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मेहर के बाद भी मंडराने लगी संकट की काली बदरा

-जवाई से खेत उगलेंगे सोना पर हलक तर करने घटाई पानी की मात्रा-जलदाय विभाग के अनुसार जवाई बांध में पेयजल के लिए अभी दस माह का पानी-कटौती करने पर भी अगले मानसून तक मुश्किल से चलेगा पानी

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पाली

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Suresh Hemnani

Oct 16, 2020

मेहर के बाद भी मंडराने लगी संकट की काली बदरा

मेहर के बाद भी मंडराने लगी संकट की काली बदरा

पाली। मेह की मेहर के बाद पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े जवाई बांध में अब तक 56.30 फीट के साथ 6060.50 एमसीफटी पानी आ चुका है। किसानों को सिंचाई के लिए चार पाण मिलने से खेतों में सोना उपजेगा, लेकिन जलदाय विभाग के अधिकारी आगामी गर्मी को लेकर अभी से चिंतित है। उनके अनुसार जवाई व हेमावास बांध में उपलब्ध जल दस माह तक ही जिले के 15 लाख 65 हजार 727 लोगों की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त है। ऐसे में दो माह अधिक पानी चलाने के लिए गुरुवार से पानी में कटौती भी शुरू कर दी गई है। यह कटौती फरवरी तक करने पर एक माह का पानी बचाया जा सकेगा। इसके बाद हेमावास का पानी शेष नहीं रहेगा और जवाई में उपलब्ध जल राशि की समीक्षा कर जुलाई तक पानी आपूर्ति की योजना बनानी होगी। इन पिछले पांच माह में भी कम से कम एक माह का पानी बचाना होगा। इसके बाद भी यदि इस साल की तरह मानसून में देरी हुई तो जल संकट गहरा सकता है।

यों समझे पानी का गणित
पाली शहर की 2 लाख 70 हजार 660 जनसंख्या के लिए रोजाना 1.35 एमसीएफटी पानी रोजाना चाहिए। इस तरह फरवरी तक 137 दिन मतें 184.95 एमसीफटी की जरूरत होगी। जिले के अन्य नौ शहरों की 2 लाख 85 हजार 535 आबादी के लिए रोजाना 0.95 एमसीएफटी के हिसाब से 130.15 एमसीफटी पानी फरवरी तक, जिले के 563 गांवों की 10 लाख 9 हजार 532 आबादी के लिए फरवरी तक 315.10 एमसीएफटी तथा चिकित्सालयों व अन्य संस्थाओं के लिए 61.65 एमसीएफटी पानी की जरूरत होगी। इसमें छीजत शामिल होने पर फरवरी तक 979.85 एमसीफटी पानी खत्म होगा। इसके बाद जवाई में करीब 1362.66 एमसीफटी पानी शेष रहेगा। उस समय में रोजाना उपयोग किए जा रहे 5.05 एमसीफटी पानी के स्थान पर गर्मी के कारण 7.45 एमसीएफटी पानी की जरूरत होगी। इसमें कम से कम दो प्रतिशत पानी की छीजत मिलाने पर पानी की मात्रा 9.45 एमसीएफटी से अधिक होगी। ऐसे में जवाई का शेष पानी 1362.66 एमसीएफटी मुश्किल से 144 दिन चल सकेगा। जो जुलाई अंत तक का है।

अभी बचाएंगे एक माह का पानी
पेयजल के लिए 2342.51 एमसीएफटी पानी जवाई व हेमावास बांध का मिलाकर मिला है। हमने पानी में कटौती शुरू की है। इससे फरवरी तक एक माह और उसके बाद नया प्लान बनाकर एक माह का पानी बचाएंगे। इस तरह 12 माह जुलाई तक पानी आपूर्ति किया जा सकेगा। -रामलाल बैरवा, अधीक्षण अभियंता, जलदाय विभाग, पाली

जवाई बांध के पानी वितरण पर गरमायी सियासत, प्रशासन के निर्णय पर उठे सवाल
पाली। जवाई बांध के पानी वितरण को लेकर सियासत दिनों-दिन गरमा रही है। प्रशासन के निर्णय पर सवाल भी उठ रहे हैं। सेवा और संकल्प महासमिति राजस्थान के संस्थापक अध्यक्ष जबरसिंह राजपुरोहित ने जवाई के पानी वितरण का फैसला भाजपा नेताओं के इशारे पर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन का यह निर्णय विवेकहीन साबित हुआ है। इससे पूरा जिला पेयजल संकट के मुहाने पर आ गया है। मीडिया से बातचीत करते हुए राजपुरोहित ने कहा कि करीब बीस लाख की आबादी में पेयजल संकट गहरा गया है। पानी की कमी के कारण पेयजल आपूर्ति में कटौती करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मांग की है कि जलदाय विभाग की मांग के अनुरूप 3500 एमसीएफटी पानी पेयजल के लिए सुरक्षित रखा जाए।

नेता प्रतिपक्ष ने संभागीय आयुक्त को भेजा ज्ञापन
जोधपुर सम्भागीय आयुक्त के नाम नेता प्रतिपक्ष मोहम्मद हकीम ने जवाई बांध के पानी वितरण को लेकर जोधपुर डाक के जरिए ज्ञापन प्रेषित कर विरोध जताया। ज्ञापन में बताया पेयजल के लिए आरक्षित किए बिना ही जल वितरण कमेटी द्वारा किसानों को पानी दिया जा रहा हैै। इससे जिले में पेयजल संकट की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में न्यायालय का निर्देश भी है कि पेयजल के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी सुरक्षित रखा जाए। प्रशासन का निर्णय न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना है।

72 घंटों से होगी पेयजल आपूर्ति
फालना। बाली, फालना, रानी सहित सभी शहरी व ग्रामीण जवाई बांध आधारित पेयजल योजनाओं में 72 घंटों में एक बार पानी की सप्लाई होगी। जलदाय विभाग ने 72 घंटों के हिसाब से जोन बनाकर पानी वितरण व्यवस्था प्रारंभ की। यह जानकारी जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता भंवर पिण्डेल ने दी।

72 घंटे से जलापूर्ति का निर्णय सही नहीं-राणावत
बाली। क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व मंत्री पुष्पेन्द्रसिंह राणावत ने आरोप लगाया कि जवाई बांध में पर्याप्त पानी होने के बाद भी पेयजल योजनाओं में आम जनता को तीन दिन में एक दिन पानी की आपूर्ति कर परेशान किया जा रहा है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जवाई बांध में 56 फीट से अधिक पानी आ चुका है। अभी तक सेई बांध से पानी की आवक जारी है। जवाई बांध का पानी जहां किसानों के लिए उपयोगी है, उसी प्रकार आम जनता के पेयजल के लिए बनी योजनाओं को ध्यान में रखकर इसका उपयोग करना आवश्यक है। उन्होंने जवाईबांध में उपलब्ध पानी के आधार पर किसानों के साथ-साथ जनता को भी पर्याप्त पानी देेने की बात कही।