8 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

market: प्रदेश के इस बाजार में किया जा रहा ऐसा…

शहर में पेट्रोल पम्प से लेकर फुटकर सामान बेचने वाले तक नहीं देते हैं बिल, मेडिकल की दुकानों पर भी पर्ची पर जोड़ दिया जाता है हिसाब।

3 min read
Google source verification

पाली

image

Rajeev Dave

Mar 16, 2024

market: इस तरह से बाजार में की जाती है कर की चोरी...

सूरजपोल

किसी भी सामान की खरीद व बिक्री करने पर बिल लेना व बिल देना ग्राहक व दुकानदार का कर्तव्य है, लेकिन उसका पालन पूरे जिले में कुछ प्रतिष्ठानों व दुकानों के अलावा कहीं नहीं हो रहा है। यदि कोई ग्राहक बिल मांग लेता है तो दुकानदार उसे जीएसटी राशि अतिरिक्त जुड़ने का कहते हैं। ग्राहक सोचता है क्याें दस-बीस रुपए अधिक दें। अपना तत्कालीक फायदा हो रहा है और वह बिल नहीं लेता है। जिससे दुकानदार की जीएसटी बच जाती है और सरकार को भी राजस्व का नुकसान होता है। ग्राहक को यह नुकसान है कि यदि सामान खराब निकला तो वह दुकानदार पर कोई आक्षेप नहीं लगा सकता। अदालत का दरवाजा भी नहीं खटखटा सकता।

पैसे दिए और हो गए रवाना

सूरजपोल िस्थत एक पेट्रोल पम्प पर सुबह 11:07 बजे पेट्रोल भरवाने के लिए वाहनों की कतार लगी थी। पम्प पर पेट्रोल भरने के बाद नकद या ऑनलाइन राशि तो ली गई, लेकिन अधिकांश ग्राहकों ने बिल नहीं मांगा और पेट्रोल पम्प कार्मिकों ने दिया भी नहीं। किसी ने बिल मांगा तो उसे पीछे जाकर लेने टेबल पर बैठे कार्मिकों से लेने का कह दिया।

पर्ची देखकर दवा दी, बिल नहीं

बांगड़ चिकित्सालय के सामने मेडिकल की दुकान पर दो महिलाएं व एक पुरुष दवा लेने पहुंचे। उन्होंने पर्ची दी, दुकानदार ने दवा निकाली। कैलकुलेटर पर राशि जोड़कर बताई। उन्होंने रुपए दिए, दवा ली और वहां से रवाना हो गए। ऐसा अन्य मेडिकल की दुकान पर हुआ। दुकानदार ने बिल बनाने का नहीं कहा और ग्राहक ने मांगा नहीं।

कागज की पर्ची पर जुड़ता हिसाब


सर्राफा बाजार व फतेहपुरिया बाजार में किराणे की दुकानों पर ग्राहक खड़े थे। एक दुकान पर विक्रेता ने ग्राहक के कहे अनुसार सामान निकाला। तख्ते पर लगी एक पर्ची पर सामान लिखा, उसके आगे राशि लिखकर जोड़ी और ग्राहक को बताई। रुपए लिए और पर्ची ग्राहक को पकड़ा दी। एक ग्राहक के बिल मांगने पर जीएसटी जुड़ने का कहकर बिल नहीं बनाया।

टॉपिक एक्सपर्ट
दिनेश मोहन शर्मा, अधिवक्ता

सवाल: दुकानदार की ओर से बिल देना व ग्राहक का बिल लेना कितना आवश्यक है?
जवाब: दुकानदार की ओर से बिल देना कानून जरूरी है। क्रेता व विक्रेता का कर्तव्य है कि वे बिल प्राप्त करें व दे। बिल नहीं देना जीएसटी की सीधी चोरी है। सामान के गुणवत्ता की भी गारंटी बिल ही होता है।

सवाल: दुकानदार बिल क्यों देने में आनाकानी क्यों करते हैं या बचते हैं?
जवाब: अधिकांश दुकानदार जीएसटी बचाने के लिए बिल देने से बचते हैं या आनाकानी करते हैं। यदि उपभोक्ता के 108 रुपए का बिल बना तो दुकानदार जीएसटी नहीं लेने का कहकर 105 या 100 रुपए ले लेता है। इसी लालच में उपभोक्ता फंस जाता है।

सवाल: उपभोक्ता कहां शिकायत कर सकता है?

जवाब: उपभोक्ता जिला रसद विभाग, जिला बिक्री कर अधिकारी, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में शिकायत कर सकता है। बिल नहीं होने पर सामान की कोई गारंटी नहीं है। खराबा सामान के लिए उपभोक्ता दुकानदार को दोषी नहीं ठहरा सकता। बिल हर छोटे से छोटे दुकानदार को देना अनिवार्य है।