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अल्पसंख्यकों का आरोप: पाकिस्तान में झूठे ईश निंदा के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसा कर ली जा रही उनकी जान, हेग में प्रदर्शन, दायर हुई याचिका

पाकिस्तानी समाज जहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की प्रासंगिकता को समझने में विफल है और सरकार इस संबंध में आगे आने की इच्छुक भी नहीं है। इस संबंध में पाकिस्तानी ईसाई समुदाय भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विदेश में पाकिस्तानी ईसाई समुदाय इस मुद्दे से निपटने में खुद को असहाय मान रहा है।
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Ashutosh Pathak

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Updated: 23 Dec 2021, 10:23 PM IST

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पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। पाकिस्तानी समाज जहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की प्रासंगिकता को समझने में विफल है और सरकार इस संबंध में आगे आने की इच्छुक भी नहीं है। इस संबंध में पाकिस्तानी ईसाई समुदाय भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विदेश में पाकिस्तानी ईसाई समुदाय इस मुद्दे से निपटने में खुद को असहाय मान रहा है। यही नहीं, उनकी गतिविधियां विदेशों में विरोध प्रदर्शन करने तक सीमित हैं और स्थानीय सरकार का ध्यान उनके निवास स्थान पर और पाकिस्तानी सरकार को मामले को गंभीरता से देखने के लिए आकर्षित करती हैं।

हाल ही में पाकिस्तानी मूल के डच ईसाई के एक समूह ने पाकिस्तानी मिशन के सामने हेग में विरोध प्रदर्शन किया और पाकिस्तान में ईसाई समुदाय के साथ दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने उनकी सुरक्षा के लिए त्वरित समाधान की मांग की। वे अल्पसंख्यकों के मामलों में न्याय की मांग करने वाले नारों के साथ बैनर और पोस्टर लिए थे।

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प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में श्रीलंकाई नागरिक की लिंचिंग, अपहरण, बलात्कार, जबरन धर्म परिवर्तन और पाकिस्तान में ईसाई नाबालिग लड़कियों की शादी, झूठे ईशनिंदा के मामलों को गढ़ने की घटनाओं की निंदा की और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कानून की मांग की।

याचिकाकर्ताओं ने ईसाई, हिंदू और अन्य समुदायों की लड़कियों के जबरन धर्मातरण और विवाह को रोकने के लिए एक त्वरित संघीय कानून की आवश्यकता की मांग की। प्रदर्शनकारियों द्वारा तैयार की गई रिपोर्टों के अनुसार जबरन धर्म परिवर्तन के असूचित मामलों का प्रतिशत बहुत अधिक है। इनमें से कई नाबालिग लड़कियों को अपने तथाकथित अपहरणकर्ताओं से शादी करते देखा जा सकता है, जो ज्यादातर मामलों में उनसे कई साल बड़े होते हैं।

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इसके अलावा, लड़कियों और उनके परिवारों को उनकी गरीबी, चरमपंथी धार्मिक और राजनीतिक नेताओं के प्रभाव, जांचकर्ताओं और न्यायपालिका द्वारा भ्रष्टाचार और दुर्व्यवहार के कारण न्याय नहीं मिल पाता है।

उन्होंने यह भी मांग की कि राष्ट्रीय ध्वज पर सफेद रंग से प्रतिनिधित्व करने वाले दस मिलियन से अधिक गैर-मुस्लिम आबादी वाले पाकिस्तानियों को बचाना और सुरक्षित करना और पाकिस्तान के विकास में सक्रिय भूमिका निभाना समय की मांग है।

याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि पाकिस्तानी संसद और सरकार को मानवता के खिलाफ इस जघन्य अपराध को रोकने के लिए कठोर दंड और जुर्माने के साथ संघीय अधिकार क्षेत्र का कानून बनाने और लागू करने के लिए तेजी से कार्य करना चाहिए।