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एक गांव एेसा जिसका नाम लेते ही रिश्तो में आने लगती है दरार…

- साटिया जाति के डेरे के कारण पूरा मूलियावास गांव बदनाम  

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पाली .

मूलियावास गांव के निकट आबाद बस्ती का खामियाजा पूरे गांव को भुगतना पड़ रहा है। गांव के सैकड़ों परिवार पिछले कई सालों से बदनामी का दंश झेल रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्हें गांव का नाम लेने में भी झिझक महसूस होती है। खास बात ये है कि इस गांव के नाम के कारण कई परिवारों के बच्चों के तो वैवाहिक रिश्ते भी टूट गए।

जनसुनवाई में उठा मुद्दा
एडीएम भागीरथ विश्नोई ने गुरुवार को जनसुनवाई की। इस दौरान मूलियावास गांव के निकट सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का मामला भी आया। इस पर एडीएम विश्नोई ने एसडीएम सुमित्रा पारीक को मामले की जांच के निर्देश दिए।

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छोडऩा पड़ा गांव
गांव से महज दो किलोमीटर की दूरी पर पाली जाने वाले मार्ग पर यह बस्ती आबाद है। पत्नी व बच्चों के साथ इस मार्ग से होकर गुजरने में भी दिक्कत होती है। कई बार मेरे बच्चे तक को बस्ती के बाहर रोक दिया। बच्चों पर बुरा प्रभाव न पड़े, इसलिए गांव छोड़कर पाली में रहना शुरू कर दिया।

- हीरालाल मेघवाल, पाली

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dहोने चाहिए सकारात्मक प्रयास

प्रथा के नाम पर इस बस्ती की बालिकाओं के साथ जो हो रहा है। उस पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन को सकारात्मक प्रयास करने चाहिए। सरकारी योजनाओं का लाभ देकर इस बस्ती के लोगों को काम-काज उपलब्ध करवाया जाए। जिससे कि इस बस्ती की बालिकाओं को यह गंदा काम न करना पड़े।
- महावीरसिंह, सुकरलाई

होती है झिझक

गांव के निकट स्थित डेरे के कारण पूरा गांव राज्य भर में बदनाम है। स्थिति यह है कि गांव का नाम लेने पर भी ग्रामीणों को झिझक महसूस होती है। ग्रामीणों को अपने बच्चों के संबंध करने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। गांव का नाम सुन कर कई जने यहां अपने बच्चों का संबंध नहीं करते।
- विक्रम सिंह जोधा, मूलियावास

हर कोई परेशान

इस बस्ती के आगे से गुजरने वाले वाहन चालकों को रोका जाता है। कोई रुक जाए तो उसे कुछ रुपए देकर ही आगे जाना पड़ता है। ऐसे में इनसे पीछा छुड़ाने के लिए वाहन चालकों को रुपए देकर ही आगे बढऩा पड़ता है।
- धन्नाराम देवासी, धोलेरिया

सकारात्मक प्रयास करेंगे

पुलिस कार्रवाई से कुछ नहीं होने वाला। कुछ माह कोर्ट के चक्कर काटने के बाद यह लोग फिर से इसी राह पर आ जाएंगे। सरकार की योजनाओं का लाभ दिलवाकर इस जाति के लोगों को रोजगार से जोड़ेंगे। जिससे कि यह बस्ती आने वाले समय में बदनाम बस्ती के नाम से नहीं जानी जाए।
- सुधीर कुमार शर्मा, जिला कलक्टर, पाली