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बुंदेलखण्ड में रोजगार की संभावनाएं तलाश रहे शोधकर्ता, जानें किस क्षेत्र में नौकरी मिलने की जगी आस

अध्ययन... अटल बिहारी सुशासन संस्थान के अधिकारियों ने की चर्चा

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पन्ना. बुंदेलखण्ड में रोजगार की संभावनाओं पर अध्ययन कराने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन व नीति विश्लेषण संस्थान के महानिदेशक आर. परशुराम के निर्देशानुसार कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में विभिन्न विभागों व बैंक अधिकारियों की बैठक हुई। इस कार्यक्रम में बुंदेलखण्ड विकास प्राधिकरण के आग्रह पर सागर संभाग के पांचों जिलों में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पृथक-पृथक दलों से अध्ययन कराया जा रहा है। इंफार्मर सेक्टर (अनौपचारिक क्षेत्र) में रोजगार में आने वाली चुनौतियों तथा बेरोजगार युवाओं के लिए सरकार ने संचालित काउंसिलिंग, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम व स्थानीय उद्योगों के अनुरूप आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए युवाओं की आकांक्षाओं को बुंदेलखण्ड के परिवेश के अनुरूप सामाजिक व आर्थिक आधार पर समावेश किया जाएगा। यह अध्ययन व्यवसाय संवर्धन और उससे जुड़े हुए समस्त आयामों का गहराई से अध्ययन किया जाएगा।

नौकरी की संभावना के लिए सरकार की योजनाओं पर डाला प्रकाश
बैठक में कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं व विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डाला गया। इसके बाद विभिन्न विभागों ने अपने-अपने विभाग में संचालित स्वरोजगार योजनाओं के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। अग्रणी बैंक प्रबंधक ने विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं के लिए ऋण वितरण एवं रोजगार स्थापित कराने में होने वाली कठिनाइयों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर संस्थान के प्रमुख सलाहकार चौधरी ने संस्थान की गतिविधियों और अध्ययन की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। संचालन वरिष्ठ सलाहकार जैन ने किया। परिचर्चा में संस्थान के प्रमुख सलाहकार राहुल चौधरी, वरिष्ठ सलाहकार मनोज जैन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बालागुरू के., कंसलटेंट अमिताभ सिंह व रिसर्च एसोसिएट भी उपस्थित रहे।

औद्योगिक संघों के प्रतिनिधियों ने भी दिए सुझाव
उपस्थित अधिकारियों व औद्योगिक संघों के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिए। आगामी दिनों में इस पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसमें जिले की इंफार्मर सेक्टर की इकाइयों तथा उद्यमियों को शामिल किया जाएगा। इस अध्ययन के माध्यम से संस्थान द्वारा यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि बुंदेलखण्ड में रोजगार की दिक्कतें व चुनौतियां क्या-क्या हैं। इन्हें दूर करने के लिए सरकार के वित्तीय संस्थान व कौशल विकास केंद्र कैसी भूमिका निर्वहन कर सकते हैं।