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जीते कोई भी, पर्यटन पर काम तो करना ही पड़ेगा, ये है बुंदेलखंड के इस जिले की मांग

अमरकंटक की तर्ज पर पन्ना में भी पर्यटन सर्किट बनाए जाने की जरूरत, पन्ना में पर्यटन क्षेत्र का विकास सैकड़ों के लिए खेाल सकता है रोजगार के द्वार

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bundelkhand ke panna jile me karna hoga paryatan par kam

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पन्ना। हीरों और मंदिरों की नगरी पन्ना में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। यहां के भव्य मंदिर, हीरा खदानों, प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों को मिलाकर पर्यटन सर्किट तैयार कर सैकड़ों लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित किया जा सकता है, जनप्रतिनिधियों ने इस ओर कभी गंभीरतापूर्वक प्रयास नहीं किए। प्रदेश के अनूपपुर जिला स्थित अमरकंटक में इसी प्रकार से छोटे-छोटे पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़कर पर्यटन सर्किट तैयार किया गया है। इससे वहां प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है। 11 दिसंबर को होने वाली मतगणना में जीतने वाले प्रत्याशी को लंबे समय से मांग पर ध्यान देना होगा।

ये है मामला
गौरतलब है कि पन्ना में दशकों से चल रहे वन और राजस्व सीमा विवाद के कारण औद्योगिक इकाई की स्थापना नहीं हो पा रही है। पूर्व में जो पत्थर और हीरा की खदानें चलती थीं उनमें वे ज्यादातर वन राजस्व सीमा विवाद और पर्यावरणीय कारणों से बंद हो गइ हैं। इसके कारण जिले में बेरोजगारी, पलायन, कुपोषण जैसी कई तरह की समस्याएं गंभीर रूप में उत्पन्न हो गई हैं। जिम्मेदारों ने इन्हें दूर करने के लिए कभी गंभीरता पूर्वक प्रयास नहीं किया।

आवागमन के साधनों का अभाव
सलेहा नांदचांद स्थित पार्वती मंदिर दुनिया के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। एक के ऊपर एक पत्थरों को रखकर इसे बनाया गया है। यही पर भगवान शिव के चार मुखों वाली दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। इन मंदिरों का महत्व और सौंदर्य किसी को भी आकर्षित कर सकता है। इन्हें आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से राष्ट्रीय महत्व के स्मारक भी घोषित किया गया है, लेकिन इस स्थानों पर आवागमन के साधनों और ट्रेन की सुविधा नहीं होने के कारण लोग आसानी से नहीं पहुंच पा रहे हैं। सिद्धनाथ आश्रम में भी इसी कारण से कम लोग पहुंच पाते हैं। यहां पहुंचने सड़क का निर्माण भी नहीं कराया गया है। इससे प्राचीन धरोहरों को संवारने को लेकर जिम्मेदार कितने गंभीर रहे हैं इसका भी अनुमान लगाया जा सकता है।

यह हैं प्रमुख धार्मिक स्थल और आश्रम
जिले में प्रमुख धार्मिक स्थलों में बुंदेलखंड का वृंदावन कहे जाने वाला भगवान जुगल किशोरजी मंदिर, प्रणामी संप्रदाय के लोगों का अंतर्राष्ट्रीय तीर्थ प्राणनाथ मंदिर, बलदेव मंदिर, गोविंदजी मंदिर, जगन्नाथ स्वामी मंदिर, श्रीराम जानकी मंदिर, पद्मावती शक्तिपीठ बड़ी देविन मंदिर, चौपड़ा मंदिर, झोर का चौपड़ा मंदिर, पवई का कलेही व हनुमान भाटा मंदिर, बनौली का कंकाली माता मंदिर, नचने का पार्वती व चौमुखनाथ मंदिर सहित सुतीक्षण मुनि का आश्रम सारंग मंदिर, अगस्त मुनि का आश्रम सिद्धनाथ, देवगुरु बृहस्पति का स्थल आदि ऐसे धार्मिक स्थल और आश्रम हंै जिन्हें जोड़कर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इसके साथ ही पन्ना टाइगर रिजर्व, पांडव फाल, रनेह फाल, कउवा सेहा, किलकिला कुंड, बृहस्पति कुंड सहित सैकड़ों मनोरम पर्यटन स्थल हैं जिनको एक सर्किट में जोड़कर पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। धरम सागर, निरपत सागर, लोकपाल सागर में वाटर स्पोट्र्स को चालू किया जा सकता है।

मानसून टूरिज्म की फाइल भोपाल में धूल खा रही
करीब तीन साल पहले पन्ना भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पन्ना टाइगर रिजर्व के मानसून सीजन के कारण बंद होने की स्थिति में बेरोजगार होने वाले सैकड़ों लोगों को रोजगार मुहैया कराने मानसून टूरिज्म की शुरुआत करने की बात कही थी। सूत्र बताते हैं कि पन्ना टाइगर रिजर्व की ओर से मानसून टूरिज्म के प्रोजेक्ट को तैयार करके फाइल को भोपाल भेज दिया गया था। इसके बाद से मानसून टूरिज्म के प्रोजेक्ट की फाइल भोपाल में ही धूल खा रही है। यहां के नेताओं ने भी इस प्रोजेक्ट पर ध्यान नहीं दिया।

विधायकों को करनी होगी पहल
11 दिसंबर को होने वाली मतगणना में किसी भी पार्टी का प्रत्याशी जीते, इतना तो तय है कि यदि उसे जिले के लोगों की भलाई के लिए काम करना है तो पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देना होगा। आगामी दिनों चुने जाने वाले तीनों विधायकों के लिए यह जरूरी होगा कि जिले में पर्यटन विकास की संभावनाओं को तलाशें और लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए पर्यटन स्थलों का विकास कर उन्हें सर्किट से जोड़ें। इससे खजुराहो आने वाले पर्यटकों को भी इनकी ओर आकर्षित किया जा सके। जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस दिशा में गंभीरता पूर्वक प्रयास करने होंगे।