
‘खसरा-रूबेला रोग से बचाने साढ़े छह लाख बच्चों को लगाएंगे टीका’, 22 जुलाई से शुरू होगा अभियान
पाली। जिले भर में 22 जुलाई से मिजल्स रूबेला अभियान [ Measles-Rubella campaign ] चलाया जाएगा। इसमें खसरा-रूबेला रोग [ Measles-rubella disease ] से बचाने के लिए जिले भर में छह लाख 73 हजार से अधिक बच्चों को एमआर टीका [ MR vaccine ] लगाया जाएगा। यह बात कलक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों से बातचीत में जिला कलक्टर दिनेशकुमार जैन [ district collector Dineshkumar Jain ] ने कही।
उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान नौ माह से लेकर 15 साल तक के बच्चे को यह टीका लगाया जाएगा। जिले के सभी निजी व सरकारी स्कूलों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व आंगनबाड़ी केंद्रों, मदरसों, ईंट-भट्टों व ढाणियों में जाकर टीका लगाया जाएगा। टीका उन बच्चों को भी लगाया जाएगा, जिन्हें पहले भी एमआर का टीका लगाया जा चुका है।
2886 स्कूलों में चलेगा अभियान
जिला कलक्टर जैन ने बताया कि जिले की 1767 सरकारी स्कूलों तथा 1119 निजी स्कूलों में एमआर टीकाकरण अभियान [ Vaccination campaign ] चलाया जाएगा। विद्यालयों में आयोजित होने वाले सत्रों में चार लाख 17 हजार 921 लक्षित बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। इसी तरह आउटरीच सेशन में लक्षित दो लाख 55 हजार 701 बच्चों को टीका लगाया जाएगा। इस अभियान के लिए 572 वैक्सिनेटर्स नियुक्त किए गए है।
उन्होंने बताया कि जिले में छह लाख 73 हजार 622 बच्चों के यह टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान पहले दो से तीन सप्ताह स्कूलों में, चौथे व पांचवें सप्ताह गांवों और शहरी क्षेत्रों में आउटरीच सत्रों और मोबाइल टीमों द्वारा स्कूल ना जाने वाले बच्चों और छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण कराया जाएगा। सबसे पहले यह अभियान स्कूलों में चलाया जाएगा।
इसलिए जरूरी है यह टीका
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.पी. मिर्धा ने बताया कि खसरा वायरस जनित जानलेवा रोग है। इसमें बुखार, खांसी, जुकाम, आंखें लाल होना आदि लक्षण दिखते हैं। बच्चों में खसरे के कारण विकलांगता और अनहोनी का खतरा रहता है। खसरे के चकते बुखार आने के दो दिन बाद दिखते हैं। इसमें डायरिया, निमोनिया, मस्तिष्क की सूजन जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं। कुपोषित बच्चों को भी यह टीका लगाना है। किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी, तेज बुखार और गर्भावस्था में यह टीका नहीं लगाया जाता है।
रूबेला रोग से जन्मजात रूबेला सिन्ड्रोम की संभावना
जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एम.एस. राठौड़ ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में रूबेला रोग होने से जन्मजात रूबेला सिन्ड्रोम हो सकता है। जो गर्भ में पल रहे नवजात शिशुु के लिए गंभीर हो सकता है। रुबेला से गर्भवती माताओं के अबोर्शन, नवजात की मौत, नवजात को जन्मजात बीमारी का खतरा रहता है। डब्ल्यूएचओ की प्रतिनिधि डॉ. कीर्ति पटेल ने बताया कि यह टीका सुरक्षित है। भारत में 32 राज्यों के 30 करोड बच्चों को टीका लगाया जा चुका है। एएनएम टीसी के प्रिंसिपल के.सी. सैनी ने बताया कि नौ माह से 15 वर्ष तक के सभी बच्चों को टीके लगाए जाएंगे।
Published on:
19 Jul 2019 02:42 pm
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