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Bihar Politics: नीतीश खेमा भी डाल रहा ओवैसी के विधायकों पर डोरे, तेजस्वी भी लगे हैं; मार्च का महीना है अहम

Bihar Politics: NDA के लिए, AIMIM का समर्थन उसे सभी पांच सीटें जीतने में मदद करेगा, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन के लिए, सुनिश्चित करेगा कि कम से कम एक उम्मीदवार उच्च सदन में पहुंचे।

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Asaduddin Owaisi

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Photo-IANS)

Bihar Politics बिहार से अप्रैल में राज्यसभा की पांच सीटें खाली होना है। इसको लेकर बिहार में सियासी सियासी हलचलें तेज हो गई है। पांच में एक सीट को लेकर एनडीए और महागठबंधन में जोर आजमाइश तेज हो गई। इस एक सीट को लेकर असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) एक अहम खिलाड़ी बनकर उभरी है, जिसे सत्ताधारी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) और विपक्षी महागठबंधन दोनों ही लुभा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि दोनों गठबंधन सहयोगियों ने पार्टी के पांच विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए AIMIM नेतृत्व से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।

9 अप्रैल को खाली होंगे पांच सीटें

NDA के लिए, AIMIM का समर्थन उसे सभी पांच सीटें जीतने में मदद करेगा, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन के लिए, यह सुनिश्चित करेगा कि कम से कम एक उम्मीदवार उच्च सदन में पहुंचे। बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें 9 अप्रैल को खाली हो जाएंगी, और इन सभी सीटों के लिए चुनाव मार्च में घोषित होने की संभावना है। जिन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें RJD के प्रेम चंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह; जनता दल (यूनाइटेड) के हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर; और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं।

एनडीए और आरजेडी को समर्थन की जरूरत

राज्यसभा चुनाव के फॉर्मूले के अनुसार, एक सीट जीतने के लिए किसी पार्टी को कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। 243 विधानसभा सीटों में से 202 सीटें होने के कारण, NDA पहले वरीयता वोटों के आधार पर चार सीटें हासिल करने के लिए तैयार है। दूसरी ओर, RJD, कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों वाले महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। इसके अलावा, एक सीट BSP के पास, पांच सीटें AIMIM के पास और एक सीट IIP के पास है।

एक सीट के लिए 41 वोट जरूरी

चूंकि RJD के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास अकेले दम पर एक सीट जीतने के लिए आवश्यक 41 वोट नहीं हैं, इसलिए NDA दूसरे वरीयता वोटों के माध्यम से पांचवीं सीट पर दावा कर सकता है। द्विवार्षिक चुनाव में, प्रत्येक मतदाता को वरीयता क्रम में सभी उम्मीदवारों को चिह्नित करना होता है। यदि कोई भी उम्मीदवार पहले वरीयता वोटों से स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर पाता है, तो विजेता का निर्धारण करने के लिए दूसरे वरीयता वोटों की गिनती की जाती है।

पांचवीं सीट को लिए AIMIM का समर्थन ज़रूरी

इस फॉर्मूले से एनडीए सिर्फ 164 विधायकों के साथ आराम से चार सीटें हासिल कर सकता है। इससे गठबंधन के पास 38 वोट बचेंगे, जिसका मतलब है कि महत्वपूर्ण पांचवीं सीट पर दावा करने के लिए उसे तीन और विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। INDIA ब्लॉक अपने 35 विधायकों, ओवैसी की पार्टी के पांच विधायकों और एक BSP विधायक के समर्थन से पांचवीं सीट जीत सकता है, लेकिन इसके लिए AIMIM का समर्थन ज़रूरी है।

असदुद्दीन ओवैसी की अहम भूमिका

इस मामले से परिचित एक सीनियर NDA नेता ने कहा, "ऐसे में, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एक अहम भूमिका निभाएगी, और जिसे भी वह सपोर्ट करेगी, उसकी जीत पक्की है। अगर NDA ओवैसी की पार्टी का समर्थन हासिल कर लेता है, तो वह सभी पांचों सीटें जीत जाएगा।" हालांकि, AIMIM ने अभी तक अपने ऑप्शन खुले रखे हैं। AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमाम का कहना है कि, "हमारे रुख के बारे में बात करना अभी जल्दबाजी होगी। समय आने पर हम फैसला लेंगे," उन्होंने इस बात की न तो पुष्टि की और न ही इनकार किया कि NDA या विपक्ष ने उनकी पार्टी से संपर्क किया है।

विधान परिषद की दो सीटों के लिए भी होगा चुनाव

इस बीच, बिहार में विधान परिषद की दो सीटों के लिए चुनाव राज्यसभा चुनावों के साथ होने की संभावना है। दो MLC, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मंगल पांडे और JD(U) के राधाचरण शाह, विधानसभा के लिए चुने गए हैं, और MLC के तौर पर उनका कार्यकाल 2030 में खत्म होगा। हालांकि, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी विधानसभा के लिए चुने गए हैं, लेकिन उनका MLC कार्यकाल 28 जून को खत्म हो जाएगा।