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आपकी बात, मणिपुर में जातीय हिंसा का शांतिपूर्ण हल निकालने में देरी क्यों हो रही है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Patrika Desk

May 29, 2023

आपकी बात, मणिपुर में जातीय हिंसा का शांतिपूर्ण हल निकालने में देरी क्यों हो रही है?

आपकी बात, मणिपुर में जातीय हिंसा का शांतिपूर्ण हल निकालने में देरी क्यों हो रही है?

इच्छाशक्ति की कमी
मणिपुर में जातीय हिंसा के हल में देरी के लिए सरकार की इच्छाशक्ति और अनदेखी जिम्मेदार है। राज्य सरकार और केन्द्र सरकार को मिलकर कोई रास्ता निकालना चाहिए।
-गौरव शर्मा, कुम्हेर, भरतपुर
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जमीन है कारण
संपत्ति के अधिकारों में संस्थागत कमियां और 'मणिपुर की विविधताÓ दो ऐसे कारक हैं, जिन्होंने मणिपुर समस्या को उलझाकर रख दिया है। मणिपुर में संघर्ष का मुख्य कारण भूमि है। यहां सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्थाएं भूमि और इससे संबंधित मुद्दों पर ही केंद्रित हैं।
-सुनील चारण, पोकरण, जैसलमेर
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संयम रखने में नाकाम
मणिपुर में इतनी आगजनी और हिंसा का कारण कहीं न कहीं संयम न रख पाना है। लोग अगर थोड़ा संयम रखें, तो सब ठीक हो जाएगा।
- प्रियव्रत चारण, जोधपुर
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आरक्षण है हिंसा की जड़
आरक्षण का मुद्दा सामाजिक विकास की जगह सामाजिक तनाव और सामाजिक हिंसा का स्रोत बनता जा रहा है। आर्थिक आधार पर आरक्षण योजना लागू करनी चाहिए। जातिगत धार्मिक आरक्षण नीति देश के विकास में बाधक है।
-मुकेश भटनागर, वैशालीनगर, भिलाई
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शांति को दें प्राथमिकता
मणिपुर की जाति और अनुसूचित जनजाति में वहां की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से सामंजस्य स्थापित किया जाए। मणिपुर में म्यांमार से आने वाली शरणार्थियों पर रोक लगनी चाहिए। दीर्घकालिक आर्थिक व शिक्षा की योजनाओं को धरातल पर अति शीघ्र फलीभूत करना चाहिए। खुफिया तंत्र से वहां की स्थिति का बारीकी से विश्लेषण करके उसके आधार पर ठोस योजना बनाई जानी चाहिए। देश में चल रही तात्कालिक घटनाओं में मणिपुर में शांति को सर्वोत्तम प्राथमिकता देनी होगी।प्
-माधव सिंह, श्रीमाधोपुर, सीकर
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सफल नहीं हो रहे शांति के प्रयास
कुकी जाति के विधायकों ने अलग राज्य बनाने की मांग कर, शांति बहाली की कोशिशों को धक्का लगाया है। इन विधायकों के साथ सत्तारूढ़ दल के कुछ विधायक भी मौजूदा सरकार की आलोचना कर रहे हैं। शुरू से नाराज चल रहे जनजाति के समुदाय और उग्र होते जा रहे हैं। इस वजह से मणिपुर में शांति प्रयासों मे सफलता नही मिल रही है।
-नरेश कानूनगो, देवास, मध्यप्रदेश
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जरूरी है सामूहिक प्रयास
मणिपुर में कुछ जातीय हिंसा की आड़ में अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैं। इसी कारण शांति के बाद फिर से हिंसा की आंच सुलग गई हैं। सामूहिक प्रयास से ही इस मुद्दे को हल किया जा सकता है।
-शुभम वैष्णव, सवाई माधोपुर