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पाली जिले की बाली विधानसभा सीट: साहब, मंत्री के गांव में हॉस्पिटल नहीं शराब के छह ठेके हैं यही विकास है

बाली सीट से जीते भैरोंसिंह शेखावत 1993 में मुख्यमंत्री बने। 1998 में फिर जीते।

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पाली

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kamlesh sharma

Oct 28, 2018

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रमेश शर्मा की रिपोर्ट

बाली सीट से जीते भैरोंसिंह शेखावत 1993 में मुख्यमंत्री बने। 1998 में फिर जीते। 2002 में शेखावत के उपराष्ट्रपति बनने के बाद खाली हुई सीट पर भाजपा के पुष्पेंद्र सिंह राणावत जीते। उसके बाद से राणावत लगातार जीत रहे हैं।

वर्तमान वसुंधरा राजे सरकार में मंत्री हैं। 25 साल से हाई प्रोफाइल बाली सीट पर बने हालात बरकरार रहेंगे या सियासत करवट बदलेगी? आमजन की नब्ज़ टटोलने मैं पहुंचा पुष्पेंद्र सिंह के मूल गांव बीजापुर। शाम का समय है।

गांव के मुख्य बाजार में टिकमाराम की चाय की होटल पर दो-तीन लोगों से चर्चा शुरू की तो ये लोग पुष्पेद्र सिंह के समर्थन और विरोध में इतनी जोर से बहस करने लगे कि आस-पास भीड़ जमा हो गई। हुकुम सिंह व सांवल राम बोले ये पुष्पेन्द्र सिंह की सीट फिक्स है, उन्हें कोई नहीं हरा सकता। युवा वार्ड पंच शैतान सिंह ने मंत्री पर आरोपों की बौछार शुरू कर दी। उन्होंने मंत्री के छोटे भाई को वार्ड पंच के चुनाव में हराया था।

मैंने पूछा मंत्रीजी ने विकास कितना करवाया है उनका उल्टा सवाल था कैसा विकास! मंत्रीजी के गांव में अस्पताल तो नहीं लेकिन शराब के छह-छह ठेके जरूर हैं। तभी बीच में बात काटते हुए नरपत सिंह बोले, हमारा एमएलए बहुत अच्छा काम कर रहा है। उनके पास कोई काम लेकर जाओ तो मना नहीं करते।

व्यवहार भी अच्छा है। एक युवक विक्रम सिंह बोले, ऊर्जा मंत्री का गांव होते हुए भी बार-बार बिजली कटौती होती है। पुष्पेंद्र सिंह से इसलिए नाराजगी है कि गांव में उनके ही परिवार का राज चलता है। विक्रम बोले- हां, केंद्र में जरूर सरकार अच्छा काम कर रही है लेकिन राज्य सरकार से नाराजगी है। अमर सिंह ने कहा- पिछले दिनों जनता ने दबाव बनाया तो सड़कें बनीं।

मीठालाल मेघवाल भी परिवारवाद के विरुद्ध बोले। भवानी सिंह ने कहा, छोटे कार्यकर्ता की सुनी जानी चाहिए। मंत्री के खास चार-पांच लोग जो बोल दें वही काम होता है। इसीलिए नाराजगी है। जगपाल सिंह ने कहा कि स्कूल में टीचर पूरे नहीं बच्चे प्राइवेट स्कूलों के भरोसे हैं। गांव में कुछ आगे लोहारों की बस्ती में कुछ लोग चर्चा करते मिले। मैंने पूछा तो बोले- अठै तो पुष्पेंद्र सिंह ही जीते सा।

मैने पूछा आप लोगों से मिलते हैं बोले-आवे कदी-कदी। मैंने जानना चाहा आप लोगों का बीपीएल में नाम है या नहीं उन्होंने अपनी टूटी-फूटी खपरैल दिखाते हुए कहा-पण म्होरो झौंपड़ो कच्चो है इनो की कराओ सा।

यहां से आगे मैं भाटूंद गांव पहुंचा। बावड़ी के पास चौपाल पर बैठे लोगों से चुनावी चर्चा शुरू की। सरकारी सेवा से रिटायर चुन्नीलाल शर्मा कहते हैं पुष्पेंद्र जी का व्यवहार बहुत अच्छा है।

वैसी सरलता और सादगी आजकल के नेताओं में नहीं दिखती। गांव में आकर काम के लिए पूछना हालचाल जानना सम्मान देना उनके गुण हैं। क्षेत्र में सड़कें बनी हैं। धीरेंद्र कुमार दवे इससे सहमत हैं। मैंने पूछा मंत्रीजी के गांव के लोग कहते हैं एक ही जाति के लोग हावी हैं। उनका जवाब था नहीं-नहीं ऐसा नहीं है।

बाबूलाल दवे से उच्च शिक्षा और रोजगार की स्थिति के बारे में जानना चाहा तो वह बोले, 12वीं के बाद यहां के बच्चे शिवगंज जोधपुर या अन्य शहरों में पढऩे जाते हैं। रोजगार के लिए गुजरात या महाराष्ट्र जाते हैं। तभी प्रवीण दवे ने बात काटी, पूरे राज्य में रोजगार की समस्या है। ये सरकार रोजगार देने में विफल रही है।

पलायन हो रहा है। वह सरकार के कार्यकाल से कतई संतुष्ट नहीं। उनका साथ देते हुए चेतन दवे बोले, सरकार जाएगी। बीस साल से पुष्पेंद्र सिंह जमे हुए हैं। उन्हें भी बदलना चाहिए हालांकि दोनों ही कांग्रेस की पिछली सरकारों को भी कोसते नजर आए। कहने लगे गहलोत सरकार ने भी युवाओं को छला है।

एक अन्य बुजुर्ग बच्चू लाल त्रिवेदी का मत था सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण पर जो फैसला दिया सरकार को उस पर अध्यादेश नहीं लाना चाहिए था। यह बहुत गलत निर्णय हुआ। इससे नाराजगी है। भाजपा को नुकसान होगा। दिनेश त्रिवेदी पूरी तरह भाजपा के पक्ष में नजर आए और कहने लगे बाली से दिल्ली तक भाजपा का काम बहुत अच्छा है।

बाली की बात हो तो आदिवासियों से बात भी होनी चाहिए। इसीलिए यहां से मैं कुंडाल गांव पहुंचा। गांव में प्रवेश से पहले ही एक घर के बाहर तीन-चार युवा और एक बुजुर्ग खाट पर सुस्ता रहे थे। उन लोगों से पूछा आप किसे वोट देते हैं या यहां का एमएलए कौन है या सरकार किसकी है तो इनके पास सारे जवाब थे।

उन्होंने बताया पुष्पेंद्र सिंह एक-दो महीने में गांव का चक्कर लगा जाते हैं हालचाल पूछते हैं। क्या इस बार भी जीतेंगे? इस सवाल को बुजुर्ग पेपाराम मुस्कुरा कर टाल देते हैं। कहते हैं कौन जाने किसकी सरकार बनेगी और किसको टिकट मिलेगा।

उन्होंने बताया आदिवासी कल्याण योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ये लोग वोट देते हैं तो उसकी समझ भी रखते हैं। बाली में कमठा कारीगर सवाराम ने संकेत दिया लगता है इस बार हवा बदली हुई है।