
तेजस्वी यादव -सम्राट चौधरी। फोटो -AI
राज्य सभा चुनाव के बाद बिहार में विधान परिषद चुनाव की तैयारियाँ तेज हो गई हैं। राजनीतिक दल अपनी चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। 11 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में महागठबंधन को 2 सीटों का नुकसान हो सकता है। साथ ही चर्चा है कि क्या चिराग पासवान की पार्टी भी अपना खाता खोल पाएगी। विधान परिषद सूत्रों के अनुसार, नई सरकार के गठन के तुरंत बाद विधानसभा कोटे से विधान परिषद चुनाव की घोषणा की जाएगी। चुनाव अप्रैल के अंतिम सप्ताह या मई के पहले सप्ताह में होने की संभावना है।
"मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा निर्वाचित होने के बाद खाली हुई सीट पर भी जल्द चुनाव होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, इस सीट पर नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का विधान परिषद जाना तय माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि नई सरकार में निशांत को एक बड़ी भूमिका दी जा सकती है। इसी तरह, बीजेपी के मंगल पांडेय की सीट पर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की संभावना है। फिलहाल दीपक किसी सदन के सदस्य नहीं हैं, लेकिन वह सरकार में मंत्री हैं।"
"राजनीति के जानकारों के अनुसार, अप्रैल के अंतिम या मई के पहले सप्ताह में होने वाले विधान परिषद चुनाव में जदयू को 4, बीजेपी को 3, RLM को 1 और RJD को 1 सीट मिलने की संभावना है। इसके अलावा, लोजपा (आर) का भी विधान परिषद में खाता खुल सकता है। 28 जून 2026 को विधान परिषद की 9 सीटें खाली होंगी। इनमें राजद की 2, जदयू की 3 और कांग्रेस व बीजेपी की 1-1 सीट शामिल हैं। दो सीटें पहले से ही खाली हैं।"
राज्यसभा की तरह ही विधान परिषद के लिए भी चुनाव होते हैं। गणित के हिसाब से किसी प्रत्याशी को जीतने के लिए 25 विधायकों की जरूरत होती है। इसे इस तरह समझें: कुल विधायकों की संख्या ÷ कुल सीटों की संख्या + 1 → 243 ÷ 10 = 24.3, यानी 25 विधायक।
जून में 11 सीटों पर चुनाव होने हैं। ऐसे में विधान परिषद में 11 में 10 सीटों पर एनडीए प्रत्याशियों की जीत पक्की मानी जा रही है, क्योंकि महागठबंधन के कुल विधायकों की संख्या केवल 41 है। इसके चलते उनके पास दूसरा प्रत्याशी उतारने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है। इस चुनाव में एनडीए को 2 सीटों का फायदा होने की संभावना है। वर्तमान में महागठबंधन के पास 3 सीटें हैं। 2 राजद के पास और 1 कांग्रेस के पास। इनमें से राजद केवल अपनी एक सीट बचा पाएगा।
राज्य सभा चुनाव के दौरान LJP(R) ने बिना शर्त के NDA को समर्थन दिया था। सूत्रों का कहना है कि लोजपा (आर) को एनडीए में विधान परिषद की एक सीट मिल सकती है। पार्टी के पास अपने 19 विधायक हैं। इन्हें जीत के लिए 6 विधायक की जरूरत है। बीजेपी के तीन विधान परिषद के 3 सदस्यों को जीताने के बाद भी 10 विधायक बचते हैं। ऐसे में सिर्फ बीजेपी की मदद से ही लोजपा(आर) का एक प्रत्याशी की जीत संभव है।
Updated on:
07 Apr 2026 01:40 pm
Published on:
07 Apr 2026 01:32 pm
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