
Post day: यहां चिट्ठियां नहीं अब रुपयों का होने लगा आदान-प्रदान
डाक विभाग का नाम सुनते ही जेहन में एक तस्वीर उभरती है। जहां डाक के थैले, चिट्ठियां और पार्सल पड़े होंगे, लेकिन बदलते वक्त और सोशल मीडिया ने डाक विभाग को पूरी तरह से बदल दिया है। जो डाकघर पहले भूरे व नीले रंग के बड़े थैलों में डाक भरकर एक शहर से दूसरे शहर और अलग-अलग देशों में भेजते थे। वहां अब रुपयों को जमा कराने व निकालने का काम अधिक होता है। आधार कार्ड भी बनाए जा रहे हैं। इस बदलाव के साक्षी रहे डाककर्मियों का कहना है कि डाक विभाग का वह स्वर्णिम दौर था। जब सुबह से शाम तक डाकघरों के साथ रेलगाडि़यों में बने विशेष कोचों में डाक की छंटनी की जाती थी। आज वैसे कोच रेलगाडि़यों में नहीं है। डाकघरों में भी डाक पहले की तुलना में कम आती है, लेकिन दूसरे कार्य बढ़ गए हैं।
टॉपिक एक्सपर्ट
डाक विभाग का कार्य डाक का आदान-प्रदान करना ही नहीं है। डाक विभाग जीवन में सामाजिक व आर्थिक विकास में सहभागी बन गया है। यह लोगों को जागरूक करता है। डाक विभाग में पहले एकल पत्र अधिक आते थे, लेकिन अब बल्क डाक अधिक आती है। आज डाक विभाग लोगों के घरों तक गंगाजल व विशेष मंदिरों का घर बैठे प्रसाद तक पहुंचाता है।
अनिल कौशिक, डाक अधीक्षक, पाली
इनका कहना है
डाकघरों में डाक वितरण व संग्रहण के कार्य में पहले की तुलना में कमी आई है। पहले बचत बैंक और डाक का कार्य लगभग बराबरी पर था। उस समय संचार का एक ही साधन था। उस समय डाक अधिक आने पर भी देश के किसी भी हिस्से में साधारण पत्र तक तीन दिन में पहुंचा दिया जाता था। रेलवे में डाक की छंटनी का कार्य होता था। डाक में कमी आने का बड़ा कारण संचार के साधन में सोशल मीडिया आना है।
नरेन्द्र अरोड़ा, सेवानिवृत्त पोस्ट मास्टर
ये कार्य करता है डाकघर
महिला सम्मान बचत प्रमाण पत्र
सुकन्या समृदि्ध बचत योजना
वरिष्ठ नागरिक बचत योजना
लोक भविष्य निधि
सावधि जमा योजना
आवृत्ति जमा योजना
डाक जीवन बीमा
ग्रामीण डाक जीवन बीमा
पाली जिले में इतने है डाकघर
2 प्रधान डाकघर
52 उप डाकघर
329 शाखा डाकघर
749 लेटर बॉक्स
Published on:
09 Oct 2023 10:14 am
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