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यहां 972 साल पहले चंदनपुरी महाराज के तप से प्रसन्न हुई थी माता

-पाली शहर के जूना मठ में विराजमान है हिंगलाज माता

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पाली

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Suresh Hemnani

Sep 26, 2022

यहां 972 साल पहले चंदनपुरी महाराज के तप से प्रसन्न हुई थी माता

यहां 972 साल पहले चंदनपुरी महाराज के तप से प्रसन्न हुई थी माता

Navratri 2022 Pali City Rajasthan : पाली। पाली शहर का पानी दरवाजा, जहां स्थित है जूना मठ [ Juna Math Pali ]। इसमें विराजमान है हिंगलाज माता [ Hinglaj Mata ]। इस मठ में माता शक्ति के रूप में विराजमान है। माता की प्रतिमा सामान्य प्रतिमाओं से भिन्न है। उस पर त्रिशुल के समान आकृति बनी है। उसके नीचे माता के नेत्र व मुख है।

मठ के महंत भोलापुरी ने बताया कि मठ में विक्रम संवत् 1107 में महंत चंदनपुरी महाराज की तपस्या से प्रसन्न होकर माता यहां विराजमान हुई थी। उसके बाद से लेकर आज तक मठ में माता का पूजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नवरात्र में घरों में माता की शक्ति के रूप में त्रिशुल जैसा चिन्ह लगाकर ही आराधक आराधना करते हैं। मठ में माता उसी शक्ति रूप में विराजमान है।

गुफा का द्वार है मठ में
इस मंदिर में एक गुफा का द्वार है। जो पहले खुला हुआ था, लेकिन अब इसे बंद कर दिया गया है। बताया जाता है कि इस गुफा का एक मुख पुनागर माता व दूसरा गाजण माता मंदिर में खुलता है। इस गुफा से होकर चंदनपुरी महाराज इन दोनों मंदिरों में दर्शन करने जाते थे।

मठ में ही बनी है समाधि
मठ परिसर में ही चंदनपुरी महाराज की समाधि बनी है। उसके पास ही उनकी बहन माता अन्नपूर्णा की समाधि भी है। मठ में चंदनपुरी महाराज की छड़ी सहित अन्य सामग्री आज भी रखी हुई है। जिनके समक्ष माता के दर्शन के बाद श्रद्धाल् शीश नवाते हैं।

तालाब की करवाई थी खुदाई
पाली के लाखोटिया तालाब की खुदाई चंदनपुरी महाराज ने करवाई थी। कहा जाता है कि खुदाई के बाद मजदूर जितनी मिट्टी तालाब से लाते थे। वह उनकी मजदूरी के रूप में सोने में बदल जाती थी। इसके अलावा चंदनपुरी महाराज ने 17 अन्य तालाबों के साथ बावडि़यों का भी निर्माण कराया था।