2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Medical and Health Department…इस अस्पताल में डॉक्टर ने जांच नहीं लिखता फिर भी कर देते हैं!

बांगड़ अस्पताल : पीपीपी मोड एमआरआई में घपले की बू ! मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने फरवरी से रोका एमआरआई का बिलचिकित्सक की ओर से लिखी जांच के अतिरिक्त जांच करने का है आरोप

2 min read
Google source verification

पाली

image

Rajeev Dave

Jun 09, 2023

इस अस्पताल में डॉक्टर ने जांच नहीं लिखता फिर भी कर देते हैं!

इस अस्पताल में डॉक्टर ने जांच नहीं लिखता फिर भी कर देते हैं!

बांगड़ मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय की ओर से एक निजी अस्पताल में एमआरआइ (मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग) कराने में घपले की आशंका पर जांच कमेटी का गठन किया गया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बिलों में गडबड़ी की आशंका पर निजी अस्पताल के फरवरी व अप्रेल माह के बिल भी रोक दिए हैं। एमआरआई एक माह पहले ही बंद करवा दी थी।

बांगड़ मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में एमआरआई की मशीन नहीं होने के कारण एक निजी चिकित्सालय के साथ एमओयू किया गया था। बांगड़ के आउटडोर व इनडोर में एमआरआई की जांच की जरूरत होने पर चिकित्सक की ओर से लिखी पर्ची के आधार पर उस चिकित्सालय में एमआरआई की जाती थी। निजी अस्पताल की ओर से करीब एक माह पहले एमआरआई का जो बिल दिया गया, उसमे कॉलेज प्रशासन को घपले की बू आई तो उन्होंने तुरन्त फरवरी माह से बिल का भुगतान रोक दिया और एमआरआई भी बंद करवा दी। उसके लिए जांच कमेटी का गठन किया। जो एमआरआई लिखने वाले चिकित्सकों से यह पता कर रही है कि उन्होंने किस-किस जांच के लिए एमआरआई लिखी थी और निजी चिकित्सालय की ओर से कौन-कौनसी अतिरिक्त एमआरआई का बिल जोड़कर दिया गया है।
सभी बिल रोकर जांच कमेटी बनाई

एमआरआई में अप्रेल माह का ही बिल करीब पांच लाख रुपए से अधिक का था। चिकित्सक की लिखी एमआरआई के अलावा अन्य एमआरआई करने की सूचना पर निजी चिकित्सालय के सभी बिल रोक दिए है। जांच कमेटी का गठन किया है।
डॉ. दीपक वर्मा, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज, पाली

........................................
इधर, सिटी स्कैन की भी जांच

एमआरआई के बिलों में गडबड़ी की आशंका के चलते मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से पीपीपी मोड पर संचालित 128 स्लाइस की सिटी स्कैन मशीन पर होने वाली जांचों के लिए भी कमेटी का गठन किया गया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि 128 स्लाइस की सिटी स्कैन मशीन शुरू होने से लेकर अब तक कॉलेज प्रशासन की ओर से किसी बिल का भुगतान नहीं किया गया है।