
भरत तिवारी एनकाउंटर पर भोजपुर में हंगामा करते लोग को भगाती पुलिस
Fake Encounter भोजपुर के शाहपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर हंगामा शुरू हो गया है। ग्रामीणों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। हालांकि, इसके बावजूद लोगों का आक्रोश शांत नहीं हुआ। परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी के कथित फर्जी एनकाउंटर में शामिल जगदीशपुर डीएसपी समेत सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें बर्खास्त किया जाए।
इस मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने आरा-बक्सर हाईवे पर हंगामा किया और एएसपी राजकुमार साह को एक आवेदन सौंपा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक मामले में शामिल सभी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। बाद में एएसपी द्वारा आवेदन पर सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद करीब छह घंटे तक चला हंगामा शांत हुआ।
भारत भूषण तिवारी की बुधवार को पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में मौत हो गई। उन्हें भोजपुर में पुलिस मुठभेड़ के दौरान गोली लगी थी और इलाज के लिए पटना लाया गया था। मुठभेड़ के कुछ घंटों बाद ही उन्होंने दम तोड़ दिया।यह एनकाउंटर, जिसकी लाइव स्ट्रीमिंग भी की गई थी, उस बयान के 24 घंटे के भीतर हुआ जिसमें भोजपुर पुलिस ने कहा था कि बिलौटी गांव निवासी 28 वर्षीय भारत भूषण तिवारी मानसिक रूप से अस्वस्थ थे। पुलिस का दावा था कि उन्हें सुरक्षित हिरासत में लेकर किसी मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में इलाज के लिए भेजने की प्रक्रिया चल रही थी। हालांकि, इस बयान के कुछ ही घंटों बाद हुए एनकाउंटर और भारत भूषण की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विरोधियों और परिजन अब भोजपुर एसपी के इस बयान पर ही सवाल खड़ा कर रहे हैं।
भोजपुर पुलिस की ओर से मंगलवार और बुधवार को जारी की गई प्रेस विज्ञप्तियों ने पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इन्हीं बयानों के कारण पुलिस खुद अपने दावों को लेकर कटघरे में नजर आ रही है। मंगलवार को भोजपुर एसपी राज ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया था कि सुबह करीब 9 बजे शाहपुर थाना पुलिस को सूचना मिली कि एक व्यक्ति पिस्तौल लहराते हुए घूम रहा है और हवा में फायरिंग कर रहा है। बयान के अनुसार, स्थानीय पुलिस और भोजपुर एसटीएफ की टीम ने उसे कई बार आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन वह रुक-रुक कर पुलिस पर फायरिंग करता रहा, जिससे पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया था कि जब पुलिस टीम उसके घर पहुंची तो पता चला कि वायरल वीडियो में दिख रहा व्यक्ति “मानसिक रूप से अस्वस्थ” है। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि उसे मानसिक स्वास्थ्य संस्थान भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही लोगों से मामले से जुड़े “भ्रामक” वीडियो और सूचनाएं प्रसारित नहीं करने की अपील की गई थी।
हालांकि, अगले ही दिन बुधवार को जारी दूसरी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि बुलेटप्रूफ जैकेट पहने एसटीएफ जवानों ने भरत भूषण तिवारी की घेराबंदी करने की कोशिश की। इस दौरान तिवारी ने पुलिस टीम पर गोली चलाई, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई में उसके पैरों में गोली लगी। घायल अवस्था में उसे तत्काल पटना ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस के इन दोनों लिखित बयानों को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि पहले व्यक्ति को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताते हुए उसके उपचार की बात की गई, जबकि कुछ ही घंटों बाद हुए एनकाउंटर और उसकी मौत ने पुलिस की कार्रवाई तथा उसके दावों को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है।
Updated on:
18 Jun 2026 06:36 pm
Published on:
18 Jun 2026 06:05 pm
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