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खबर में पढ़े कैसे वन्यजीवो की शरणस्थली को उजाडऩे पर तुला है सरकारी तंत्र

अमुल्य प्राकृतिक धरोहर को बचाने को ग्रामीण हुए लामबद्व, कलक्टर व तहसीलदार को दिया ज्ञापन

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chitra magri

पाली/देसुरी।

पंचायत समिति की ग्राम पंचायत नाडोल के ग्रामीण लामबद्व होकर नाडोल की अमुल्य प्राकृतिक धरोहर-छितरा मगरी-को खनन क्षैत्र में लेने के विरोध में जिला कलक्टर व देसूरी तहसीलदार को ज्ञापन सौप छितरा मगरी को खनन क्षैत्र में लेने के आदेश को निरस्त करने की मांग की गई। नाडोल ग्राम पंचायत क ी सरपंच श्रीमती यशोदा वैष्णव समस्त वार्ड पंच पंचायत समिति सदस्य,किसान,पशुपालक व ग्राम वासियो ने हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन जिला कलक्टर व तहसिलदार देसूरी को देकर बताया कि ग्राम नाडोल राजस्व छितरा मगरी नामक वन सम्पदाक्षैत्र अवस्थित है। इस क्षैत्र को खनिज विभाग अपने अधिन लेकर खान आवटन यानी खनिज पटटा लीज पर देने जा रहा है। जो पूर्णतया गलत और न्यायोचित नहीं है।

इस प्रक्रिया को अविलम्ब खारिज की मांग

यह क्षैत्र अपने पारम्परिक छितरा मगरी के नाम से ख्यात है और आज भी चितो की का प्राकृतिक पनाह स्थल है। साथ अन्य वन्य जीवो का पनाहगाह है। इसे लीज पर देने से वन्य जीवों के सरक्षण व उनका जीवन खतरे पड जायेगा। साथ यह क्षैत्र वन्य प्रर्यावरण का प्राकृतिक हिस्सा है जो जो लीज पर देने से नष्ट हो जायेगा। साथ यहॉ बसेरा करने वाले विविध प्रजातियों के पक्षियों का यहॉ दिन भर विचरण रहता है जिससे इनका जीवन भी खतरे पड जायेगा। इस मगरी क्षैत्र में प्राकृतिक व ऐतिहासिक ऋषिकेश्वर मंदिर व तालाब है। जो प्राचीन धार्मिक भावनाओं की विरासत है। इसे लीज पर देने से ब्लास्टिंग होने से यह स्थान विरान व वन्य जीव तथा यहॉ प्रतिवर्ष आने वाले सैकडो की संख्या में साईबेरियन प्रजाती पक्षियो से विहिन हो जायेगा। इस गांव व क्षैत्र के रेबारी समाज के दो सौ से अधिक परिवारो के भेड बकरियों के ऐवड के करिब ढाई हजार से अधिक भेड बकरियों के अलावा गायो भैसो सहीत अन्य पालतु व दुधारू मवेशियों का इसी मगरी के चारागाह से इनका भरण पोषण होता है। इसे लीज पर देने से यहॉ पर शुरू होने वाले खनन कार्य से इन सबका भी जीवन खतरे में पड जायेगा और इनका अन्य राज्यों में पलायन होने के लिये मजबुर हो जायेगें।

लीज पर देने से अतिप्राचिन बावडियां धार्मिक आस्था के मंदिर व मेलो पर सीधा प्रहार होगा

छीतरा मगरी व उसके क्षैत्र को लीज पर देने से रियासत काल में बनी हुई कलात्मक व ऐतिहासिक बावडियां भी नष्ट हो जायेगा जबकी ग्राम पंचायत द्वारा इनका जिर्णोद्वार का कार्य करवाना प्रस्तावित है। यहा पर ऋषीकेश्वर महादेव का मंदिर व मामाजी धाम पर भरने वाले प्रतिवर्ष के मेले भी अन्द होने से धार्मिक आस्थाओं पर प्रहार होगा। जो स्थानिय व क्षैत्र के वाशिन्दो को किसी भी किमत पर मंजुर नहीं है। साथ धार्मिक उन्माद,उपद्वव व अशांती फैलेगी। और इस देव नगरी का प्राकृतिक सौन्दर्यता भी समाप्त हो जायेगा। इस छितरा मगरी पर ब्लॉस्ट होने से इसके आस पास किसानो की खेती की छोटी मोटी जमीनो पर बुवाई नहीं कर पायेगें जिससे इन जमीनो से उपज व उपयोगिता समाप्त हो जायेगी जिससे किसान व पशुपालक बेरोजगार हो जायेगें। कुओं का पानी सुख जायेगा जिससे लोगो को प्राकृतिक आपदाओं व अकाल इत्यादि झुंझना पडेगा।

ज्ञापन में चेतावनी

ग्रामवासियों ने ज्ञापन में बताया कि छितरा मगरी को लीज पर देने की प्रक्रिया खनन विभाग ने तुरन्त समाप्त नही कि गई तो वन्य जीवो,वन्य पक्षियो,धार्मिक स्थलो,रियासतकाल की कलात्मक बावडियो व इमारतो,पशुओं के चारागाह सहीत कस्बे की प्राकृतिक सौन्र्दय को बचाने के लिये एक विशाल जन आंदोलन चलाया जायेगा। जिसकी सारी जवाबदारी विभाग,प्रशासन व सरकार की होगी।

लीज समाप्त करने के लिये इन्हे भेजी गई ज्ञापन की प्रतियां

छितरा मगरी की लीज समाप्त करने के लिये भेजी गई प्रतियों में प्रमुख रूप से प्रधानमंत्री भारत सरकार,मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार,वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार व राजस्थान सरकार,विधि एवं न्याय मंत्री राजस्थान सरकार,उर्जा राज्य मंत्री एवं क्षैत्रिय विधायक राजस्थान सरकार,उपखण्ड अधिकारी देसूरी व विकास अधिकारी पंचायत समिति देसूरी को भेज कर छितरा मगरी की लीज को समाप्त कर प्रकृति व प्रकृति के जीवों किसानो पशुपालको व आम जनता को राहत देने की मांग की गई है।

जिला कलक्टर को ज्ञापन के दौरान ये रहे प्रमुख रूप से मौजूद

सरपंच श्रीमती यशोदा रमेश वैष्णव,वार्डपंच मांगीदेवी,अयाजखॉ,समाजसेवी नारायणसिंह राठौड,हीराराम घांची,अमरसिंह राजपुरोहीत,टिकमचंद मेघवाल,अमराराम मीणा,रमेशकुमार रामढाणी,गुमानसिंह राजपुरोहीत,लक्ष्मणसिंह राजपुरोहीत,मातीलाल लौहार,मोहनलाल हीरागर,पूनाराम चौधरी,सकाराम चौधरी सहीत ग्रामीणजन मौजूद थे।