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Gulab Kothari Articles : स्पंदन : भोगवादी दृष्टि जीवन को निरन्तर अशांत व काल्पनिक बनाए रखती है। व्यक्ति भोगवृत्तियों में लिप्त होता चला जाता है। उसके मन में कभी संतोष का भाव आता ही नहीं। मन चंचल है। वह एक कामना पूर्ति के साथ ही पुन: नई कामना की ओर दौडऩे लगता है। जबकि जिसकी दृष्टि योग की ओर लगी रहती है वह जीवन में हर क्षण संतोष का अनुभव करता हुआ आनन्द को प्राप्त होता है। स्वार्थ को छोडक़र वह परमार्थ का मार्ग अपनाता है।
Updated on:
11 Sep 2026, 3:21 PM IST
Published on:
11 Sep 2026, 3:21 PM IST
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