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गांव की बेटियों के लिए प्रेरण्रोत बन सके इसलिए चुनी प्रशासनिक सेवा, आऊवा की मूमल की सिविल सेवा में 173वीं रैंक

-पाली जिले के ऐतिहासिक गांव आऊवा की बेटी मूमल राजपुरोहित ने सिविल सेवा में रचा इतिहास

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गांव की बेटियों के लिए प्रेरण्रोत बन सके इसलिए चुनी प्रशासनिक सेवा, आऊवा की मूमल की सिविल सेवा में 173वीं रैंक

गांव की बेटियों के लिए प्रेरण्रोत बन सके इसलिए चुनी प्रशासनिक सेवा, आऊवा की मूमल की सिविल सेवा में 173वीं रैंक

पाली/मारवाड़ जंक्शन। 1857 की क्रांति [ Revolution of 1857 ] का गवाह रहा ऐतिहासिक गांव आऊवा की बेटी मूमल राजपुरोहित [ Moumal Rajpurohit ] ने सिविल सेवा [ Civil Services ] में 173वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। मूमल की कामयाबी पर पूरा गांव प्रसन्न है।

जमशेदपुर में तैनात वन अधिकारी (आइएफएस) जब्बरसिंह राजपुरोहित की पुत्री ने पांचवें प्रयास में यह सफलता हासिल की है। मूमल की प्रारंभिक शिक्षा जोधपुर में हुई। 12वीं बाद उसने दिल्ली में एडमिशन लिया। आर्टस में ऑनर्स करने के बाद मास्टर्स की डिग्री ली। पिछले चार साल वे वह सिविल सेवा की तैयारी सिद्दत से कर रही थी। मूमल का कहना है कि सतत प्रयास और कठोर परिश्रम से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। वह समाचार पत्र नियमित पढ़ती थीं। कहानियों से उसे गहरा लगाव है। मूमल की सफल्ता पर पुश्तैनी घर आऊवा में दादी सिरेकंवर को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

गांव की बेटियों को आगे बढ़ाना ही लक्ष्य
मूमल बतातीं है, सिविल सेवा चुनने के पीछे दो प्रमुख कारण है। पहला-पिता आइएफएस है। इसलिए बचपन से ही घर में प्रशासनिक माहौल को करीब से देखा है। दूसरा कारण, ‘मैं जिस गांव से हूं, वहां लड़कियां को पढऩे का मौका नहीं मिलता। उनके लिए मैं प्रेरणास्रोत बना चाहती थी।’ यही दो कारण है जिसने सिविल सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया। मूमल कहती है, वह सिविल सेवा में रहकर गांव की लड़कियों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए वातावरण तैयार करेंगी। स्कूल स्तर की शिक्षा को मजबूत करने और शहरों में बेटियों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने पर भी काम करेंगी।