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CWG 2026: कंडक्टर की नौकरी गई, ट्रेनिंग का खर्च उठाने के लिए बेचा घर, शर्मिला ने गोल्ड जीत रचा इतिहास

शर्मिला की इस जीत के पीछे संघर्ष और हिम्मत की एक लंबी कहानी छिपी है। उनका जीवन आसान नहीं रहा। महज 2 साल की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया, जिससे उनका एक पैर प्रभावित हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। पिता छोटे किसान थे और मां दृष्टिबाधित थीं, इसलिए उनका सही इलाज नहीं हो सका। हालात ऐसे बने कि कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी गई।
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भारत

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Siddharth Rai

Jul 31, 2026

Sharmila dhankhar

कॉमनवेल्थ गेम्स में शॉटपुट में गोल्ड मेडल जीतने पर शर्मिला धनखड़ (photo - IANS)

Sharmila Dhankhar, Commonwealth Games 2026: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के शॉट पुट एफ57 इवेंट में भारत की शर्मिला धनखड़ ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने 9.81 मीटर का सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया।

भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली पैरा-एथलीट

शर्मिला कॉमनवेल्थ पैरा-एथलेटिक्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली पैरा-एथलीट बन गईं। उनकी इस ऐतिहासिक जीत ने न सिर्फ भारत का 20 साल का इंतजार खत्म किया, बल्कि हमवतन शिल्पा शायला के साथ मिलकर एक लैंडमार्क डबल पोडियम फिनिश भी हासिल किया। शिल्पा ने कांस्य पदक जीता।

शर्मिला की इस जीत के पीछे संघर्ष और हिम्मत की एक लंबी कहानी छिपी है। उनका जीवन आसान नहीं रहा। महज 2 साल की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया, जिससे उनका एक पैर प्रभावित हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। पिता छोटे किसान थे और मां दृष्टिबाधित थीं, इसलिए उनका सही इलाज नहीं हो सका। हालात ऐसे बने कि कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी गई।

शादी के बाद पति ने छोड़ा

मात्र 26 साल की उम्र में शर्मिला को उनके पति ने छोड़ दिया। यह उनके लिए बेहद मुश्किल समय था, क्योंकि उनके दो बेटियां भी हैं। हालांकि दो साल बाद उनकी जिंदगी में फिर से खुशियां लौटीं। 28 साल की उम्र में उन्होंने दूसरी शादी की और अजीत उनके जीवन में आए। अजीत ने उन्हें पैरा-एथलेटिक्स में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया और हर कदम पर उनका साथ दिया।

2018 में उन्हें हरियाणा रोडवेज में कंडक्टर की नौकरी मिली थी, लेकिन हड़ताल खत्म होते ही नौकरी भी चली गई। यह उनके लिए बड़ा झटका था। आर्थिक तंगी इतनी गंभीर थी कि 2023 में ट्रेनिंग का खर्च उठाने के लिए उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ा और किराए के मकान में रहना पड़ा।

आज उनकी दोनों बेटियां भी उनकी राह पर चल रही हैं। 17 साल की बड़ी बेटी अनुज जेवलिन थ्रो में और 13 साल की छोटी बेटी लक्ष्मी लॉन्ग जंप में स्टेट लेवल की खिलाड़ी हैं। ऐतिहासिक जीत के बाद शर्मिला ने कहा, "मैं यह पदक अपनी मां को समर्पित करूंगी। मेरी मां अंधी हैं, और हर तरफ से बुराई के बावजूद, वह बचपन से ही मेरा साथ दे रही हैं। मैं बहुत खुश हूं कि मैंने अपनी मां का सपना पूरा किया।" यह जीत न सिर्फ 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स कैंपेन के लिए बल्कि पूरे भारतीय पैरा-एथलेटिक्स के लिए भी एक बड़ी कामयाबी है। शर्मिला ने कहा कि यह पदक देश का है और उम्मीद है कि यह आने वाले सालों में कई और लोगों को पोडियम फिनिश के लिए प्रेरित करेगा।

उन्होंने कहा, "हम बहुत खुश हैं। हम अपने देश के लिए मेडल जीतते रहेंगे। हम कड़ी मेहनत करते रहेंगे। हम अगले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए अच्छी तैयारी करेंगे। यह हमारे पैराथलेटिक्स का पहला स्वर्ण पदक है।" ग्लासगो में इतिहास रचने के बावजूद, नई कॉमनवेल्थ चैंपियन को इस कामयाबी की अहमियत अभी पूरी तरह समझ नहीं आई थी।

शर्मिला ने कहा, "मैं यह पदक जीतकर बहुत खुश हूं। लेकिन मुझे नहीं पता। मुझे 2-3 दिन बाद पता चलेगा कि मैंने पदक जीत लिया है। यह एक सपने जैसा लगता है।" अपना पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीतने के बाद, शर्मिला ने अपना ध्यान आने वाली चुनौतियों पर लगा दिया है। उन्होंने कहा कि हम अगले ओलंपिक गेम्स में खेलेंगे। यह मेरा पहला पदक है और मैं भविष्य में और पदक जीतना चाहती हूं।

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