
जालोर जिले की रेवत गांव का राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय।
राजेन्द्रसिंह देणोक
पाली। दसवीं, बारहवीं, ग्रेजुएशन और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अंकों की दौड़ ओलंपिक खेलों की तरह हो गई है। विद्यार्थी 100-99 फीसदी अंक लाने पर ही सुर्खियों में रह पाते हैं। होर्डिंग-पोस्टरों में ऐसे टॉपर्स को ही जगह मिल रही हैं। यह नंबर गेम चुनिंदा विद्यार्थियों और स्कूल-कोचिंग के लिए सुकूनभरा हो सकता है, लेकिन इस प्रतिस्पर्धा के कारण लाखों विद्यार्थी तनाव झेलते हैं। जालोर जिले की रेवत गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के एक शिक्षक ने एक अनूठा तरीका ढूंढ़ा है, ताकि पढ़ाई के इतर प्रतिभा को भी सम्मान मिल सके। शिक्षक ने खुद की स्कूल से यह नवाचार शुरू किया है। इसमें अच्छे अंक लाने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ खेल, नृत्य, कला इत्यादि क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियोें को प्रोत्साहित किया है। उनके नाम और फोटो के होर्डिंग और पोस्टर स्कूल में लगाए हैं।
विद्यार्थियों में कई तरह का टेलेंट होता है। कोई पढ़ाई में तेज होता है तो कोई खेल अथवा चित्रकारी में। वर्तमान में केवल पढ़ाई में टॉपर्स को ही महत्व दिया जा रहा है। इससे अन्य प्रतिभाएं खुद को निराश और हताश अनुभव कर रही है। इस निराशा को दूर करने के लिए रेवत स्कूल में जुलाई माह में प्रवेश उत्सव के दौरान 12वीं कक्षा में सर्वोच्च 95.20 अंक प्राप्त करने वाली विद्यार्थी के साथ-साथ विद्यालय की अन्य प्रतिभाओं के भी चित्र होर्डिंग्स, पोस्टर इत्यादि लगाए। जिनमें खेल, पेंटिंग, नृत्य, सुंदर हैंडराइटिंग, क्राफ्ट, गायन और सुंदर कविता पाठ करने वाले विद्यार्थी भी शामिल हैं। यह वे विद्यार्थी हैं जिनके परीक्षा के प्राप्तांक भी अच्छे हैं। यह नवाचार क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे विद्यार्थियाें को प्रोत्साहन तो मिला ही, भविष्य में वे अपने क्षेत्र में और निखर सकेंगी।
-विद्यार्थियों में पढ़ाई की आदत विकसित करने के लिए बरामदा पुस्तकालय बनाया।
-स्कूल परिसर में समरसता सरस्वती मंदिर का निर्माण किया।
-देशप्रेम की भावना जागृत करने के लिए स्कूल परिसर में भारत माता नमन स्थल।
-गणित को मजबूत करने के लिए क्लास रूम क्रिकेट का प्रयोग।
-कक्षा कक्ष में जय भारत के उदद्बोधन से उपस्थिति का शुभारंभ।
-पर्यावरण संरक्षण के लिए वेस्ट पेपर बैंक
निःसंदेह परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना एक सफलता है। सभी की यह इच्छा भी रहती है। लेकिन, प्रतिभाओं के अन्य भी बहुत सारे क्षेत्र हैं। परीक्षा में अंक प्राप्त करने की होड़ के समानांतर एक लाइन अन्य प्रकार की प्रतिभाओं की भी खड़ी करनी होगी। ज्यादा अच्छा है कि यह दूसरी लाइन और भी बड़ी हो।
-संदीप जोशी, शिक्षक, राउमावि, रेवत
Published on:
21 Aug 2024 06:40 pm
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