
पाली। राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एक जिला एक उत्पाद को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। पाली के सोजत की मेहंदी विश्व में अलग पहचान है। ऐसी ही पहचान पाली में मस्टर्ड (सरसों) की बन सकती है। जिसका उत्पादन पाली जिले में इस बार रबी की फसल में 69 हजार 883 हैक्टयर में हो रहा है। यहां औसत भी इतनी भूमि के लगभग उत्पादन होता है। इसके बावजूद ऑइल मिलों की कमी है। जिले के सुमेरपुर क्षेत्र में करीब 80-90 मिल है। जबकि उत्पादन व तेल की मांग के अनुसार इनकी संख्या अधिक हो सकती है और कई लोगों के लिए रोजगार के द्वार खुल सकते है।
पाली जिले में सबसे बड़ी कृषि उपज मंडी सुमेरपुर की है। जिसमें पाली के साथ जालोर व सिरोही जिले के किसान भी उपज लेकर आते हैं। मंडी से ही देश के कई हिस्सों में सरसों (रायड़ा) भेजा जाता है। वहां उससे तेल तैयार कर फिर बाजार में उतारा जाता है।
सरसों के तेल का खाने के साथ आयुर्वेद की दवा में भी उपयोग होता है। पाली में सरसों अधिक होने के बावजूद ऑइल मिल कम है। यहां अन्य जगहों का सरसों तेल बाजार में बिक रहा है। यदि पाली में मिलों व फसल को बढ़ावा मिले तो किसानों को लाभ मिलने के साथ रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।
सुमेरपुर की कृषि मंडी में श्रेष्ठ ग्रेड का रायड़ा आता है। पाली जिले में बड़ी मात्रा में इसका उत्पादन होता है। सरकार को इसे बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए।
विनोद मेहता, पूर्व अध्यक्ष, कृषि मंडी व्यापार संघ, सुमेरपुर
सुमेरपुर-शिवगंज में ऑइल की 80-90 मिल है। जो रेग्यूलर नहीं चल रही है। सरसों को बढ़ावा देने के लिए प्रयास होने चाहिए। जिससे किसानों को लाभ होगा। मिल भी रेग्यूलर चल सकेगी। दिनेश बिंदल, अध्यक्ष, दाल-मिल एसोसिएशन, सुमेरपुर-शिवगंज
-भोजन में तड़का लगाने में।
-तेल के रूप में।
-सरसों के तेल का औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में पंचकर्म सहित अन्य पद्धतियों में मालिश आदि करने में इसका उपयोग होता है। कुछ अन्य रोगों के उपचार में भी इसका उपयोग होता है।
Published on:
23 Jan 2025 07:14 pm
बड़ी खबरें
View Allपाली
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
