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संसाधनों के सहयोग से बांगड़ के चिकित्सकों ने किए दो जटिल ऑपरेशन

-मेडिकल कॉलेज अस्पताल बनने के बाद मिली जनरल एनीस्थिसिया मशीन - पहली बार हुए दो गंभीर ऑपरेशन

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bangur hospital pali

पाली. जिले के सबसे बड़े बांगड़ अस्पताल को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तब्दील करने के बाद रविवार को दो ऑपरेशन यूनिट ने दो दिन में दो अलग-अलग सफल ऑपरेशन किए। मेडिकल कॉलेज अस्पताल बनने के बाद बांगड़ को जनरल एनीस्थिसिया मशीन मिली है। इसकी सहायता से एक ऑपरेशन यूनिट ने कान के नीचे गांठ की सुपरफिशियल पोर्थोडेक्टिमी सर्जरी की तो दूसरी यूनिट ने एक महिला मरीज की लेप्रोस्कोपिक एपेडिसेक्टोमी की। दोनों ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहे। सफलता इस बात की है कि ये ऑपरेशन इससे पहले मरीजों को जोधपुर या बड़े शहरों में ही करवाने पड़ते थे।

मरीज को मार सकता था लकवा

पहली ऑपरेशन यूनिट में शामिल सर्जन डॉ. एमएन लोहिया, डॉ. अनिल विश्नोई, डॉ. प्रभुदयाल व ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. गौरव व डॉ. एएन योगी ने मरीज सुल्तान खान के कान के नीचे की गांठ का सफल ऑपरेशन किया। ऑपरेशन लगभग 2.30 घंटे तक चला। मरीज पिछले 6 साल से इस समस्या से परेशान था। चिकित्सकों ने बताया कि मरीज के सुपरफिशियल पोर्थोडेक्टिमी सर्जरी की गई। इस बीमारी के कारण मरीज के चेहरे को लकवा मार सकता है। पहले इस तरह के ऑपरेशन बड़े शहरों में ही किए गए थे।

महिला की लेप्रोस्कोपिक एपेडिसेक्टोमी

दूसरी ऑपरेशन यूनिट के डॉ. शारदा तोषनीवाल, डॉ. डीके सारड़ा, डॉ. मोहनलाल चौधरी ने एक महिला रोगी प्रेमदेवी का लेप्रोस्कोपिक एपेडिसेक्टोमी का ऑपरेशन किया। इसे सामान्य भाषा में दूरबीन से अपेंडिक्स का ऑपरेशन कहा जाता है। बांगड़ अस्पताल में तीन साल पहले यह ऑपरेशन कुछ समय के लिए शुरू हुए थे। लेकिन, सुविधाओं के अभाव में बंद हो गए।

सफल रहे ऑपरेशन

बांगड़ को मेडिकल कॉलेज अस्पताल बनाने के बाद जनरल एनीस्थिसिया (पूर्ण बेहोशी) की मशीन मिली है। संसाधनों के कारण ही दोनों जटिल ऑपरेशन सफल रहे। दोनों ऑपरेशन में निश्चेतना विभाग के डॉ. कमलेश, डॉ. राघवेंद्र, डॉ. रीना व डॉ. सुमन का सहयोग रहा।

-डॉ. दिलीप सिंह चौहान, प्रिंसीपल, मेडिकल कॉलेज