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सिविल सेवा के लिए बने ‘नीतिपथ’ योजना

नरेंद्र मोदी सरकार ने दिसंबर 2020 में सिविल सेवा अधिकारियों में क्षमता निर्माण के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम ‘मिशन कर्मयोगी’ शुरू किया था। यह प्रयास बहु-आयामी है, जिसमें भर्ती, प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्रबंधन, पुरस्कार आदि बहुत कुछ शामिल है। पर सरकार अपने ही एक उपाय से बहुत कुछ हासिल सकती है जो उसने सैन्य भर्ती में किया है।

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जयपुर

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Patrika Desk

Sep 06, 2022

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सार्वजनिक सेवा उपलब्ध कराने का यह मिला-जुला मॉडल सफल तो रहा है पर इस पर लागत बहुत ज्यादा आई। सामान्यतया सिविल सेवा अधिकारियों को अपनी उपादेयता दिखाने और क्षमताओं के प्रदर्शन के लिए किसी दबाव का सामना नहीं करना पड़ता है। उन्हें जो लाभ मिलते हैं, उनमें भी बदलाव नहीं होता। कई मामलों में तो सिविल सेवा, खास तौर पर निचले स्तर पर, में सुधार की उम्मीद ही छोड़ दी गई है। प्रेरणा, प्रशिक्षण और प्रदर्शन प्रबंधन की कमी के कारण, सिविल सेवा अपने ‘स्टील फ्रेम’ को बनाए रखने के लिए चुनिंदा लोगों पर ही निर्भर होकर रह गई है। कोई शक नहीं, कई नौकरशाह व्यक्तिगत स्तर पर कड़ी मेहनत करते हैं, कठिन चुनौतियों का सामना करते हैं और यह सुनिश्चित करने में जुटे रहते हैं कि राज्य अपने प्रदर्शन का स्तर बनाए रखे।
नरेंद्र मोदी सरकार ने दिसंबर 2020 में सिविल सेवा अधिकारियों में क्षमता निर्माण के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम ‘मिशन कर्मयोगी’ शुरू किया था। यह प्रयास बहु-आयामी है, जिसमें भर्ती, प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्रबंधन, पुरस्कार आदि बहुत कुछ शामिल है। पर सरकार अपने ही एक उपाय से बहुत कुछ हासिल सकती है जो उसने सैन्य भर्ती में किया है। अग्निपथ योजना के कई पहलू सिविल सेवा भर्तियों के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर सकते हैं।