म पालन की सीख देते।

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सहजानंद ने यज्ञ में हिंसा, बलि प्रथा, सती प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और भूत बाधा जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान चलाया लोगों को जागरूक किया। वे प्राकृतिक आपदा आने पर बिना भेदभाव लोगों की सहायता करते, इससे लोग उन्हें अवतारी मानने लगे। इन्होंने अनेक मंदिरों का निर्माण कराया। 1 जून 1830 को उन्होंने भौतिक देह त्याग दिया। लेकिन आज भी उनके अनुयायी मंदिरों को सेवा और ज्ञान का केंद्र बनाकर काम कर रहे हैं।

स्वामी नारायण संप्रदाय की शिक्षाएं
1. अहिंसा और शाकाहारः भगवान स्वामी नारायण ने ब्रह्मचर्य पर जोर दिया और शुद्धतम रूप में भगवान के प्रति परमभक्ति के रूप में अहिंसा और शाकाहार की शिष्यों को सीख दी।
2. सती प्रथा और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ भी लोगों को जागरूक किया।
3. भगवान एक हैं, वे नारायण हैं, वे हमारे स्वामी हैं। स्वामीनारायण मंत्र समस्त मंत्रों का आधार है।


4. पांच व्रत का पालनः मदिरा, मांस, चोरी, व्यभिचार का त्याग और स्वधर्म पालन की सीख
5. निर्धन सेवः भगवान स्वामी नारायण ने निर्धन सेवा पर जोर दिया और कई सामाजिक कार्यों की शुरुआत की। वे प्राकृतिक आपदा आने पर बिना भेदभाव सेवा करते थे।