
PANNA RANEH FALLS: Raneh Waterfalls the grand canyon of india
पन्ना। पन्ना टाइगर रिजर्व की लाइफ लाइन कही जाने वाली केन नदी अपने अलौकिक सांैदर्य के लिए भी पहचानी जाती है। केन नदी का रनेह फाल रंग-बिरंगी चट्टानों से युक्त है। यह मिनी इंडियन केनयन घाटी के समान है। केन नदी का अध्ययन करने के बाद पन्ना पहुंचे साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (सेनड्राप) दिल्ली के भीमसिंह और वेदितम इंडिया फाउंडेशन कोलकाता के सिद्धार्थ अग्रवाल को रनेह फाल में अमेरिका के ग्रांड केनयन घाटी का प्रतिबिंब दिखाई देता है।
वे केन नदी की भूगर्भीय संरचना और इसके जल विज्ञान को अद्भुत मानते हैं। दोनों समाजसेवी संस्था से जुड़े लोगों ने देश के सबसे बड़े खनन के लिए विख्यात केन नदी के स्याह पक्ष को पैदल चलकर देखा तो रनेह फाल जैसे अद्भुत सौंदर्य से युक्त स्थल को भी देखा।
इनका मानना है कि रनेह फाल और आसपास के क्षेत्र में मिलने वाली बहुरंगीय चट्टानों का सौंदर्य और कलकल बहती केन का धवल रंग किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर सकता है। नदी के बीच में एक अनोखा गठन देखने को मिलता है। आश्चर्यजनक रूप से रंग-बिरंगी चट्टानों के साथ घाटी की शुरुआत का दृश्य मन मोह लेता है। टाइगर रिजर्व के अंदर गहरी घाटियां, झरने और खड़ी पहाडिय़ों का सौंदर्य देखते बनता है।
बेशकीमती चट्टानें और दुर्लभ पत्थर
केन नदी रेत के खनन कारोबार के लिए विख्यात हो चुकी है, लेकिन केन में सिर्फरेत ही नहीं पाई जाती है, बल्कि यहां पर ग्रेनाइट, डोलोमाइट, क्वार्टलाइट, कांग्लोमरेट जैसी चट्टानें और बेशकीमती पत्थर भी पाए जाते हैं। यही कारण है कि केन के सौंदर्य पर दाग लगाने के लिए हमेशा खनन कारोबारियों की नजर रहती है। वे इसके सौंदर्य को बचाने और सहेजने के बजाए इससे रुपए बनाने की जुगाड़ में रहते हैं। जिम्मेदार लोगों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे नदी की हालत दिनोंदिन बदतर होती जा रही है।
अवैध खनन से हालत बिगड़ी
अवैध खनन ने इसकी हालत बिगाड़ दी है। केन कटनी जिले के रीठा तहसील में अहिरगवां और ममार गांव के जंगल के बीच बने खेत की एक मेड़ से निकलती है। इसके उद्गम स्थल से महज 200 मीटर नीचे ही स्टॉप डैम बना है। जिसके कारण नदी की धारा में परिवर्तन हो गया है। उद्गम स्थल से करीब 500 मीटर नीचे नई कटनी-भोपाल रेलवे लाइन का काम चल रहा है। इससे नदी के बहाव क्षेत्र को पूरी तरह से पाट दिया गया है। इसके साथ ही नदी के जल आगमन क्षेत्र में वृक्ष कट रहे हैं। इससे मृदा का क्षरण बढ़ रहा है।
औचित्यहीन सिंचाई परियोजनाएं
केन नदी के एमपी और यूपी वाले हिस्से में करीब एक दर्जन सिंचाई परियोजनाएं हैं। केन नदी में जल बहाव कम होने से उक्त परियोजनाएं औचित्यहीन साबित हो रही हैं। महोड, भैंसवाही, महगवां के समीप केन नदी में चैकडैम बनाकर नदी के बहाव को पूरी तरह से रोक दिया गया है। जिससे यह बारहमासी नदी अब बारिश के 3-4 माह ही बह पाती है। जल स्तर गिरने से यहां नौकायन की संस्कृति भी समाप्त होने की कगार पर है।
Published on:
22 Apr 2018 12:40 pm
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