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इस नेशनल पार्क मे मिले दुर्लभ कृष्ण-मृग, दुनिया में विलुप्त हो रही है ये प्रजाती

कृष्ण मृग जीनस ऐंटीलोप प्रजाति का एकमात्र जीवित सदस्य, अमानगंज बफर जोन में ड्रोन कैमरे में कैद हुए करीब आधा दर्जन कृष्ण मृग

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पन्ना. पन्‍ना नेशनल पार्क में मिलने वाले दुर्लभ वन्यप्राणियों की श्रेणी में अब कृष्ण-मृग का नाम भी जुड़ गया है। पार्क प्रबंधन की ओर से ड्रोन कैमरे से ली गई तस्‍वीरों में करीब आधा दर्जन कृष्ण-मृग देखे गए हैं। कृष्ण-मृग का यह बहुत छोटा समूह होने के कारण इन्हें बहुत कम देखा जाता है।

पन्‍ना नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया ड्रोन कैमरे से ली गई तस्वीरों में अमानगंज बफरे रेंज में 4-6 कृष्ण-मृग दर्ज हुए हैं। इन्हें काला हिरण व भारतीय एंटीलोप भी कहा जाता है। इनकी संख्या बहुत कम है। आईयूसीएन की सूची में इसे संकटापन्न वन्यप्राणियों की श्रेणी में रखा गया है। यह उन्होंने बताया, काले हिरण सामान्यता ऐसे स्थानों पर पाए जाते हैं जहां पानी पर्याप्त मात्रा में हो और घास के मैदान हों। पार्क प्रबंधन इनके सुरक्षा को लेकर विशेष निगरानी कर रहा है। यह मुख्यता गुजरात के भान नगर कृष्णमृग अभ्यरणय मे क्षेत्र में पाए जाते हैं। बहुत कम संख्या में हरदा-होशंगाबाद क्षेत्र में भी देखा जा रहा है।

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संस्कृति में भी विशेष महत्व
काले हिरण को पंजाब हरियाणा और आंध्रप्रदेश में राज्यपशु का दर्जा प्राप्त है। किसान इसको बड़े सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। कृष्ण मृग नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम होता है। जबकि मादा का औसत वजन 20-33 किलोग्राम होता है। नर की चमड़ी दो रंग की दिखती है। ऊपरी हिस्से और पैर के बाहरी हिस्से काले भूरे रंग के होते हैं, नीचे और पैरों के अंदर के सभी हिस्से सफेद होते हैं। इसके सींग में छल्लों जैसे उभार होते हैं। इसके सींग पेंचदार होते हैं। कृष्ण मृग भारतीय उपमहाद्वीप के मूल निवासी है। लेकिन बांग्लादेश में विलुप्त हो गया है। नेपाल में कृष्णम॒ग की अंतिम जीवित आबादी बर्दिया राष्ट्रीय उद्यान के दक्षिण में कृष्णमृग संरक्षण क्षेत्र में स्थित है