Formula 1: लुईस हैमिल्टन ने की माइकल शूमाकर की बराबरी, Eifel Grand Prix के साथ 91 जीत पूरी

  • मर्सडीज टीम के लुईस हैमिल्टन ( Lewis Hamilton ) ने रविवार को आइफिल ग्रांड प्रिक्स जीती।
  • फॉर्मूला वन के ऑल टाइम चैंपियन माइकल शूमाकर ( michael schumacher ) की 91 जीत के रिकॉर्ड की बराबरी।
  • कई उतार-चढ़ाव के बाद हैमिल्टन रविवार को पोडियम फिनिश में रहे कामयाब।

बर्लिन। लुईस हैमिल्टन ( Lewis Hamilton ) ने रविवार को आइफिल ग्रां प्री में जीत के साथ फॉर्मूला वन में 91 जीत के माइकल शूमाकर ( michael schumacher ) के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। इसके साथ ही उन्होंने फॉर्मूला वन में अपने सातवें चैंपियनशिप खिताब की ओर एक और कदम बढ़ाया।

अपनी जिंदगी को लेकर फार्मूला 1 चैंपियन Lewis Hamilton का बड़ा खुलासा

हैमिल्टन ने अपनी मर्सडीज टीम के साथी वैल्टेरी बोटास के पीछे शुरुआत की, लेकिन जब 13वें लैप में फिन ने थोड़ी जगह छोड़ी तो उन्होंने बढ़त ले ली। हालांकि पांच लैप के बाद कार की समस्या से जूझ रहे बोटास रेस से हट गए थे। जबकि हैमिल्टन ने रेड बुल के मैक्स वेरस्टैपेन को उस वक्त आसानी से पीछे कर दिया, जब एक सेफ्टी कार ने दौड़ में देर से हिस्सेदार की।

हैमिल्टन ने वेरस्टैपेन से लगभग पांच सेकंड के अंतर से जीत हासिल की, जिसमें रेनॉल्ट के लिए 2011 से पहली बार डैनियल रिकियार्डो ने टॉप तीन में जगह बनाई। इस दौरान एक और रिकॉर्ड टूट गया क्योंकि किमी राइकोनेन ने अपनी 323वीं दौड़ शुरू की, और 1993 से 2011 तक रूबेंस बैरिकेलो को पीछे छोड़ दिया।

जॉर्ज रसेल से टकराने और विलियम्स ड्राइवर को एक स्पिन में भेजने के लिए जुर्माना लगवाने के बाद राइकोनेन 12वें स्थान पर रहे। वहीं, रसेल जल्द ही एक पंचर के साथ रेस से बाहर हो गए। गौरतलब है कि जर्मनी के नरबर्गरिंग में 2013 के बाद से यह पहली फॉर्मूला 1 रेस थी और नजदीकी पर्वत श्रृंखला के चलते इसे आइफिल ग्रांड प्रिक्स नाम दिया गया था।

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गौरतलब है कि फार्मूला वन ड्राइवर लुईस हैमिल्टन ने बीते माह अपने जीवन को लेकर बड़ा खुलासा करते हुए यह स्वीकारा कि उन्होंने बहुत कठिन दिन देखें हैं और फार्मूला वन रेस के दौरे के दौरान वह बहुत अकेलेपन का सामना करते थे। छह बार के फार्मूला वन विश्व चैंपियन ने सितंबर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक भावनात्मक संदेश में लिखा कि वह महामारी के दौरान संघर्ष कर रहे हैं और इस दौरान फार्मूला वन को फिर से शुरू करने के लिए रेस में अपनाए बबल सिस्टम के साथ पार पाना मुश्किल है।

उन्होंने लिखा था, "कई बार आप अकेले हो जाते हैं। आपको अपने मित्रों और परिवार की याद आती है। लगातार एक के बाद एक कई सप्ताह की रेस का मतलब है आपके पास काम के अलावा बाकी किसी चीज के लिए ज्यादा समय नहीं है। इसलिए, मैं अपने सबसे करीबी लोगों का आभारी हूं जो मुझे एक संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहे हैं, भले ही यह केवल टेक्स्ट (मैसेज), फोन या फेसटाइम के जरिये ही हो।"

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अमित कुमार बाजपेयी
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