पीओके में उठी आजादी की आवाज, इमरान खान सरकार के माथे पर पड़े बल

पीओके में उठी आजादी की आवाज, इमरान खान सरकार के माथे पर पड़े बल

Mohit Saxena | Publish: Aug, 08 2019 01:00:43 PM (IST) | Updated: Aug, 08 2019 02:23:53 PM (IST) पाकिस्तान

  • पाक सरकार के खिलाफ लिखा खुला पत्र, कहा-गिलगित-बाल्टिस्तान का इलाका जम्मू-कश्मीर का ही अंग
  • यहां लोगों ने जमीन संपत्ति और संसाधनों के मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से ही पाकिस्तान को अब पीओके चिंता सताने लगी है। यहां के लोग लगातार इमरान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार को गिलगित-बाल्टिस्तान में लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। गिलगित-बाल्टिस्तान में लोगों ने जमीन संपत्ति और संसाधनों के मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। यह जमीनें पहले गिलगित हवाई अड्डे के निर्माण और विकास के नाम पर पाकिस्तान सरकार द्वारा अधिग्रहण की गई थी।

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पाकिस्तान की हैसियत सिर्फ देखभाल की

यहां के लोगों ने पाकिस्तान को खुला पत्र लिखकर कहा है कि पाकिस्तान की हैसियत उसकी देखभाल करने से ज्यादा नहीं है। उनकी रिहायशी वाला यह हिस्सा जम्मू-कश्मीर का भाग है। उसे सीमाएं बदलने का कोई हक नहीं। यह खुला पत्र जम्मू-कश्मीर की आजादी की मांग करने वाले संगठनों को संबोधित है। यहां के लोगों का कहना है कि यूएन के तहत 28 अप्रैल,1949 को हुए कराची समझौते के अनुसार गिलगित-बाल्टिस्तान का इलाका जम्मू-कश्मीर का ही अंग है।

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जम्मू-कश्मीर को तीन हिस्सों में बांटा गया

पत्र के अनुसार 1947 में जब जम्मू-कश्मीर को तीन हिस्सों में बांटा गया, तब छिड़े युद्ध के संघर्षविराम के बाद तीसरे व उत्तरी इलाके गिलगित लद्दाख को दो हिस्से में बांट दिया गया। 28,000 वर्ग मील का यह इलाका श्रीनगर और मुजफ्फराबाद से अलग था। इसी में से 2,000 वर्ग मील का इलाका पाकिस्तान ने 1963 में चीन को दे दिया था। पत्र में जम्मू-कश्मीर की पहचान को बनाए रखने के लिए संघर्षरत सभी संगठनों और दलों से ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर आगे बढ़ने की अपील की गई है।

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