
कश्मीरी इन्फ्लुएंसर जिरिश (इमेज सोर्स: इन्फ्लुएंसर जिरिश स्क्रीनशॉट)
Zirish Kashmiri Accent Trolling: कश्मीरी इन्फ्लुएंसर जिरिश इन दिनों अपने एक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। वजह उनका कश्मीरी एक्सेंट है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उनके बोलने के अंदाज का मजाक उड़ाया। इसके बाद जिरिश ने ट्रोलर्स को साफ शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनके उच्चारण में गलती है, तो उन्हें सुधारने में कोई परेशानी नहीं है। लेकिन किसी के एक्सेंट का मजाक उड़ाना बिल्कुल अलग बात है। इसे वह अब नजरअंदाज नहीं करेंगी।
बता दें जिरिश विदेश में रहने वाली कश्मीरी पंडित हैं। वह सोशल मीडिया पर कश्मीर और अपनी संस्कृति से जुड़ी बातें भी शेयर करती हैं। उनके इंस्टाग्राम बायो में भी कश्मीर से जुड़ाव साफ नजर आता है। हाल ही में उन्होंने एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें उन्होंने अपने कश्मीरी एक्सेंट को लेकर ट्रोल करने वालों को जवाब दिया। वीडियो में लिखा था कि उनका कश्मीरी एक्सेंट किसी का मजाक उड़ाने का इन्विटेशन नहीं है। जिरिश ने कहा कि उन्होंने कई लोगों को उनके एक्सेंट पर हंसते और कमेंट करते देखा। इसलिए उन्हें इस मुद्दे पर खुलकर बोलना पड़ा।
जिरिश ने कहा कि अगर उनका कश्मीरी उच्चारण गलत है, तो लोग उन्हें जरूर सुधार सकते हैं। वह इसे सीखने के मौके की तरह लेंगी। उन्हें सही उच्चारण सीखने में कोई परेशानी नहीं है। लेकिन उन्होंने सुधार और मजाक के बीच अंतर भी समझाया। उनके मुताबिक, किसी की गलती बताना अलग बात है। वहीं, उसके बोलने के तरीके का मजाक उड़ाना अपमान है।
उन्होंने साफ कहा कि अगर कोई सम्मान के साथ उनके उच्चारण को सुधारना चाहता है, तो उसका स्वागत है। लेकिन अगर कोई सिर्फ उन्हें नीचा दिखाने के लिए कमेंट करता है, तो वह इसे स्वीकार नहीं करेंगी।
जिरिश ने अपने वीडियो में यह भी कहा कि उन्हें अपना कश्मीरी एक्सेंट बदलने की जरूरत नहीं है। उनके लिए यह उनकी पहचान और अपनी भाषा से जुड़ाव का हिस्सा है।
उन्होंने ट्रोल्स को दो टूक जवाब देते हुए कहा कि अगर कोई सम्मान से बात करना चाहता है, तो वह उसका स्वागत करेंगी। लेकिन सिर्फ एक्सेंट को निशाना बनाकर ट्रोल करने वालों के लिए उनके कमेंट सेक्शन में कोई जगह नहीं है।
अपने पोस्ट के कैप्शन में जिरिश ने एक अहम बात कही। उन्होंने लिखा कि कई लोग अपनी भाषा बोलना इसलिए छोड़ देते हैं, क्योंकि दूसरे उनके एक्सेंट का मजाक उड़ाते हैं। जिरिश का कहना है कि कई लोग अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़े रहने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें शर्मिंदा करने के बजाय सम्मान देना चाहिए। अगर किसी को उनका बोलने का तरीका पसंद नहीं है, तो वह आसानी से आगे बढ़ सकता है।
Updated on:
24 Aug 2026 02:52 pm
Published on:
24 Aug 2026 02:52 pm
