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Paris Olympic 2024 में ये 6 मुक्केबाज पेश करेंगे भारतीय चुनौती, निकहत और लवलीना से गोल्डन पंच की आस

Paris Olympic 2024 में 27 जुलाई से 10 अगस्त तक मुक्केबाजी के मुकाबले होंगे। इस बार ओलंपि‍क में चार महिला और दो पुरुषों समेत छह मुक्केबाज भारतीय चुनौती पेश करेंगे। इनमें निकहत जरीन और लवलीना बोरगोहेन से गोल्‍ड मेडल की उम्‍मीद है।

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Indian Boxers in Paris Olympic 2024

Indian Boxers in Paris Olympic 2024:पेरिस ओलंपिक खेलों में अब पांच दिन शेष रह गए हैं एक और जहां भारत की महिला मुक्केबाजों से गोल्डन पंच की उम्मीद लगाई जा रही है, वहीं पुरुष मुक्केबाजों पर बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव होगा। भारत का छह सदस्यीय मुक्केबाजी दल पेरिस ओलंपिक में हिस्सा लेने जा रहा है, जिसमें चार महिला और दो पुरुष शामिल हैं। महिला वर्ग में टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना पेरिस में अपने पदक का रंग बदलने की उम्मीद लेकर उतरेंगी, वहीं दो बार की विश्व चैंपियन निकहत भी स्वर्ण पदक की दावेदार दिख रही हैं। पेरिस ओलंपिक में हिस्सा लेने जा रहे मुक्केबाजों पर एक नजर...

निकहत जरीन (50 किग्रा)

दो बार की विश्व चैंपियन निकहत को तैयारियों के लिए अच्छा समय मिला है। निकहत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है और उनके पास ओलंपिक पदक जीतकर खुद को ओलंपिक जैसे मंच पर साबित करने का अच्छा मौका रहेगा।

लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा)

टोक्यो ओलंपिक में 69 किग्रा में पदक दिलाने वाली लवलीना पेरिस में 75 किग्रा में उतरेंगी। इसी भारवर्ग में उन्होंने विश्व चैंपियनशिप और एशियाड पदक जीते हैं। लवलीना का प्लस पाइंट उनका कद है, जिससे वे आसानी से प्रतिद्वंद्वी के मुक्कों का तोड़ ढूंढ पाती हैं। लवलीना के पास दूसरा ओलंपिक पदक जीतने का यह अच्छा मौका है।

जैस्मीन लंबोरिया (57 किग्रा)

22 साल की जैस्मीन के परदादा एक हैवीवेट मुक्केबाज थे, जबकि उनके दादा कैप्टन चंदर भान लंबोरिया पहलवान थे। जैस्मीन को उनके चाचा संदीप सिंह और परविंदर सिंह ने मुक्केबाजी की ट्रेनिंग दी है। ये दोनों ही नेशनल चैंपियन रहे हैं। बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों की कांस्य पदक विजेता जैस्मीन के करियर का यह सबसे बड़ा मौका है, जिसे वह किसी भी हाल में गंवाना नहीं चाहती हैं।

यह भी पढ़ें : ओलंपिक उद्घाटन और समापन समारोह में निभाई जाती हैं ये खास रस्में, आप भी जानिये

प्रीति पंवार (54 किग्रा)

21 साल की प्रीति ने एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता है और वे ओलंपिक में भी इस प्रदर्शन को दोहराना चाहेंगी। हालांकि बीते सप्ताह बीमारी के कारण उन्हें तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था। जर्मनी के सारब्रुकेन में प्रीति भारतीय दल के साथ तैयारी कर रही थीं, जहां उन्हें बीमारी के कारण अस्पताल जाना पड़ा। वे फिर से टीम के शिविर में लौट आई हैं।

अमित पंघाल (51 किग्रा)

पुरुष वर्ग में अमित पंघाल के पास एशियाड, विश्व चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों के पदक हैं। ऐसे में उन्हें अपने खाते में बस एक ओलंपिक पदक और जोड़ना है। टोक्यो में चूकने के बाद अमित इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उनके पास विजेंदर सिंह के बाद भारत के लिए पुरुष वर्ग में दूसरा ओलंपिक पदक जीतने का यह अच्छा मौका है।

निशांत देव (71 किग्रा)

निशांत का यह पहला ओलंपिक होगा। वे अनुकूल ड्रॉ मिलने पर चौंका सकते हैं। यह 23 वर्षीय मुक्केबाज 2021 में पहली बार विश्व चैंपियनशिप के क्वार्टरफाइनल में पहुंचकर सुर्खियों में आया था। दो साल बाद देव ने विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। निशांत का मानना है कि क्यूबा, अमरीका, रूस और कजाकिस्तान जैसे मजबूत देशों के मुक्केबाजों का सामना करने से उनका डर खत्म हो गया जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिली।