31 जुलाई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

CWG 2026: एक भी एथलीट नहीं पार कर पाया क्वालीफिकेशन मार्क, फिर कैसे 3 भारतीयों को मिला फाइनल का टिकट

Javelin Throw Final Qualification Rule: ग्लासगो में जेवलिन थ्रो क्वालिफिकेशन मार्क न छू पाने के बावजूद विशेष नियम के तहत नीरज, रोहित यादव और यशवीर सिंह सहित टॉप-12 एथलीट्स ने फाइनल में जगह बना ली है। जानें जेवलिन थ्रो का यह खास क्वालिफिकेशन नियम।
2 min read
Google source verification
Neeraj Chopra CWG, commonwealth games 2026 india schedule

नीरज चोपड़ा (Photo - IANS)

CWG 2026, Javelin Throw Final: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मेंस जेवलिन थ्रो के क्वालीफिकेशन राउंड में दुनिया के 18 एथलीट्स ने हिस्सा लिया, जिनमें से 6 का पर्सनल बेस्ट थ्रो 90 मीटर के ज्यादा का था। हालांकि ग्लासगो में कोई भी एथलीट 84 मीटर के आंकड़े को नहीं छू पाया, जिससे उन्हें सीधे फाइनल में जगह मिलनी थी। इसमें ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा और अरसद नदीम जैसे एथलीट भी शामिल थे। इसके बावजूद कोई भी 84 मीटर के मार्क को छू भी नहीं सका लेकिन 12 एथलीट्स को फाइनल का टिकट मिल गया।

बिना क्वालीफिकेशन फाइनल में पहुंचे 12 एथलीट

इन 12 एथलीट्स में 3 भारतीय जेवलिन थ्रोअर भी शामिल हैं, जिन्हें फाइनल का टिकट मिल गया है। टोक्यो ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा के साथ रोहित यादव और यशवीर सिंह को फाइनल में भी थ्रो करने का मौका मिलेगा, जो 31 जुलाई को मेडल इवेंट होगा। अब ऐसे में सवाल ये है कि जब कोई भी एथलीट क्वालीफिकेशन मार्क छू भी नहीं पाया तो फिर 12 एथलीट्स फाइनल में कैसे पहुंचे। चलिए जेवलिन थ्रो के क्वलीफिकेशन नियम को समझते हैं।

क्वालिफिकेशन राउंड के दौरान नीरज 79.61 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ पांचवें स्थान पर रहे, जबकि रोहित यादव 78.37 मीटर के साथ नौवां और यशवीर सिंह 78.36 मीटर के साथ 10वां स्थान हासिल किया। इन तीनों एथलीट्स का बेस्ट थ्रो क्वालीफिकेशन मार्क से काफी दूर था। लेकिन जेवलिन थ्रो के क्वालीफिकेशन नियम से सिर्फ तीनों भारतीय ही नहीं बल्कि अन्य 9 थ्रोअर्स को भी फाइनल में जगह मिल गई।

क्या है नियम?

किसी भी जेवलिन थ्रो के इवेंट में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को पहले राउंड में 2 ग्रुप्स में बांटा जाता है अगर उनकी संख्या 20 से अधिक हो तो। अगर एथलीट्स 20 से कम हैं, तो एक ही ग्रुप में प्रतिस्पर्धा करते हैं। क्वालीफिकेशन राउंड में एक दूर तय की जाती है, जिसे पार करने वाले एथलीट्स को फाइनल में प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलता है। अगर भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों ने क्वालीफिकेशन मार्क पार किया तो सभी को फाइनल में जगह मिल जाएगी।

हालांकि जेवलिन थ्रो के इतिहास में आज तक किसी भी टूर्नामेंट में ऐसा हुआ नहीं है। अगर 12 से कम एथलीट क्वालीफिकेशन मार्क पार करते हैं तो फिर दोनों या एक ग्रुप के बेस्ट थ्रोअर को फाइनल में जगह मिलेगी। अगर कोई भी एथलीट क्वालीफिकेशन मार्क नहीं पार कर पाता है तो पहले राउंड में भाग ले रहे बेस्ट 12 थ्रोअर को फाइनल में जगह मिल जाएगी। यही वजह है कि ग्लासगो में किसी भी एथलीट के क्वालीफिकेशन मार्क न छू पाने के बावजूद 12 एथलीट्स फाइनल में पहुंचे हैं।

कौन रहा सबसे आगे

श्रीलंका के रुमेश पथिराज ने 82.84 मीटर के शानदार थ्रो के साथ क्वालिफिकेशन राउंड में पहला स्थान हासिल किया। दो बार के वर्ल्ड चैंपियन एंडरसन पीटर्स 81.29 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहे, साउथ अफ्रीका के डौव स्मिट 80.64 मीटर के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इंग्लैंड के बेन ईस्ट (80.38 मीटर) ने नीरज से आगे रहते हुए चौथा स्थान हासिल किया, जबकि ऑस्ट्रेलिया के कैमरन मैकिन्टायर (78.91 मीटर), पाकिस्तान के अरशद नदीम (78.63 मीटर), बहामास के कीशॉन स्ट्रैचन (78.60 मीटर), त्रिनिदाद और टोबैगो के केशॉर्न वॉलकॉट (78.26 मीटर) और नाइजीरिया के चिनेचेरेम न्नामदी (75.27 मीटर) भी आगे बढ़े।