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पन्ना राजपरिवार की महारानी को मिली जमानत, यहां पढें पूरा मामला

जन्माष्टमी के दौरान पन्ना के जुगल किशोर मंदिर में हंगामे के आरोप में किया था गिरफ्तार...।

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पन्ना

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Manish Geete

Sep 09, 2023

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पन्ना राजघराने की महारानी जीतेश्वरी देवी को शनिवार को जमानत मिल गई। उन्हें शुक्रवार को पन्ना में भरे बाजार गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। उन पर जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर में हंगामा करने के बाद धारा 295-A और 253 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

सीजेएम कोर्ट ने जमानत निरस्त होने के बाद शनिवार को डीजे कोर्ट में आवेदन लगाया गया था। शनिवार को जीतेश्वरी देवी को जमानत मिल गई। बताया जा रहा है कि शाम को जमानत मिलने के बावजूद उन्हें आज रात भी जेल में ही रहना होगा। जेलर राजेंद्र मिश्रा ने बताया कि जेल बंद हो चुकी है। अभी जमानत आर्डर हमारे पास नहीं आए हैं। रविवार को सुबह महारानी को जेल से रिहा कर दिया जाएगा।

क्या हुआ था उस रात

पुलिस के अनुसार गुरुवार रात 12.15 बजे बुंदेलखंड के प्रसिद्ध जुगल किशोर मंदिर में जन्माष्टमी की पूजा चल रही थी। जैसे ही मंदिर के पट खुले और आरती शुरू हुई। इस बीच पन्ना राजघराने की सदस्य जीतेश्वरी देवी भी गर्भगृह के पास जाकर बुजारी से चंवर छुड़ाकर पूजा करने लगी और अभद्रता भरी भाषा में बात करने लगी। इस बीच आरती में विघ्न आने पर पुजारी ने आरती बीच में ही रोक दी, लेकिन जीतेश्वरी देवी गर्भगृह में प्रवेश कर गई और खुद आरती उठाने की कोशिश करने लगी। इसका विरोध पुजारी और श्रद्धालु करने लगे। इसके बाद वहां मौजूद महिला सुरक्षाकर्मी ने उन्हें गर्भगृह से खीचकर बाहर निकाला, तो वे गिर गईं। इसके बावजूद भी विवाद करने पर उन्हें मंदिर से ही बाहर निकाल दिया गया। इसका वीडियो भी वायरल हुआ है। इसके बाद दूसरे दिन शुक्रवार को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

मंत्री पर भी आरोप लगाए

राजमाता को मंदिर से घसीटते हुए बाहर निकालने और उन्हें जेल भेजने के बाद उनके बेटे और पन्ना राजपरिवार के उत्तराधिकारी छत्रसाल द्वितीय ने प्रशासन पर मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह के लिए परंपरा तोड़ने का आरोप लगाया है। इस संबंध में छत्रसाल ने वीडियो जारी कर अपनी बात रखी है। छ्त्रसाल ने इस संबंध में वीडियो जारी कर पन्ना की जनता से कहा है कि एक तरफा कहानी सुनकर बात करना गलत है। मुझे निमंत्रण दिया गया था कि आओ और परंपरा निभाओ। कलेक्ट के साथ मीटिंग भी हमारी हुई। लेकिन, जब मैं वहां पहुंचा तो मुझे रोक दिया गया। इसके बाद मेरी मां राजमाता जीतेश्वरी देवी मंदिर में गई थीं। बेटे के साथ अन्याय होता देख एक मां कैसे शांत रह सकती है। परंपरा टूट रही थी। छत्रसाल ने कहा कि जन्माष्टमी के पहले बलदाऊ छठ के दिन ही मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह भी पहंचे थे। उसी दिन पजारियों ने 300 साल पुरानी परंपरा तोड़ दी थी। उस दिन दो चंवर निकाली गई थी। एक हमें दी, दूसरी मंत्री को दी गई। दो चंवर को अपशगुन माना जाता है। उस समय कोई कलेक्टर, एसपी भी नहीं आए थे सामने।

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